5 जुलाई 2026
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सोनेलाल पटेल जयंती पर चुप्पी: ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश को घेरा, सपा को बताया 'यादववादी पार्टी'

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सोनेलाल पटेल जयंती पर चुप्पी: ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश को घेरा, सपा को बताया 'यादववादी पार्टी'

सारांश

सुभासपा मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर डॉ. सोनेलाल पटेल की जयंती पर चुप्पी साधने का आरोप लगाते हुए सपा को 'यादववादी पार्टी' करार दिया। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले यह बयान उत्तर प्रदेश की ओबीसी राजनीति में नई हलचल पैदा कर सकता है।

मुख्य बातें

ओमप्रकाश राजभर ने 5 जुलाई 2026 को अखिलेश यादव पर डॉ.
सोनेलाल पटेल की जयंती ( 2 जुलाई ) पर श्रद्धांजलि न देने का आरोप लगाया।
राजभर ने सपा को 'यादववादी पार्टी' बताते हुए कहा कि गैर-यादव ओबीसी नेताओं की उपेक्षा सपा की राजनीतिक सोच का हिस्सा है।
सोनेलाल पटेल की पत्नी और एक बेटी सपा की सहयोगी हैं, फिर भी अखिलेश ने जयंती पर मौन रखा — राजभर ने इसे विरोधाभास बताया।
राजभर ने स्वर्गीय बाबू बेनी प्रसाद वर्मा का उदाहरण देते हुए कहा कि कुर्मी नेताओं को 'यादववाद' के कारण सपा में उचित सम्मान नहीं मिला।
1 जुलाई को सोनेलाल की बेटी ने अखिलेश को जन्मदिन की बधाई दी थी, लेकिन अखिलेश ने जयंती पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने 5 जुलाई 2026 को समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर कुर्मी समाज के अपमान का गंभीर आरोप लगाया। राजभर ने कहा कि 2 जुलाई को अपना दल के संस्थापक और सामाजिक न्याय के अग्रणी नेता डॉ. सोनेलाल पटेल की जयंती पर अखिलेश यादव का उनके सोशल मीडिया हैंडल पर एक शब्द भी न लिखना यह सिद्ध करता है कि सपा में गैर-यादव पिछड़े वर्ग के नेताओं के प्रति सम्मान का सर्वथा अभाव है।

राजभर का सीधा आरोप

सुभासपा प्रमुख ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए लिखा कि डॉ. सोनेलाल पटेल की जयंती पर उनके हैंडल पर श्रद्धांजलि, श्रद्धा-सुमन या सम्मान में दो शब्द तक नहीं थे। राजभर ने कहा, 'ऐसा लगता है जैसे आपके लिए नायक होने की पहली शर्त यादव होना है। कुर्मी या गैर-यादव ओबीसी एवं दलित नायकों को आप नायक नहीं मानते।'

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि 1 जुलाई को डॉ. सोनेलाल की बेटी ने अखिलेश यादव को उनके जन्मदिन पर बधाई दी थी, किंतु अखिलेश ने दो दिन बाद सोनेलाल की जयंती पर मौन साध लिया। राजभर के अनुसार यह राजनीतिक शुचिता और मर्यादा का उल्लंघन है।

पारिवारिक संबंध और राजनीतिक विरोधाभास

राजभर ने एक महत्वपूर्ण विरोधाभास उजागर करते हुए कहा कि डॉ. सोनेलाल पटेल की पत्नी और एक बेटी सपा की सहयोगी हैं तथा सपा की विधायक भी हैं। इसके बावजूद अखिलेश यादव ने सोनेलाल की जयंती पर सम्मान के एक शब्द नहीं लिखे। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव स्वयं डॉ. सोनेलाल का सम्मान करते थे और अखिलेश को कम से कम अपने पिता की उस परंपरा का निर्वहन करना चाहिए था।

बेनी प्रसाद वर्मा का उदाहरण

सुभासपा प्रमुख ने स्वर्गीय बाबू बेनी प्रसाद वर्मा का उदाहरण देते हुए कहा कि 'यादववाद' के कारण ही उन्हें सपा छोड़नी पड़ी थी और वे दोबारा तभी पार्टी में लौटे जब पूरी पार्टी उनके सामने झुकी। राजभर ने इसे सपा में गैर-यादव कुर्मी नेताओं की 'दुर्गति' का प्रमाण बताया।

कुर्मी समाज से आह्वान

ओमप्रकाश राजभर ने कुर्मी समाज को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि 'यादववादी पार्टी' की यही सच्चाई है और जितनी जल्दी इसे स्वीकार किया जाए, उतना ही समाज के हित में होगा। उन्होंने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई कि वे बहुजनों की लड़ाई जारी रखेंगे। यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में ओबीसी गोलबंदी की राजनीति तेज़ हो रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

इसलिए यह बयान राजनीतिक तटस्थता से नहीं, बल्कि स्पष्ट प्रतिद्वंद्विता की पृष्ठभूमि से आता है। सपा की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया न आना भी उल्लेखनीय है। उत्तर प्रदेश में ओबीसी मतों की बहुलता को देखते हुए, यह प्रकरण छोटा दिखने के बावजूद जातीय समीकरणों पर दूरगामी असर डाल सकता है।
RashtraPress
5 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर क्या आरोप लगाया?
राजभर ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव ने 2 जुलाई को अपना दल के संस्थापक डॉ. सोनेलाल पटेल की जयंती पर अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक शब्द नहीं लिखा। उन्होंने इसे कुर्मी समाज और गैर-यादव ओबीसी नेताओं के प्रति सपा के अपमानजनक रवैये का प्रमाण बताया।
डॉ. सोनेलाल पटेल कौन थे?
डॉ. सोनेलाल पटेल अपना दल के संस्थापक और कुर्मी समाज के प्रमुख नेता थे, जिन्होंने वंचित, शोषित और पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए आजीवन संघर्ष किया। उनकी जयंती 2 जुलाई को मनाई जाती है।
सपा और डॉ. सोनेलाल पटेल के परिवार का क्या संबंध है?
राजभर के अनुसार डॉ. सोनेलाल पटेल की पत्नी और एक बेटी सपा की सहयोगी हैं और सपा की विधायक भी हैं। इसके बावजूद अखिलेश यादव ने जयंती पर कोई सम्मान नहीं जताया, जिसे राजभर ने विरोधाभास बताया।
राजभर ने बेनी प्रसाद वर्मा का ज़िक्र क्यों किया?
राजभर ने स्वर्गीय बाबू बेनी प्रसाद वर्मा का उदाहरण देते हुए कहा कि 'यादववाद' के कारण ही उन्हें सपा छोड़नी पड़ी थी। यह उदाहरण उन्होंने यह दर्शाने के लिए दिया कि सपा में कुर्मी और गैर-यादव ओबीसी नेताओं के साथ ऐतिहासिक रूप से भेदभाव होता रहा है।
इस विवाद का उत्तर प्रदेश की राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है?
2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले यह बयान कुर्मी और गैर-यादव ओबीसी मतदाताओं को प्रभावित कर सकता है। राजभर का यह आरोप सपा की ओबीसी एकता की छवि को चुनौती देता है और भाजपा-सुभासपा गठबंधन के लिए इन समुदायों में पैठ बनाने का अवसर हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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