राजभर का अखिलेश पर हमला: डॉ. सोनेलाल पटेल की जयंती पर पुराना स्क्रीनशॉट वायरल कर कुर्मी समाज को गुमराह करने का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख और उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने 7 जुलाई 2026 को समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। राजभर ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव ने सामाजिक न्याय के पुरोधा डॉ. सोनेलाल पटेल की जयंती के नाम पर कुर्मी समाज को गुमराह करने की सुनियोजित कोशिश की — जिसमें एक पुराने स्क्रीनशॉट की तारीख छुपाकर उसे नया बताकर व्हाट्सऐप ग्रुप्स में फैलाया गया।
मुख्य आरोप: पुराने स्क्रीनशॉट से तारीख हटाई
राजभर ने सोशल मीडिया मंच एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट में दावा किया कि 2 जुलाई 2023 की एक पुरानी खबर के स्क्रीनशॉट से तारीख को चालाकी से हटाकर उसे 2026 की ताज़ा खबर के रूप में प्रसारित करवाया गया। उन्होंने कहा कि सपा कार्यकर्ताओं को व्हाट्सऐप ग्रुप्स में निर्देश दिया गया — विशेषकर कुर्मी समाज से जुड़े ग्रुप्स में — कि इस स्क्रीनशॉट को जमकर वायरल करवाया जाए।
राजभर के अनुसार, इस हेरफेर का उद्देश्य यह दिखाना था कि अखिलेश यादव ने डॉ. सोनेलाल पटेल की जयंती मनाई थी, जबकि वास्तव में उन्होंने ऐसा नहीं किया था। राजभर ने कहा कि उन्होंने मूल खबर का लिंक अपने कमेंट बॉक्स में डाला है ताकि सच्चाई सामने आ सके।
राजभर ने अखिलेश को दी सीधी चुनौती
अपनी पोस्ट में राजभर ने अखिलेश यादव को सीधे संबोधित करते हुए कहा, 'गुड मॉर्निंग अखिलेश यादव जी! एक गलती को छुपाने के लिए दूसरी गलती। ऐसा मत कीजिए मित्र।' उन्होंने यह भी कहा कि यदि अखिलेश यादव केवल यादव और मुस्लिम समुदाय को ही नायक मानते हैं तो यह उनका अधिकार है, लेकिन इसके लिए कुर्मी भाइयों के साथ झूठ बोलना उचित नहीं।
राजभर ने चेतावनी देते हुए कहा कि 'ओमप्रकाश अपने कुर्मी भाइयों के साथ ठगी नहीं होने देगा।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे अखिलेश को मित्र मानते हैं और इसीलिए यह सुझाव दे रहे हैं।
डॉ. सोनेलाल पटेल और कुर्मी समाज की राजनीति
डॉ. सोनेलाल पटेल को सामाजिक न्याय आंदोलन का प्रखर पुरोधा माना जाता है और वे कुर्मी समाज में अत्यंत सम्मानित हैं। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में पिछड़े वर्गों, विशेषकर कुर्मी और अन्य ओबीसी जातियों को लेकर राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज़ हो गई है। गौरतलब है कि सपा पर पहले भी ओबीसी समुदायों की उपेक्षा के आरोप लगते रहे हैं।
राजभर स्वयं भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री हैं और पिछड़े वर्गों के मुद्दों पर मुखर रहते हैं। उनका यह हमला ऐसे समय में आया है जब आगामी चुनावों को देखते हुए ओबीसी वोट बैंक को लेकर सभी दलों में खींचतान जारी है।
राजनीतिक निहितार्थ
राजभर ने अपनी पोस्ट के अंत में 'जय भारत, जय श्री राम, जय श्री कृष्ण, जय महाराज सुहेलदेव' लिखकर अपने राजनीतिक और सांस्कृतिक आधार को भी रेखांकित किया। इस विवाद से स्पष्ट होता है कि उत्तर प्रदेश में पिछड़े वर्गों की राजनीति में डिजिटल माध्यमों का उपयोग तेज़ी से बढ़ रहा है और सोशल मीडिया अब चुनावी नैरेटिव गढ़ने का प्रमुख अखाड़ा बन चुका है।
यदि राजभर के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह सपा की ओबीसी आउटरीच रणनीति के लिए बड़ा झटका हो सकता है। आने वाले दिनों में सपा की ओर से इस पर प्रतिक्रिया का इंतज़ार है।