12 अक्टूबर 2026
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सुप्रीम कोर्ट का स्पष्टीकरण: बदले हुए फॉर्म 6 पर कोई आदेश नहीं, ECI के दावे को नकारा

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सुप्रीम कोर्ट का स्पष्टीकरण: बदले हुए फॉर्म 6 पर कोई आदेश नहीं, ECI के दावे को नकारा

सारांश

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि बिहार SIR फैसले को ECI के संशोधित फॉर्म 6 की मंजूरी नहीं माना जाए — क्योंकि वह फॉर्म फैसले के वक्त था ही नहीं। यह स्पष्टीकरण ECI के उस दावे को सीधे नकारता है जिसे लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 12 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि उसने ECI के संशोधित फॉर्म 6 डिक्लेरेशन पर कोई आदेश नहीं दिया।
न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने कहा कि बिहार SIR मामले में फैसला सुनाते समय यह संशोधित फॉर्म न्यायालय के समक्ष मौजूद ही नहीं था।
ECI ने 26 सितंबर को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दावा किया था कि सुप्रीम कोर्ट ने संशोधित डिक्लेरेशन को सही ठहराया है — जिसे न्यायालय ने अब नकारा।
दो चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति जताई कि 'रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960' में संशोधन के बिना यह बदलाव नहीं हो सकता।
राहुल गांधी ने बदलाव को एकतरफा और कथित तौर पर गैरकानूनी बताया; BJP प्रवक्ता संबित पात्रा ने आरोपों को खारिज किया।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मीडिया को चेतावनी दी — 'कृपया खबरों के लिए शब्द न चुनें।'

सर्वोच्च न्यायालय ने 12 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि उसने नए मतदाता पंजीकरण के लिए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के संशोधित फॉर्म 6 डिक्लेरेशन पर न तो कोई अनुमोदन दिया है और न ही कोई आदेश पारित किया है। न्यायालय ने यह भी कहा कि बिहार की वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) मामले में निर्णय सुनाते समय यह संशोधित फॉर्म उसके समक्ष प्रस्तुत ही नहीं था।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ एक नई याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यप्रणाली और फॉर्म 6 में किए गए बदलावों पर प्रश्न उठाए गए थे।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने दलील दी कि 5 अक्टूबर को सर्वोच्च न्यायालय पहले ही स्पष्ट कर चुका था कि संशोधित फॉर्म 6 को उसकी स्वीकृति नहीं मिली है — जबकि ECI ने 26 सितंबर को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दावा किया था कि न्यायालय ने बदले हुए डिक्लेरेशन को सही ठहराया है।

न्यायालय की स्थिति

न्यायमूर्ति बागची ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट शब्दों में कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने नए फॉर्म 6 पर कोई निर्णय नहीं दिया है, क्योंकि बिहार SIR मामले में फैसला सुनाते समय यह संशोधित फॉर्म अस्तित्व में ही नहीं था।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि न्यायालय की पूर्व मौखिक टिप्पणियों को न तो अनुमोदन और न ही अस्वीकृति के रूप में व्याख्यायित किया जा सकता है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मीडिया को चेतावनी देते हुए कहा, "कृपया खबरों के लिए शब्द न चुनें।"

विवाद की जड़ — संशोधित डिक्लेरेशन क्या है

संशोधित फॉर्म 6 के अंतर्गत नए मतदाता के रूप में पंजीकरण करवाने वाले आवेदकों को यह घोषित करना अनिवार्य है कि क्या वे या उनके माता पिता पूर्व के किसी SIR में मैप किए गए थे। दूसरे राज्यों में SIR के दौरान प्रयुक्त फॉर्म 6 के पुराने संस्करण में यह शर्त नहीं थी।

गौरतलब है कि यह संशोधन बिहार SIR फैसले के बाद लाया गया था, अतः न्यायालय के पास फैसले के समय इसकी सामग्री की जाँच करने का कोई अवसर ही नहीं था। दो चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति जताई है कि केंद्र सरकार द्वारा 'रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960' में संशोधन किए बिना इस डिक्लेरेशन में बदलाव नहीं किया जा सकता।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) को लाभ पहुँचाने के लिए फॉर्म 6 में एकतरफा और कथित तौर पर गैरकानूनी तरीके से बदलाव किए गए। BJP ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।

BJP प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने न तो फॉर्म को अवैध घोषित किया और न ही इसे अस्वीकार किया। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायालय ने इस बदलाव में किसी प्रकार की अवैधता नहीं बताई है।

आगे क्या होगा

यह मामला अब सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है, जहाँ नई याचिका पर सुनवाई जारी रहेगी। यह प्रकरण ऐसे समय में उभरा है जब ECI के निर्णय निर्माण की प्रक्रिया और संस्थागत स्वायत्तता पर व्यापक बहस चल रही है। न्यायालय की अगली सुनवाई में यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि संशोधित फॉर्म 6 की वैधता को औपचारिक रूप से चुनौती दी जाएगी या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें न्यायिक मंजूरी का दावा किया गया था। गंभीर बात यह है कि एक संवैधानिक संस्था ने न्यायालय के मौन को सहमति के रूप में प्रचारित किया — और यह दावा तब तक सार्वजनिक विमर्श में बना रहा जब तक न्यायालय ने खुद सफाई नहीं दी। दो चुनाव आयुक्तों की आपत्ति यह संकेत देती है कि ECI के भीतर भी इस निर्णय प्रक्रिया को लेकर सहमति नहीं थी। मुख्य न्यायाधीश की मीडिया को चेतावनी इस पूरे प्रसंग की एक और परत उजागर करती है — जहाँ संस्थागत संचार, न्यायिक व्याख्या और राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप आपस में उलझ गए हैं।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म 6 पर क्या स्पष्ट किया?
सर्वोच्च न्यायालय ने 12 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि उसने ECI के संशोधित फॉर्म 6 डिक्लेरेशन पर न कोई अनुमोदन दिया है और न कोई आदेश पारित किया है। न्यायालय ने कहा कि बिहार SIR फैसले के समय यह संशोधित फॉर्म उसके सामने था ही नहीं।
ECI के संशोधित फॉर्म 6 में क्या बदलाव किया गया है?
संशोधित फॉर्म 6 के तहत नए मतदाता के रूप में पंजीकरण करने वाले आवेदकों को यह बताना अनिवार्य है कि क्या वे या उनके माता पिता पूर्व के किसी SIR में मैप किए गए थे। पुराने फॉर्म 6 में यह शर्त नहीं थी।
ECI ने सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी का दावा क्यों किया था?
ECI ने 26 सितंबर को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा था कि बिहार SIR प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट के मई 2026 के फैसले में संशोधित डिक्लेरेशन को सही ठहराया गया है। किंतु सर्वोच्च न्यायालय ने अब स्पष्ट किया है कि वह फॉर्म फैसले के बाद लाया गया था, इसलिए न्यायालय ने उस पर कोई राय नहीं दी थी।
दो चुनाव आयुक्तों ने फॉर्म 6 बदलाव पर आपत्ति क्यों जताई?
दो चुनाव आयुक्तों ने इस आधार पर आपत्ति जताई कि 'रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960' में केंद्र सरकार द्वारा विधिवत संशोधन किए बिना फॉर्म 6 के डिक्लेरेशन में बदलाव नहीं किया जा सकता। इससे ECI की निर्णय निर्माण प्रक्रिया पर आंतरिक असहमति उजागर हुई है।
इस विवाद पर राजनीतिक दलों की क्या प्रतिक्रिया रही?
विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि BJP को फायदा पहुँचाने के लिए फॉर्म 6 में एकतरफा और कथित तौर पर गैरकानूनी बदलाव हुए। BJP प्रवक्ता संबित पात्रा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि न्यायालय ने इस बदलाव में कोई अवैधता नहीं बताई है।
राष्ट्र प्रेस
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