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राजभर का अखिलेश को जन्मदिन तंज: 'एसी-पीसी की राजनीति छोड़ें, गांव की पगडंडी नापें'

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राजभर का अखिलेश को जन्मदिन तंज: 'एसी-पीसी की राजनीति छोड़ें, गांव की पगडंडी नापें'

सारांश

जन्मदिन की बधाई को 'उपहार' का रूप देते हुए सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर एसी कमरों की राजनीति का तंज कसा और गांव, मेड़ व पगडंडी पर उतरने की चुनौती दी — 2027 चुनावों से पहले पिछड़े वर्ग की राजनीति पर दावेदारी का स्पष्ट संकेत।

मुख्य बातें

ओमप्रकाश राजभर ने 1 जुलाई को एक्स पर पोस्ट कर अखिलेश यादव को जन्मदिन की बधाई दी।
राजभर ने बधाई संदेश को ही 'बेशकीमती उपहार' बताते हुए एसी-पीसी की राजनीति छोड़ने की नसीहत दी।
उन्होंने अखिलेश को गैर-यादव पिछड़ों, दलितों और वंचितों के बीच जाने की सलाह दी।
राजभर ने खुद का उदाहरण देते हुए कहा कि वे 48 डिग्री तापमान में भी गांव-गांव घूमते हैं।
यह बयान 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले पिछड़े वर्ग की राजनीति पर पकड़ मज़बूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने 1 जुलाई को समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को उनके जन्मदिन पर बधाई देते हुए तीखा राजनीतिक तंज कसा। राजभर ने अपनी बधाई को ही 'बेशकीमती उपहार' बताते हुए अखिलेश यादव को एयर-कंडीशंड कमरों की राजनीति छोड़कर गांव, गरीब, किसान और पिछड़े वर्गों के बीच जाने की सीधी नसीहत दी।

एक्स पर लिखा लंबा संदेश

राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट में लिखा, 'समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करता हूं।' उन्होंने आगे लिखा कि अखिलेश बड़े घर के बेटे हैं, उनके पिता पूर्व मुख्यमंत्री और रक्षामंत्री रहे हैं, वे स्वयं भी पूर्व मुख्यमंत्री हैं और आलिशान बंगलों में जीवन बीता है — इसलिए उन्हें कोई भौतिक उपहार देने की बजाय एक 'बेशकीमती सलाह' देना ज़्यादा उचित है।

'एसी-पीसी की राजनीति' पर सीधा निशाना

राजभर ने अपने संदेश में कहा, 'आप अपनी आलसी और आरामतलबी वाली ज़िंदगी से जितना जल्दी हो सके बाहर निकलिए। एसी और पीसी वाली राजनीति का जितना जल्दी त्याग करेंगे, उतना आपके लिए अच्छा रहेगा।' उन्होंने अखिलेश यादव को सलाह दी कि वे गैर-यादव पिछड़ों, गरीबों, दलितों और वंचितों के बीच जाएं, उनके सुख-दुख में शामिल हों और 'नए उत्तर प्रदेश' को समझने का प्रयास करें।

खेत और मेड़ पर चलने की चुनौती

राजभर ने व्यंग्यात्मक अंदाज़ में कहा, 'बस खाली एसी में बैठकर खेत-किसान, मेड़-पगडंडी वाला वीडियो मत देखते रहिए, खेत में जाकर खुद किसानी समझिए।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि शुरुआत में मेड़ पर चलते हुए पैर मुचुक सकता है, कांटा धंस सकता है और धूप व पसीने से दो-चार होना पड़ सकता है — लेकिन निरंतर प्रयास से ही 'गांव की राजनीति से प्रदेश की राजनीति का असली रास्ता' समझ में आता है।

राजभर का खुद का उदाहरण

राजभर ने अपनी बात को और पुख्ता करते हुए कहा, 'जमीन से जुड़ने का कोई शॉर्टकट नहीं होता, उसके लिए मेड़ पर गोड़ रगड़ना ही पड़ता है। हमसे सीख लीजिए, 48 डिग्री में भी गांव-गांव घूमते हूं।' उन्होंने अंत में एक बार फिर जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए ईश्वर से अखिलेश यादव को 'सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा' देने की कामना की।

राजनीतिक संदर्भ

यह तंज ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियां धीरे-धीरे तेज़ होने लगी हैं। सुभासपा फिलहाल भारतीय जनता पार्टी (BJP) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा है, जबकि समाजवादी पार्टी मुख्य विपक्षी दल की भूमिका में है। राजभर का यह बयान पिछड़े और वंचित वर्गों की राजनीति पर अपनी पकड़ मज़बूत करने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में इस बयान पर सपा की प्रतिक्रिया राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उत्तर प्रदेश में पिछड़े और वंचित वर्गों की राजनीति पर दावेदारी की सुनियोजित कोशिश है — खासतौर पर तब जब 2027 के चुनाव नज़दीक आ रहे हैं। दिलचस्प यह है कि राजभर खुद NDA के साथ सत्ता में हैं, फिर भी 'जमीनी राजनीति' का पाठ पढ़ाने की स्थिति में हैं — यह विरोधाभास मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाता है। सपा के लिए असली चुनौती यह है कि वह इस कथा को कैसे काटती है, क्योंकि पिछड़े वर्ग की राजनीति पर एकाधिकार का दावा अब कई दलों की रणनीति का केंद्र बन चुका है।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव को क्या नसीहत दी?
राजभर ने अखिलेश यादव को एसी-पीसी की राजनीति छोड़कर गांव, गरीब, किसान और पिछड़े वर्गों के बीच जाने की सलाह दी। उन्होंने यह बात 1 जुलाई को एक्स पर जन्मदिन बधाई संदेश के रूप में लिखी।
राजभर ने यह बात कहां और कब कही?
राजभर ने 1 जुलाई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट के ज़रिए यह बात कही। यह पोस्ट अखिलेश यादव के जन्मदिन पर बधाई संदेश के रूप में लिखी गई थी।
'एसी-पीसी की राजनीति' से राजभर का क्या मतलब था?
राजभर का इशारा था कि अखिलेश यादव एयर-कंडीशंड कमरों और आरामदायक माहौल में बैठकर राजनीति करते हैं और जमीनी हकीकत से दूर हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर खेत-किसान के वीडियो देखने की बजाय खुद खेत में जाकर किसानी समझनी चाहिए।
राजभर और अखिलेश यादव के बीच राजनीतिक संबंध कैसे हैं?
राजभर की सुभासपा फिलहाल BJP नीत NDA गठबंधन का हिस्सा है और वे उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री हैं, जबकि अखिलेश यादव की सपा मुख्य विपक्षी दल है। दोनों नेता पिछड़े और वंचित वर्गों की राजनीति पर अपना दावा पेश करते रहे हैं।
इस बयान का 2027 उत्तर प्रदेश चुनावों से क्या संबंध है?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह बयान 2027 विधानसभा चुनावों से पहले पिछड़े और वंचित वर्गों की राजनीति पर अपनी पकड़ मज़बूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। राजभर का यह संदेश सपा की 'जमीनी राजनीति' की छवि को चुनौती देने का प्रयास भी माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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