8 अक्टूबर 2026
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चिदंबरम का BJP अध्यक्ष नितिन नवीन पर पलटवार: 'घुसपैठिए थे तो विशेष शिविर क्यों?'

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चिदंबरम का BJP अध्यक्ष नितिन नवीन पर पलटवार: 'घुसपैठिए थे तो विशेष शिविर क्यों?'

सारांश

BJP अध्यक्ष नितिन नवीन ने विपक्ष को 'अराजकतावादी' और राहुल गांधी को 'घुसपैठियों का वकील' कहा — तो कांग्रेस नेता चिदंबरम ने पलटकर वही सवाल पूछा जो पूरी बहस की जड़ है: अगर हटाए गए नाम घुसपैठियों के थे, तो चुनाव आयोग उन्हें वापस जोड़ने के लिए शिविर क्यों लगा रहा है?

मुख्य बातें

चिदंबरम ने 8 अक्टूबर 2026 को एक्स (X) पर BJP अध्यक्ष नितिन नवीन के 'अराजकतावादी' बयान पर तीखा जवाब दिया।
चिदंबरम ने पूछा — यदि मतदाता सूची से हटाए गए लोग 'घुसपैठिए' थे, तो चुनाव आयोग 'छूट गए' नामों को जोड़ने के लिए विशेष शिविर क्यों लगा रहा है?
नितिन नवीन ने वाराणसी में आरोप लगाया था कि राहुल गांधी 'घुसपैठियों' के लिए लड़ रहे हैं और विपक्ष 'अराजकतावादी मानसिकता' से काम कर रहा है।
चिदंबरम के अनुसार, कांग्रेस और 'इंडिया' गठबंधन के विरोध के कारण CEC ज्ञानेश कुमार से जुड़े विवाद में चुनाव आयोग को कदम उठाने पड़े।
SIR प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के मामले पर चुनाव आयोग के भीतर भी असहमति सामने आई है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने 8 अक्टूबर 2026 को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष नितिन नवीन के उस बयान पर तीखा पलटवार किया, जिसमें विपक्ष पर 'अराजकतावादी मानसिकता' का आरोप लगाया गया था। एसआईआर (SIR) प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध जारी विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में यह राजनीतिक वाकयुद्ध तेज़ हो गया है।

चिदंबरम का केंद्रीय सवाल

चिदंबरम ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए नितिन नवीन के तर्क को सीधे चुनौती दी। उन्होंने लिखा, "नितिन नवीन ने कहा कि विपक्ष के नेता (एलओपी) राहुल गांधी घुसपैठियों की वकालत कर रहे हैं। अगर मतदाता सूची से हटाए गए नाम 'घुसपैठियों' के थे, तो चुनाव आयोग 'छूट गए' नामों को फिर से जोड़ने के लिए विशेष शिविर क्यों लगा रहा है?"

यह सवाल सीधे तौर पर SIR प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर उठाया गया है — यदि हटाए गए नाम वास्तव में अनधिकृत व्यक्तियों के थे, तो चुनाव आयोग द्वारा उन्हें दोबारा जोड़ने की पहल तर्कसंगत रूप से उस दावे को कमज़ोर करती है।

विपक्ष के विरोध का असर

चिदंबरम ने दावा किया कि कांग्रेस, 'इंडिया' गठबंधन की पार्टियों और युवा एवं छात्र समूहों के विरोध के कारण राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को बोलने पर मजबूर होना पड़ा, चुनाव आयोग से सवाल करने पड़े और 'छूट गए' मतदाताओं के नाम पुनः जोड़ने के लिए विशेष शिविर लगाने पड़े।

उन्होंने आगे कहा, "भले ही आयोग ने देर से ही सही — मुख्य चुनाव आयुक्त से असहमत दो चुनाव आयुक्तों की वजह से — यह माना हो कि असली नागरिकों के साथ बहुत अन्याय हुआ है, फिर भी BJP ऐसी बात का बचाव कर रही है, जिसका बचाव नहीं किया जा सकता।"

नितिन नवीन का मूल बयान

इससे पहले वाराणसी में 'सेवा संकल्प अभियान' के समापन समारोह में BJP अध्यक्ष नितिन नवीन ने आरोप लगाया था कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी 'घुसपैठियों' के लिए लड़ रहे हैं और विपक्ष 'अराजकतावादी मानसिकता' के साथ समाज में भ्रम फैला रहा है।

नवीन ने कहा था, "ये अराजकतावादी मानसिकता के लोग हैं, जिन्हें केवल समाज में विष घोलना आता है। अगर ऐसा ही था, तो केरल में भी चुनाव इसी चुनाव आयोग ने कराया था। तमिलनाडु में, जहाँ ये पीछे से सत्ता में पहुँचे हैं, वहाँ का चुनाव भी इसी चुनाव आयोग ने कराया था।"

उन्होंने राहुल गांधी को चुनौती दी कि यदि उनमें हिम्मत है तो वे पहले अपना इस्तीफ़ा दें।

व्यापक राजनीतिक संदर्भ

गौरतलब है कि SIR प्रक्रिया को लेकर विवाद पिछले कुछ हफ्तों से जारी है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूचियों की समीक्षा में बड़ी संख्या में वैध नागरिकों के नाम काटे गए हैं। CEC ज्ञानेश कुमार के कामकाज पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं, और यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों में चुनावी तैयारियाँ चल रही हैं।

यह पहली बार नहीं है जब मतदाता सूची की समीक्षा को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने सामने आए हों — लेकिन चुनाव आयोग के भीतर ही असहमति की ख़बरें इस विवाद को असामान्य बनाती हैं।

आगे की राह

चुनाव आयोग द्वारा विशेष शिविरों के आयोजन से यह स्पष्ट होता है कि 'छूट गए' मतदाताओं की संख्या नगण्य नहीं है। आने वाले दिनों में यह मामला संसद में और अधिक तूल पकड़ने की संभावना है, जहाँ विपक्ष इसे चुनावी पारदर्शिता के व्यापक मुद्दे से जोड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह भारतीय चुनावी संस्थाओं की विश्वसनीयता पर चल रही एक गहरी बहस की परछाईं है। BJP का तर्क उस क्षण कमज़ोर पड़ जाता है जब चुनाव आयोग स्वयं 'छूट गए' मतदाताओं को वापस जोड़ने के लिए शिविर लगाता है — यह स्वीकृति है कि प्रक्रिया में चूक हुई। दूसरी ओर, विपक्ष के लिए यह अवसर तब और बड़ा हो जाता है जब आयोग के भीतर से ही असहमति की ख़बरें आती हैं। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है वह यह है: SIR जैसी तकनीकी प्रक्रियाएँ आम मतदाता की नज़र में 'घुसपैठिए बनाम नागरिक' की राजनीतिक लड़ाई में कैसे तब्दील होती हैं — और यह ध्रुवीकरण लोकतांत्रिक भागीदारी को वास्तविक नुकसान पहुँचाता है।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पी. चिदंबरम ने नितिन नवीन को क्या जवाब दिया?
चिदंबरम ने एक्स पर पोस्ट करते हुए पूछा कि यदि मतदाता सूची से हटाए गए नाम 'घुसपैठियों' के थे, तो चुनाव आयोग उन्हें दोबारा जोड़ने के लिए विशेष शिविर क्यों लगा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि BJP ऐसी बात का बचाव कर रही है जिसका बचाव नहीं किया जा सकता।
BJP अध्यक्ष नितिन नवीन ने विपक्ष पर क्या आरोप लगाए?
नितिन नवीन ने वाराणसी में 'सेवा संकल्प अभियान' के समापन पर आरोप लगाया कि राहुल गांधी 'घुसपैठियों' के लिए लड़ रहे हैं और विपक्ष 'अराजकतावादी मानसिकता' से समाज में भ्रम फैला रहा है। उन्होंने राहुल गांधी को इस्तीफ़े की चुनौती भी दी।
एसआईआर (SIR) प्रक्रिया क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
SIR (Special Intensive Revision) मतदाता सूचियों की विशेष समीक्षा की एक चुनावी प्रक्रिया है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में वैध नागरिकों के नाम काट दिए गए, जिसके बाद चुनाव आयोग को 'छूट गए' मतदाताओं के नाम वापस जोड़ने के लिए विशेष शिविर लगाने पड़े।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस विवाद में क्या संदर्भ है?
CEC ज्ञानेश कुमार के कामकाज के विरुद्ध विपक्ष का विरोध प्रदर्शन जारी है। चिदंबरम के अनुसार, चुनाव आयोग के भीतर दो आयुक्त CEC से असहमत हैं, और इसी दबाव में आयोग ने SIR के कारण हुई चूक को आंशिक रूप से स्वीकार किया।
इस पूरे विवाद का आगे क्या असर हो सकता है?
विशेष शिविरों के आयोजन से संकेत मिलता है कि 'छूट गए' मतदाताओं की संख्या महत्वपूर्ण है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद और चुनावी राज्यों में और अधिक तूल पकड़ सकता है, और चुनावी पारदर्शिता की बड़ी बहस का हिस्सा बन सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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