प्याज किसानों को राहत: केंद्र ने MAPP ₹1,650 प्रति क्विंटल किया, 13 जून से लागू
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 12 जून 2025 को प्याज उत्पादक किसानों के लिए न्यूनतम सुनिश्चित खरीद मूल्य (MAPP) को संशोधित कर ₹1,650 प्रति क्विंटल निर्धारित कर दिया है। यह नई दर 13 जून से प्रभावी होगी। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने उपभोक्ता मामले विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक के बाद यह जानकारी साझा की।
मुख्य घटनाक्रम
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर बताया कि उपभोक्ता मामले विभाग के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में प्याज खरीद व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में भंडारण योग्य गुणवत्ता वाले प्याज और मौजूदा मंडी कीमतों को आधार मानते हुए MAPP में बदलाव का निर्णय लिया गया।
केवल खरीद मूल्य में ही संशोधन नहीं किया गया, बल्कि मूल्य निर्धारण की पूरी प्रक्रिया को भी बाज़ार की परिस्थितियों के अनुरूप अधिक व्यावहारिक बनाया गया है।
MAPP और MSP में अंतर क्यों?
गौरतलब है कि प्याज एक शीघ्र खराब होने वाली फसल है, इसलिए केंद्र सरकार द्वारा इसके लिए कोई आधिकारिक न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय नहीं किया जाता। इसके बजाय सरकार मूल्य स्थिरीकरण कोष (PSF) के तहत 'न्यूनतम सुनिश्चित खरीद मूल्य' पर किसानों से प्याज की खरीद करती है, ताकि उन्हें बाज़ार में भारी गिरावट के दौरान नुकसान से बचाया जा सके। यह व्यवस्था किसानों को एक न्यूनतम मूल्य की गारंटी देती है।
किसानों पर असर
सरकार का मानना है कि इस फैसले से प्याज उत्पादक किसानों को अपनी फसल का बेहतर मूल्य मिलेगा और बाज़ार में कीमतों के संतुलन को बनाए रखने में भी सहायता मिलेगी। यह कदम मुख्य रूप से महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और राजस्थान जैसे प्रमुख प्याज उत्पादक राज्यों के किसानों के लिए राहतकारी माना जा रहा है।
यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों में प्याज की मंडी कीमतें दबाव में रही हैं और किसान संगठन बेहतर समर्थन मूल्य की माँग कर रहे थे।
कृषि नीति का व्यापक संदर्भ
आलोचकों का कहना है कि MAPP की यह दर पर्याप्त है या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि वास्तविक खरीद कितनी तेज़ी और व्यापक पैमाने पर होती है। अतीत में PSF के तहत खरीद की सीमित पहुँच को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
आगे की राह
संशोधित MAPP 13 जून 2025 से लागू होगा। सरकार के अनुसार यह निर्णय किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। अब देखना यह होगा कि ज़मीनी स्तर पर खरीद की गति और पारदर्शिता किस हद तक इस राहत को किसानों तक पहुँचा पाती है।