पंचकूला सरकारी स्कूल में 6 वर्षीय बच्ची से मारपीट: परिजनों ने लगाए लापरवाही के गंभीर आरोप
सारांश
मुख्य बातें
हरियाणा के पंचकूला स्थित एक सरकारी स्कूल में 31 अक्टूबर 2026 को एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, जिसमें कथित तौर पर एक 8 वर्षीय छात्र ने 6 वर्षीय बच्ची के साथ बर्बरतापूर्ण मारपीट की। बच्ची बेहोश मिली और कमरे में खून फैला हुआ था। इस घटना ने स्कूल प्रबंधन और सरकारी निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना का क्रम
बच्ची के चाचा फैसल ने पत्रकारों को बताया कि उस दिन स्कूल का माहौल सामान्य था — बच्ची रोज़ की तरह सुबह स्कूल गई थी और उसके जाने से पहले कोई विवाद या असामान्य बात नहीं हुई थी। दोपहर 3 बजे स्कूल की छुट्टी होने पर ऑटो चालक उसे लेने पहुँचा, लेकिन बच्ची वहाँ नहीं मिली। स्कूल स्टाफ ने ऑटो चालक को बताया कि बच्ची 'गायब' है।
ऑटो चालक ने घर लौटकर बच्ची के पिता को सूचित किया, जो तुरंत स्कूल पहुँचे। फैसल के अनुसार, जिस लड़के ने मारपीट की थी, उसी ने बच्ची के पिता को बताया कि वह ऊपर है। जब पिता ऊपर पहुँचे तो बच्ची बेहोश अवस्था में पड़ी थी और 'कमरे में हर जगह खून ही खून था' — यह फैसल के शब्द हैं। फैसल ने कहा, 'बच्ची को बेरहमी से मारा गया है — उसको इस तरह से मारा गया है कि किसी जानवर को भी नहीं मारते।'
स्कूल प्रशासन पर लापरवाही के आरोप
फैसल ने बताया कि शिक्षकों के अनुसार उस दिन कुछ स्टाफ सदस्यों की ड्यूटी अन्यत्र लगी हुई थी, जिसके कारण दो-तीन कक्षाओं को एकसाथ एक ही शिक्षक के भरोसे छोड़ दिया गया था। इसके अलावा, प्रिंसिपल की ड्यूटी का समय दोपहर 3 बजे समाप्त हो गया था, और घटना दोपहर 3 बजे से 3:15 बजे के बीच हुई। परिजनों का आरोप है कि यदि प्रिंसिपल के कमरे में कोई मौजूद होता, तो वह सीसीटीवी कैमरों के ज़रिए बच्ची को ऊपर ले जाते देख सकता था और घटना को रोका जा सकता था।
फैसल ने कहा, 'ऊपर की कक्षाएं पहले ही बंद कर दी गई थीं।' परिजनों के मुताबिक यह घटना पूरी तरह टाली जा सकती थी, अगर स्कूल में निगरानी व्यवस्था चाक-चौबंद होती।
सीसीटीवी और निगरानी का सवाल
परिजनों के बयान के अनुसार स्कूल में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए थे, परंतु जिस समय यह घटना हुई उस समय प्रिंसिपल का कार्यालय खाली था। यह ऐसे समय में आया है जब पूरे देश में स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं। गौरतलब है कि सीसीटीवी की मौजूदगी तभी कारगर होती है जब उसकी निगरानी के लिए भी कोई उपस्थित हो।
आम जनता और परिजनों की माँग
परिजन चाहते हैं कि इस मामले में स्कूल प्रशासन की जवाबदेही तय की जाए और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई हो। उनका कहना है कि स्टाफ की कमी और प्रिंसिपल की समयपूर्व विदाई ने इस घटना को अंजाम लेने का अवसर दिया। बच्ची की स्थिति और उसके इलाज के बारे में अधिकारियों की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
यह मामला हरियाणा सरकार और शिक्षा विभाग के लिए एक गंभीर चुनौती है। आने वाले दिनों में पुलिस जाँच और स्कूल प्रशासन के खिलाफ संभावित कार्रवाई पर सभी की नज़र बनी रहेगी।