सुप्रीम कोर्ट का स्पष्टीकरण: बदले हुए फॉर्म 6 पर कोई आदेश नहीं, ECI के दावे को नकारा
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 12 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि उसने नए मतदाता पंजीकरण के लिए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के संशोधित फॉर्म 6 डिक्लेरेशन पर न तो कोई अनुमोदन दिया है और न ही कोई आदेश पारित किया है। न्यायालय ने यह भी कहा कि बिहार की वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) मामले में निर्णय सुनाते समय यह संशोधित फॉर्म उसके समक्ष प्रस्तुत ही नहीं था।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ एक नई याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यप्रणाली और फॉर्म 6 में किए गए बदलावों पर प्रश्न उठाए गए थे।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने दलील दी कि 5 अक्टूबर को सर्वोच्च न्यायालय पहले ही स्पष्ट कर चुका था कि संशोधित फॉर्म 6 को उसकी स्वीकृति नहीं मिली है — जबकि ECI ने 26 सितंबर को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दावा किया था कि न्यायालय ने बदले हुए डिक्लेरेशन को सही ठहराया है।
न्यायालय की स्थिति
न्यायमूर्ति बागची ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट शब्दों में कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने नए फॉर्म 6 पर कोई निर्णय नहीं दिया है, क्योंकि बिहार SIR मामले में फैसला सुनाते समय यह संशोधित फॉर्म अस्तित्व में ही नहीं था।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि न्यायालय की पूर्व मौखिक टिप्पणियों को न तो अनुमोदन और न ही अस्वीकृति के रूप में व्याख्यायित किया जा सकता है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मीडिया को चेतावनी देते हुए कहा, "कृपया खबरों के लिए शब्द न चुनें।"
विवाद की जड़ — संशोधित डिक्लेरेशन क्या है
संशोधित फॉर्म 6 के अंतर्गत नए मतदाता के रूप में पंजीकरण करवाने वाले आवेदकों को यह घोषित करना अनिवार्य है कि क्या वे या उनके माता पिता पूर्व के किसी SIR में मैप किए गए थे। दूसरे राज्यों में SIR के दौरान प्रयुक्त फॉर्म 6 के पुराने संस्करण में यह शर्त नहीं थी।
गौरतलब है कि यह संशोधन बिहार SIR फैसले के बाद लाया गया था, अतः न्यायालय के पास फैसले के समय इसकी सामग्री की जाँच करने का कोई अवसर ही नहीं था। दो चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति जताई है कि केंद्र सरकार द्वारा 'रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960' में संशोधन किए बिना इस डिक्लेरेशन में बदलाव नहीं किया जा सकता।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) को लाभ पहुँचाने के लिए फॉर्म 6 में एकतरफा और कथित तौर पर गैरकानूनी तरीके से बदलाव किए गए। BJP ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।
BJP प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने न तो फॉर्म को अवैध घोषित किया और न ही इसे अस्वीकार किया। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायालय ने इस बदलाव में किसी प्रकार की अवैधता नहीं बताई है।
आगे क्या होगा
यह मामला अब सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है, जहाँ नई याचिका पर सुनवाई जारी रहेगी। यह प्रकरण ऐसे समय में उभरा है जब ECI के निर्णय निर्माण की प्रक्रिया और संस्थागत स्वायत्तता पर व्यापक बहस चल रही है। न्यायालय की अगली सुनवाई में यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि संशोधित फॉर्म 6 की वैधता को औपचारिक रूप से चुनौती दी जाएगी या नहीं।