फॉर्म-6 पर CJI सूर्यकांत की स्पष्टता के बाद चिदंबरम का CEC पर सीधा प्रहार
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में स्पष्ट किया कि भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने खुली अदालत में यह साफ कर दिया है कि सर्वोच्च न्यायालय ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए उपयोग किए जाने वाले फॉर्म-6 के किसी भी संशोधित संस्करण को स्वीकृति नहीं दी है। यह बयान 'इंडिया' गठबंधन के सांसदों के उस संयुक्त प्रदर्शन के दौरान आया, जिसमें स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभ्यास को रद्द करने और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग की जा रही थी।
CJI का बयान और चिदंबरम की दलील
CJI सूर्यकांत की यह टिप्पणी CEC ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध मुकदमा चलाने की माँग वाली एक याचिका पर सुनवाई के दौरान दी गई थी। चिदंबरम ने पत्रकारों से कहा, 'भाजपा हिंदी या अंग्रेज़ी नहीं पढ़ सकती। सीजेआई ने फॉर्म-6 में किसी भी संशोधन को मंजूरी देने से स्पष्ट इनकार किया है। उन्होंने यह एक बार कहा था और इसे कई बार प्रसारित किया जा रहा है।'
उन्होंने आगे तर्क दिया कि फॉर्म-6 में जोड़ा गया डिक्लेरेशन वास्तव में एक संशोधन ही है। उनके शब्दों में, 'डिक्लेरेशन असल में फॉर्म-6 में एक संशोधन और जोड़ है। जोड़ का मतलब संशोधन भी होता है।' चिदंबरम ने भाजपा से प्रश्न किया कि खुली अदालत में दिए गए बयान को वह कैसे नकार सकती है।
कार्ति चिदंबरम का SIR अभ्यास पर कड़ा रुख
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने भी SIR अभ्यास को 'असंवैधानिक और अधिकार-क्षेत्र से बाहर' (अल्ट्रा वायर्स) करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त एकतरफा निर्णय ले रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग में फैसले तीनों आयुक्तों की सहमति या बहुमत से होने चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि यह पूरा अभ्यास मतदाताओं को सूची में जोड़ने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें बाहर करने के लिए बनाया गया है। उनके अनुसार फॉर्म-6 में पूछे जा रहे सवाल — जैसे कि आवेदक के माता-पिता मतदाता थे या नहीं — मूल संवैधानिक अधिकार के खिलाफ हैं।
माता-पिता की मतदाता स्थिति पर सवाल क्यों उठे
कार्ति चिदंबरम ने स्पष्ट किया, 'आपका मतदान का अधिकार इस बात पर निर्भर नहीं करता कि आपके माता-पिता मतदाता थे या नहीं। जब तक आप भारतीय नागरिक हैं, 18 वर्ष से अधिक उम्र के हैं और किसी निर्वाचन क्षेत्र के निवासी हैं, आपको मत देने का अधिकार है। यह एक बुनियादी अधिकार है और इससे इनकार किया जा रहा है।' यह बयान संविधान के अनुच्छेद 326 की मूल भावना से जोड़कर देखा जा रहा है, जो सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार की गारंटी देता है।
फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग का आरोप
कार्ति चिदंबरम ने फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग पर भी गंभीर चिंता जताई। फॉर्म-7 का उपयोग मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम सूची से हटाने के लिए होता है। उनके अनुसार, कर्नाटक में कथित तौर पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने फॉर्म-7 के माध्यम से 7,000 आवेदन दाखिल कर मतदाताओं को सूची से हटाने की कोशिश की। यह एक गंभीर आरोप है, हालाँकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।
गौरतलब है कि SIR अभ्यास को लेकर विपक्ष की आपत्तियाँ पिछले कई महीनों से सामने आ रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्यों में चुनावी प्रक्रियाओं की पारदर्शिता को लेकर न्यायपालिका और राजनीतिक दलों दोनों में बेचैनी बढ़ रही है।
आगे क्या होगा
कार्ति चिदंबरम ने कहा कि न्यायपालिका की अंतरात्मा भी अब जाग गई है, इसीलिए नोटिस जारी किए गए हैं और न्यायाधीश चिंता जता रहे हैं। उन्होंने इसे महज़ राजनीतिक नहीं बल्कि जनता से जुड़ा मुद्दा बताया। CEC ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सर्वोच्च न्यायालय में SIR से संबंधित मामलों की सुनवाई जारी रहने की संभावना है।