प्याज की कीमतों पर सरकार की पैनी नजर, 307.37 लाख मीट्रिक टन उत्पादन और बफर स्टॉक से आपूर्ति सुनिश्चित
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 24 अगस्त 2025 को स्पष्ट किया कि देशभर में प्याज की कीमतों, बाज़ार में आवक और उपलब्धता पर लगातार कड़ी निगरानी रखी जा रही है, ताकि उपभोक्ताओं को अनावश्यक मूल्य वृद्धि से बचाया जा सके। सरकारी सूत्रों के अनुसार, आने वाले महीनों में घरेलू माँग पूरी करने के लिए प्याज की उपलब्धता फिलहाल संतोषजनक स्थिति में है।
उत्पादन और बफर स्टॉक की स्थिति
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, वर्ष 2025-26 में प्याज का अनुमानित उत्पादन 307.37 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 307.67 लाख मीट्रिक टन उत्पादन के लगभग बराबर है। इसके अतिरिक्त, सरकार के पास पर्याप्त बफर स्टॉक भी उपलब्ध है, जिसका उपयोग आवश्यकता पड़ने पर बाज़ार में हस्तक्षेप के लिए किया जा सकता है।
सरकार की मूल्य स्थिरीकरण नीति का उद्देश्य उपभोक्ताओं और किसानों — दोनों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखना है। एक ओर उपभोक्ताओं को अत्यधिक कीमतों से बचाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
मौसमी उतार-चढ़ाव और बाज़ार निगरानी
गौरतलब है कि अगस्त और सितंबर के दौरान प्याज की कीमतों में मौसमी बढ़ोतरी सामान्य रूप से देखी जाती है। इसके पीछे त्योहारी माँग में वृद्धि, मौसम संबंधी परिस्थितियाँ, आपूर्ति शृंखला में बदलाव और माँग-आपूर्ति का असंतुलन प्रमुख कारण होते हैं।
सूत्रों ने बताया कि इस अवधि में मंडियों में पर्याप्त मात्रा में प्याज की आपूर्ति और बड़े उपभोग केंद्रों में लक्षित खुदरा बिक्री, कीमतों को नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। विभिन्न राज्यों में कीमतों और बाज़ार की परिस्थितियों की लगातार निगरानी की जा रही है तथा बाज़ार की ज़रूरत के अनुसार प्याज की मात्रा, समय और गंतव्य तय किए जा रहे हैं।
'कांदा एक्सप्रेस' पहल का विस्तार
प्याज की आपूर्ति को अधिक प्रभावी बनाने के लिए सरकार 'कांदा एक्सप्रेस' पहल का उपयोग कर रही है। इस योजना के तहत रेलवे रैक के माध्यम से बड़े पैमाने पर प्याज का परिवहन किया जाता है, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत कम होती है और देशभर में आपूर्ति तेज़ होती है।
2024-25 में शुरू की गई इस पहल के तहत 14 रेलवे रैक के ज़रिए लगभग 12,000 मीट्रिक टन प्याज 5 शहरों तक पहुँचाया गया था। वहीं 2025-26 में इस कार्यक्रम का विस्तार करते हुए 86 रेलवे रैक के माध्यम से करीब 88,000 मीट्रिक टन प्याज देश के 16 प्रमुख शहरों तक भेजा गया — यानी एक वर्ष में आपूर्ति लगभग सात गुना बढ़ी।
नासिक से नई खेप, पाँच शहरों को प्राथमिकता
पिछले वर्ष के सकारात्मक अनुभव को देखते हुए 24 अगस्त से नासिक से प्रमुख उपभोग केंद्रों तक प्याज की ढुलाई और बफर स्टॉक की बिक्री फिर शुरू कर दी गई है। शुरुआती चरण में यह पहल चेन्नई, मदुरै, दिल्ली, कोच्चि और गुवाहाटी जैसे पाँच बड़े उपभोग केंद्रों को कवर करेगी। बाज़ार की ज़रूरत के अनुसार आगे अन्य शहरों को भी इसमें शामिल किया जाएगा।
सरकारी सूत्रों ने कहा कि कीमतों और आपूर्ति की स्थिति पर निरंतर निगरानी जारी रहेगी और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त हस्तक्षेप भी किए जाएँगे, ताकि उपभोक्ताओं को उचित कीमत पर प्याज उपलब्ध होता रहे और बाज़ार में स्थिरता बनी रहे।