25 अगस्त 2026
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पिंपरी-चिंचवड़ में प्याज ₹50/किलो, चीनी ₹80/किलो — महंगाई से आम जनता बेहाल, व्यापारियों की सरकार से कार्रवाई की माँग

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पिंपरी-चिंचवड़ में प्याज ₹50/किलो, चीनी ₹80/किलो — महंगाई से आम जनता बेहाल, व्यापारियों की सरकार से कार्रवाई की माँग

सारांश

पिंपरी-चिंचवड़ में प्याज ₹50 और चीनी ₹80 प्रति किलो तक पहुँची — 40% आपूर्ति घटने और भारी बारिश से फसल नुकसान ने कीमतें दोगुनी कर दीं। रोज़ कमाने-खाने वाले परिवारों पर सबसे भारी मार, व्यापारी और किसान सरकार से ठोस हस्तक्षेप की माँग कर रहे हैं।

मुख्य बातें

पिंपरी-चिंचवड़ में प्याज की कीमत ₹40–50 प्रति किलोग्राम तक पहुँची, जो पिछले साल ₹20–25 थी।
चीनी कुछ हफ्तों में ₹40–45 से बढ़कर ₹75–80 प्रति किलोग्राम हो गई।
मालेगांव बाज़ार में प्याज का थोक भाव ₹2,500 से बढ़कर ₹3,500–3,800 प्रति क्विंटल हुआ।
बाज़ार में माल की आपूर्ति 40 प्रतिशत घटी; किसानों की 40% फसल खराब मौसम से बर्बाद।
व्यापारी फिरोज तंबोली ने कालाबाज़ारी की चेतावनी दी; ग्राहक गजानन मोहिते ने सख्त कार्रवाई की माँग की।
किसान स्थिर मूल्य नीति और सरकारी बफर स्टॉक जारी करने की अपील कर रहे हैं।

पिंपरी-चिंचवड़ में 25 अगस्त 2026 को खाद से लेकर खाद्य पदार्थों तक की कीमतों में तीव्र उछाल दर्ज किया गया है। प्याज की कीमत ₹40–50 प्रति किलोग्राम और चीनी ₹75–80 प्रति किलोग्राम तक पहुँच गई है, जिससे घरों का बजट बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। कारोबारियों, किसानों और आम ग्राहकों ने सरकार से महंगाई पर तत्काल अंकुश लगाने की माँग की है।

मुख्य घटनाक्रम

प्याज विक्रेता फिरोज तंबोली ने बताया कि इस वर्ष बाज़ार में माल की आपूर्ति 40 प्रतिशत घट गई है। उन्होंने कहा, 'पिछले साल प्याज की कीमत लगभग ₹20–25 प्रति किलोग्राम थी। इस साल सप्लाई में 40 प्रतिशत की कमी के कारण कीमतें ₹40–50 प्रति किलोग्राम तक पहुँच गई हैं।' तंबोली ने यह भी कहा कि डीजल की बढ़ती कीमतों ने परिवहन लागत को और बढ़ा दिया है, और किसानों की लगभग 40 प्रतिशत फसल खराब हो चुकी है।

मालेगांव बाज़ार में भी प्याज के थोक भाव ₹2,500 प्रति क्विंटल से बढ़कर ₹3,500–3,800 प्रति क्विंटल हो गए हैं। व्यापारियों के अनुसार भारी बारिश से फसल को नुकसान और नई फसल की आवक में देरी इसके मुख्य कारण हैं।

आम जनता पर असर

एक महिला ग्राहक ने बताया कि जो लोग रोज़ाना करीब ₹400 कमाते हैं, उनके लिए यह स्थिति बेहद कठिन है। उन्होंने कहा, 'चाय पीना भी भारी पड़ रहा है — खाएंगे क्या और बचाएंगे क्या।' चीनी, जो कुछ सप्ताह पहले ₹40–45 प्रति किलोग्राम मिलती थी, अब ₹75–80 प्रति किलोग्राम के करीब बिक रही है।

ग्राहक गजानन मोहिते ने कहा कि प्याज और चीनी की कालाबाज़ारी पर सख्त कार्रवाई की ज़रूरत है और सरकार को इस पर तत्काल ध्यान देना चाहिए।

कारोबारियों और किसानों की माँग

तंबोली ने चेतावनी दी कि इस समय कालाबाज़ारी करने वाले लोग सक्रिय हो गए हैं और सरकार को कारोबारियों के स्टॉक पर कड़ी नज़र रखनी चाहिए। एक अन्य कारोबारी ने कहा कि जो किसान अनाज उगाता है, वही आज अपना घर-परिवार चलाने में असमर्थ हो रहा है।

पिछले वर्ष कम कीमतों के कारण घाटा उठाने वाले किसान अब एक स्थिर मूल्य नीति की माँग कर रहे हैं। एक किसान ने कहा कि खाद से लेकर खाद्य पदार्थों तक हर चीज़ महंगी हो गई है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई हिस्सों में मानसून की अनियमितता ने कृषि उत्पादन को प्रभावित किया है। गौरतलब है कि प्याज की कीमतों में यह उछाल कोई नई घटना नहीं है — भारत में हर कुछ वर्षों में प्याज की कीमतें राजनीतिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर संकट का कारण बनती हैं। आलोचकों का कहना है कि सरकार की बफर स्टॉक नीति और निर्यात नियंत्रण उपाय समय पर लागू नहीं किए जाते, जिससे स्थिति बिगड़ती है।

क्या होगा आगे

यदि आपूर्ति शृंखला में सुधार नहीं हुआ और नई फसल की आवक में और देरी हुई, तो आने वाले हफ्तों में कीमतें और अधिक बढ़ सकती हैं। व्यापारियों और नागरिकों की माँग है कि सरकार बफर स्टॉक जारी करे, कालाबाज़ारी पर कड़ी कार्रवाई करे और किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी सुनिश्चित करे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक परिचित चक्र की पुनरावृत्ति है — मानसून की मार, आपूर्ति में गिरावट, और बफर स्टॉक की अनुपस्थिति। सरकार हर बार संकट गहराने के बाद कदम उठाती है, जबकि पूर्व-चेतावनी तंत्र और निर्यात नियंत्रण की समयबद्ध नीति से स्थिति को पहले ही काबू किया जा सकता था। किसान पिछले साल कम कीमतों में घाटा उठाते हैं और इस साल उपभोक्ता ऊँची कीमतों की मार झेलते हैं — दोनों छोर पर नुकसान यह बताता है कि मूल्य-स्थिरीकरण का कोई ठोस ढाँचा अभी तक नहीं बना। जब तक न्यूनतम समर्थन मूल्य और बाज़ार हस्तक्षेप को संस्थागत रूप नहीं दिया जाता, यह संकट अगले सीज़न में फिर दोहराएगा।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पिंपरी-चिंचवड़ में प्याज इतनी महंगी क्यों हो गई है?
बाज़ार में प्याज की आपूर्ति इस साल 40 प्रतिशत घट गई है, क्योंकि भारी बारिश से किसानों की 40% फसल खराब हो गई और नई फसल की आवक में देरी हुई। इसके साथ डीजल की बढ़ती कीमतों ने परिवहन लागत भी बढ़ा दी, जिससे प्याज ₹20–25 से बढ़कर ₹40–50 प्रति किलोग्राम तक पहुँच गई।
चीनी के दाम कितने बढ़े हैं?
चीनी, जो कुछ सप्ताह पहले ₹40–45 प्रति किलोग्राम मिलती थी, अब ₹75–80 प्रति किलोग्राम के करीब बिक रही है — यानी लगभग दोगुनी कीमत। इससे रोज़मर्रा की चाय जैसी ज़रूरतें भी आम परिवारों के लिए महंगी हो गई हैं।
मालेगांव बाज़ार में प्याज का थोक भाव क्या है?
मालेगांव बाज़ार में प्याज का थोक मूल्य ₹2,500 प्रति क्विंटल से बढ़कर ₹3,500–3,800 प्रति क्विंटल हो गया है। व्यापारियों के अनुसार भारी बारिश से फसल नुकसान और नई फसल की देरी इसके प्रमुख कारण हैं।
किसानों की क्या माँग है?
किसान, जिन्हें पिछले साल कम कीमतों के कारण घाटा उठाना पड़ा था, अब सरकार से एक स्थिर मूल्य नीति की माँग कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी दी जाए ताकि मौसम की मार और बाज़ार की अनिश्चितता से उनकी आजीविका सुरक्षित रहे।
सरकार से क्या कदम उठाने की माँग की जा रही है?
व्यापारियों, किसानों और आम नागरिकों ने सरकार से बफर स्टॉक जारी करने, कालाबाज़ारी पर सख्त कार्रवाई करने और कारोबारियों के स्टॉक की निगरानी बढ़ाने की माँग की है। साथ ही किसानों के लिए स्थिर मूल्य नीति लागू करने की अपील भी की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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