कुचामन सिटी में मोतियाबिंद सर्जरी के बाद 5 मरीजों की आंखों में संक्रमण, जयपुर एसएमएस अस्पताल में भर्ती
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के कुचामन सिटी के सरकारी अस्पताल में मंगलवार, 29 जुलाई 2025 को मोतियाबिंद (कैटरेक्ट) के ऑपरेशन के बाद पाँच मरीजों की आंखों में गंभीर संक्रमण हो गया। हालत बिगड़ने पर सभी को जयपुर के सवाई मानसिंह (एसएमएस) अस्पताल रेफर किया गया, जहाँ उनका उपचार जारी है। यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब राजस्थान में सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं पहले से ही चिकित्सा लापरवाही के आरोपों को लेकर जाँच के दायरे में हैं।
मुख्य घटनाक्रम
जानकारी के अनुसार, ऑपरेशन के लगभग 24 घंटे के भीतर ही मरीजों की आंखों में संक्रमण के गंभीर लक्षण दिखाई देने लगे। संक्रमण इतना तीव्र था कि उनकी आंखें सफेद पड़ने लगीं — जो कि पोस्ट-ऑपरेटिव एंडोफ्थेल्मिटिस का संभावित संकेत माना जाता है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कुचामन अस्पताल प्रशासन ने तत्काल सभी पाँचों मरीजों को उन्नत उपचार के लिए एसएमएस अस्पताल भेजा।
संक्रमित मरीजों में तीन महिलाएं और दो पुरुष शामिल हैं। उनकी पहचान घासीराम (65 वर्ष), हीराराम (73 वर्ष), गोकुल (70 वर्ष), मीरा देवी (68 वर्ष) और नारायणी (67 वर्ष) के रूप में हुई है — सभी वरिष्ठ नागरिक।
एसएमएस अस्पताल की प्रतिक्रिया
एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. दीपक माहेश्वरी ने बताया कि जैसे ही कुचामन अस्पताल से जटिलताओं की सूचना मिली, मरीजों को विशेष उपचार के लिए तुरंत एसएमएस अस्पताल भेजा गया। घटना की गंभीरता को देखते हुए कॉलेज ने रातोंरात एक उच्च स्तरीय मेडिकल बोर्ड का गठन किया।
इस बोर्ड की अध्यक्षता नेत्र रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. नागेंद्र सिंह शेखावत कर रहे हैं। बोर्ड में मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. महेंद्र अग्रवाल, वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीष शर्मा और डॉ. पंकज शर्मा भी शामिल हैं।
मरीजों की स्थिति
डॉ. नागेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि सभी मरीजों का इलाज मानक चिकित्सा प्रोटोकॉल के अनुसार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मरीजों की स्थिति गंभीर बनी हुई है, लेकिन उनकी आंखों और दृष्टि को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि संक्रमण का स्रोत क्या था — जाँच जारी है।
व्यापक संदर्भ और आम जनता पर असर
गौरतलब है कि राजस्थान में हाल के हफ्तों में चिकित्सा लापरवाही के कई मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें प्रसूति सेवाओं से जुड़े विवाद प्रमुख हैं। यह ऐसे समय में आया है जब सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा और सर्जिकल प्रोटोकॉल की पालना को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मोतियाबिंद सर्जरी, जो आमतौर पर एक सुरक्षित और सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है, में इस तरह का सामूहिक संक्रमण असाधारण माना जाता है और यह ऑपरेशन थिएटर की स्वच्छता या उपकरण निर्जीवीकरण में चूक की ओर संकेत कर सकता है।
क्या होगा आगे
कथित चिकित्सा लापरवाही की जाँच के लिए आगे की कार्रवाई अभी स्पष्ट नहीं है। एसएमएस अस्पताल का मेडिकल बोर्ड मरीजों की निगरानी कर रहा है और उपचार के परिणामों के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग से जाँच रिपोर्ट की प्रतीक्षा है।