13 जुलाई 2026
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राजस्थान पुलिस का 'उमंग-VII' अभियान: 1 जून से बाल श्रम और मानव तस्करी पर राज्यव्यापी कार्रवाई

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राजस्थान पुलिस का 'उमंग-VII' अभियान: 1 जून से बाल श्रम और मानव तस्करी पर राज्यव्यापी कार्रवाई

सारांश

राजस्थान पुलिस का 'उमंग-VII' अभियान इस बार सिर्फ कागज़ी नहीं — थाना स्तर तक विशेष बचाव दल, बहु-विभागीय समन्वय और पूर्व प्रशिक्षण के साथ 1 जून से पूरे जून माह बाल श्रम और मानव तस्करी पर राज्यव्यापी कार्रवाई होगी।

मुख्य बातें

राजस्थान पुलिस का 'उमंग-VII' अभियान 1 जून से 30 जून 2026 तक राज्यभर में चलेगा।
DGP राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर सभी जिलों, रेंज IG, पुलिस आयुक्तों और GRP इकाइयों को दिशानिर्देश जारी।
प्रत्येक जिले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर का नोडल अधिकारी नियुक्त; थाना स्तर पर 4 सदस्यीय विशेष बचाव दल गठित।
अभियान में सामाजिक न्याय , महिला एवं बाल विकास , श्रम विभाग , बाल कल्याण समितियाँ और NGO मिलकर काम करेंगे।
यह 'उमंग' श्रृंखला का सातवाँ संस्करण है, जो राजस्थान पुलिस की इस दिशा में निरंतर प्रतिबद्धता दर्शाता है।

राजस्थान पुलिस 1 जून से 30 जून 2026 तक 'उमंग-VII' नामक राज्यव्यापी विशेष अभियान चलाएगी, जिसका लक्ष्य बाल श्रम, बंधुआ बाल श्रम और बच्चों से जुड़ी मानव तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है। पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कुमार शर्मा द्वारा जारी निर्देशों के तहत यह पहल राज्य के सभी जिलों में एक साथ लागू की जाएगी। अभियान का केंद्रीय उद्देश्य प्रभावित बच्चों का बचाव और उनका समुचित पुनर्वास सुनिश्चित करना है।

अभियान की रूपरेखा और निर्देश

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (नागरिक अधिकार एवं एएचटी) हवासिंह घुमारिया ने राज्य के सभी पुलिस आयुक्तों, रेंज इंस्पेक्टर जनरलों (IG), पुलिस उपायुक्तों और जिला पुलिस अधीक्षकों को विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए हैं। इनमें अजमेर और जोधपुर में सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) इकाइयाँ भी शामिल हैं। पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि अभियान को अत्यंत संवेदनशीलता, समन्वय और दक्षता के साथ संचालित किया जाए।

ज़िला स्तर पर नोडल अधिकारी और विशेष बचाव दल

प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रत्येक जिले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रैंक के अधिकारी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक जिले में थाना स्तर पर विशेष बचाव दल गठित किए जाएंगे — हर दल में एक सब-इंस्पेक्टर (SI) या सहायक सब-इंस्पेक्टर (ASI) सहित कुल चार पुलिसकर्मी होंगे। अभियान शुरू होने से पूर्व इन दलों को बाल श्रम और मानव तस्करी से जुड़े मामलों की पहचान और कार्रवाई के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

विभागीय समन्वय और साझेदारी

अभियान को बहु-विभागीय सहयोग से संचालित किया जाएगा। सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, श्रम विभाग, बाल अधिकार विभाग, बाल कल्याण समितियों, आश्रय गृहों, बाल गृहों और विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों (NGO) के प्रतिनिधि संयुक्त रणनीति बैठकों में हिस्सा लेंगे। जिला पुलिस अधीक्षकों को निर्देशित किया गया है कि वे इन सभी हितधारकों के साथ घनिष्ठ समन्वय बनाए रखें।

बचाव और पुनर्वास का ढाँचा

महिला एवं बाल विकास विभाग, समाज कल्याण विभाग, बाल सशक्तिकरण विभाग, बाल कल्याण समितियों और NGO के प्रतिनिधि बचाव दलों के साथ सक्रिय रूप से जुड़े रहेंगे। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बचाव अभियान केवल कानूनी कार्रवाई तक सीमित न रहे, बल्कि बच्चों का पुनर्वास भी संवेदनशील और समन्वित तरीके से हो। गौरतलब है कि यह 'उमंग' श्रृंखला का सातवाँ संस्करण है, जो दर्शाता है कि राजस्थान पुलिस इस दिशा में निरंतर प्रयासरत रही है।

आगे की राह

अभियान की शुरुआत 1 जून 2026 से होगी और यह पूरे जून माह तक जारी रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि बहु-विभागीय समन्वय और थाना स्तर तक विशेष दलों की तैनाती इस अभियान को पिछले संस्करणों की तुलना में अधिक व्यापक और प्रभावी बना सकती है। राज्य भर में इस अभियान के परिणाम आने वाले हफ्तों में स्पष्ट होंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन बचाए गए बच्चों के दीर्घकालिक पुनर्वास और परिवारों तक वापसी का कोई स्पष्ट मापन ढाँचा अभी तक सामने नहीं आया है। असली कसौटी यह होगी कि अभियान समाप्त होने के बाद कितने बच्चे स्थायी रूप से शोषण से मुक्त हो पाते हैं, न कि केवल बचाव के आँकड़े।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान पुलिस का 'उमंग-VII' अभियान क्या है?
'उमंग-VII' राजस्थान पुलिस का एक महीने का राज्यव्यापी विशेष अभियान है, जो 1 जून से 30 जून 2026 तक बाल श्रम, बंधुआ बाल श्रम और बच्चों से जुड़ी मानव तस्करी पर कार्रवाई के लिए चलाया जाएगा। यह इस श्रृंखला का सातवाँ संस्करण है।
इस अभियान में कौन-कौन से विभाग शामिल हैं?
अभियान में राजस्थान पुलिस के साथ सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, श्रम विभाग, बाल अधिकार विभाग, बाल कल्याण समितियाँ, आश्रय गृह, बाल गृह और विभिन्न NGO शामिल हैं। सभी मिलकर संयुक्त रणनीति बैठकों के ज़रिए काम करेंगे।
थाना स्तर पर बचाव दल कैसे बनाए जाएंगे?
प्रत्येक जिले में थाना स्तर पर विशेष बचाव दल गठित किए जाएंगे, जिनमें एक SI या ASI सहित कुल चार पुलिसकर्मी होंगे। अभियान शुरू होने से पहले इन दलों को बाल श्रम और मानव तस्करी के मामलों की पहचान व कार्रवाई के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
अभियान का नोडल अधिकारी कौन होगा?
प्रत्येक जिले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रैंक के अधिकारी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। जिला पुलिस अधीक्षकों को सभी संबंधित विभागों और हितधारकों के साथ घनिष्ठ समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
अभियान में GRP की क्या भूमिका होगी?
अजमेर और जोधपुर में सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) इकाइयों को भी विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। रेलवे स्टेशन तस्करी के प्रमुख पारगमन बिंदु होते हैं, इसलिए GRP की भागीदारी अभियान की व्यापकता के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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