24 अगस्त 2026
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प्याज की कीमतों पर सरकार की पैनी नजर, 307.37 लाख मीट्रिक टन उत्पादन और बफर स्टॉक से आपूर्ति सुनिश्चित

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प्याज की कीमतों पर सरकार की पैनी नजर, 307.37 लाख मीट्रिक टन उत्पादन और बफर स्टॉक से आपूर्ति सुनिश्चित

सारांश

अगस्त-सितंबर की मौसमी तेज़ी से पहले सरकार ने प्याज मोर्चे पर कमर कस ली है। 307.37 लाख मीट्रिक टन उत्पादन अनुमान और 'कांदा एक्सप्रेस' के ज़रिए 88,000 मीट्रिक टन की रेल ढुलाई — यह संकेत है कि इस बार कीमतों को काबू में रखने की तैयारी पहले से की जा रही है।

मुख्य बातें

सरकारी सूत्रों के अनुसार 2025-26 में प्याज का अनुमानित उत्पादन 307.37 लाख मीट्रिक टन है, जो पिछले वर्ष के 307.67 लाख मीट्रिक टन के लगभग बराबर है।
सरकार के पास पर्याप्त बफर स्टॉक उपलब्ध है, जिसे ज़रूरत पड़ने पर बाज़ार में उतारा जाएगा।
'कांदा एक्सप्रेस' पहल के तहत 2025-26 में 86 रेलवे रैक से 88,000 मीट्रिक टन प्याज 16 शहरों तक पहुँचाया गया — 2024-25 के 12,000 मीट्रिक टन से सात गुना अधिक।
24 अगस्त से नासिक से चेन्नई, मदुरै, दिल्ली, कोच्चि और गुवाहाटी के लिए बफर स्टॉक की बिक्री और ढुलाई फिर शुरू।
सरकार की नीति उपभोक्ताओं को उचित मूल्य और किसानों को उनकी उपज का सही दाम — दोनों सुनिश्चित करने पर केंद्रित है।

केंद्र सरकार ने 24 अगस्त 2025 को स्पष्ट किया कि देशभर में प्याज की कीमतों, बाज़ार में आवक और उपलब्धता पर लगातार कड़ी निगरानी रखी जा रही है, ताकि उपभोक्ताओं को अनावश्यक मूल्य वृद्धि से बचाया जा सके। सरकारी सूत्रों के अनुसार, आने वाले महीनों में घरेलू माँग पूरी करने के लिए प्याज की उपलब्धता फिलहाल संतोषजनक स्थिति में है।

उत्पादन और बफर स्टॉक की स्थिति

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, वर्ष 2025-26 में प्याज का अनुमानित उत्पादन 307.37 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 307.67 लाख मीट्रिक टन उत्पादन के लगभग बराबर है। इसके अतिरिक्त, सरकार के पास पर्याप्त बफर स्टॉक भी उपलब्ध है, जिसका उपयोग आवश्यकता पड़ने पर बाज़ार में हस्तक्षेप के लिए किया जा सकता है।

सरकार की मूल्य स्थिरीकरण नीति का उद्देश्य उपभोक्ताओं और किसानों — दोनों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखना है। एक ओर उपभोक्ताओं को अत्यधिक कीमतों से बचाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

मौसमी उतार-चढ़ाव और बाज़ार निगरानी

गौरतलब है कि अगस्त और सितंबर के दौरान प्याज की कीमतों में मौसमी बढ़ोतरी सामान्य रूप से देखी जाती है। इसके पीछे त्योहारी माँग में वृद्धि, मौसम संबंधी परिस्थितियाँ, आपूर्ति शृंखला में बदलाव और माँग-आपूर्ति का असंतुलन प्रमुख कारण होते हैं।

सूत्रों ने बताया कि इस अवधि में मंडियों में पर्याप्त मात्रा में प्याज की आपूर्ति और बड़े उपभोग केंद्रों में लक्षित खुदरा बिक्री, कीमतों को नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। विभिन्न राज्यों में कीमतों और बाज़ार की परिस्थितियों की लगातार निगरानी की जा रही है तथा बाज़ार की ज़रूरत के अनुसार प्याज की मात्रा, समय और गंतव्य तय किए जा रहे हैं।

'कांदा एक्सप्रेस' पहल का विस्तार

प्याज की आपूर्ति को अधिक प्रभावी बनाने के लिए सरकार 'कांदा एक्सप्रेस' पहल का उपयोग कर रही है। इस योजना के तहत रेलवे रैक के माध्यम से बड़े पैमाने पर प्याज का परिवहन किया जाता है, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत कम होती है और देशभर में आपूर्ति तेज़ होती है।

2024-25 में शुरू की गई इस पहल के तहत 14 रेलवे रैक के ज़रिए लगभग 12,000 मीट्रिक टन प्याज 5 शहरों तक पहुँचाया गया था। वहीं 2025-26 में इस कार्यक्रम का विस्तार करते हुए 86 रेलवे रैक के माध्यम से करीब 88,000 मीट्रिक टन प्याज देश के 16 प्रमुख शहरों तक भेजा गया — यानी एक वर्ष में आपूर्ति लगभग सात गुना बढ़ी।

नासिक से नई खेप, पाँच शहरों को प्राथमिकता

पिछले वर्ष के सकारात्मक अनुभव को देखते हुए 24 अगस्त से नासिक से प्रमुख उपभोग केंद्रों तक प्याज की ढुलाई और बफर स्टॉक की बिक्री फिर शुरू कर दी गई है। शुरुआती चरण में यह पहल चेन्नई, मदुरै, दिल्ली, कोच्चि और गुवाहाटी जैसे पाँच बड़े उपभोग केंद्रों को कवर करेगी। बाज़ार की ज़रूरत के अनुसार आगे अन्य शहरों को भी इसमें शामिल किया जाएगा।

सरकारी सूत्रों ने कहा कि कीमतों और आपूर्ति की स्थिति पर निरंतर निगरानी जारी रहेगी और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त हस्तक्षेप भी किए जाएँगे, ताकि उपभोक्ताओं को उचित कीमत पर प्याज उपलब्ध होता रहे और बाज़ार में स्थिरता बनी रहे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की गति होगी — क्योंकि अगस्त-सितंबर में प्याज की कीमतें हर वर्ष सुर्खियाँ बनती हैं और हर वर्ष बफर स्टॉक के वादे होते हैं। 'कांदा एक्सप्रेस' का विस्तार — 14 से 86 रैक और 5 से 16 शहर — एक ठोस संरचनात्मक सुधार है, लेकिन खुदरा बाज़ार तक यह लाभ पहुँचता है या नहीं, यह मंडी के बिचौलियों और स्थानीय प्रशासन की सक्रियता पर निर्भर करेगा। उपभोक्ता और किसान — दोनों के हित साधने का दावा नीतिगत रूप से सही है, परंतु व्यवहार में ये दोनों लक्ष्य अक्सर एक-दूसरे के विरुद्ध खिंचते हैं; सरकार को इस तनाव को पारदर्शी तरीके से स्वीकार करना होगा।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्याज की कीमतों पर सरकार क्या कदम उठा रही है?
सरकार देशभर में प्याज की कीमतों, बाज़ार में आवक और उपलब्धता पर लगातार निगरानी रख रही है। बफर स्टॉक से चरणबद्ध तरीके से प्याज बाज़ार में उतारा जा रहा है और 'कांदा एक्सप्रेस' के ज़रिए रेलवे रैक से प्रमुख शहरों तक आपूर्ति की जा रही है।
2025-26 में भारत में प्याज का उत्पादन कितना अनुमानित है?
सरकारी सूत्रों के अनुसार 2025-26 में प्याज का अनुमानित उत्पादन 307.37 लाख मीट्रिक टन है, जो पिछले वर्ष के 307.67 लाख मीट्रिक टन के लगभग बराबर है। यह स्थिर उत्पादन घरेलू माँग पूरी करने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है।
'कांदा एक्सप्रेस' क्या है और यह कैसे काम करती है?
'कांदा एक्सप्रेस' सरकार की वह पहल है जिसके तहत रेलवे रैक के माध्यम से नासिक जैसे उत्पादन केंद्रों से बड़े उपभोग शहरों तक प्याज का परिवहन किया जाता है। 2025-26 में 86 रेलवे रैक से करीब 88,000 मीट्रिक टन प्याज 16 प्रमुख शहरों तक पहुँचाया गया, जो 2024-25 के मुकाबले सात गुना अधिक है।
अगस्त-सितंबर में प्याज की कीमतें क्यों बढ़ती हैं?
अगस्त और सितंबर में त्योहारी माँग में वृद्धि, मौसम संबंधी परिस्थितियाँ, आपूर्ति शृंखला में बदलाव और माँग-आपूर्ति के असंतुलन के कारण प्याज की कीमतों में मौसमी उतार-चढ़ाव देखा जाता है। यह हर वर्ष की प्रवृत्ति है, जिसे देखते हुए सरकार पहले से तैयारी करती है।
बफर स्टॉक से प्याज की बिक्री किन शहरों में शुरू हुई है?
24 अगस्त से नासिक से चेन्नई, मदुरै, दिल्ली, कोच्चि और गुवाहाटी — इन पाँच प्रमुख उपभोग केंद्रों के लिए बफर स्टॉक की बिक्री और ढुलाई फिर शुरू की गई है। बाज़ार की ज़रूरत के अनुसार आगे अन्य शहरों को भी इसमें शामिल किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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