7 जुलाई 2026
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राजभर का अखिलेश पर हमला: डॉ. सोनेलाल पटेल की जयंती पर पुराना स्क्रीनशॉट वायरल कर कुर्मी समाज को गुमराह करने का आरोप

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राजभर का अखिलेश पर हमला: डॉ. सोनेलाल पटेल की जयंती पर पुराना स्क्रीनशॉट वायरल कर कुर्मी समाज को गुमराह करने का आरोप

सारांश

सुभासपा मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर सीधा हमला बोला — आरोप है कि सपा ने 2023 के पुराने स्क्रीनशॉट की तारीख छुपाकर उसे 2026 का बताया और कुर्मी समाज में वायरल करवाया। डॉ. सोनेलाल पटेल की जयंती का यह विवाद यूपी की ओबीसी राजनीति में नई दरार का संकेत है।

मुख्य बातें

ओम प्रकाश राजभर ने 7 जुलाई 2026 को एक्स पर पोस्ट कर अखिलेश यादव पर कुर्मी समाज को गुमराह करने का आरोप लगाया।
आरोप है कि 2 जुलाई 2023 की पुरानी खबर के स्क्रीनशॉट से तारीख हटाकर उसे 2026 की बताकर व्हाट्सऐप ग्रुप्स में फैलाया गया।
स्क्रीनशॉट विशेष रूप से कुर्मी समाज से जुड़े व्हाट्सऐप ग्रुप्स में वायरल करवाने के निर्देश दिए गए — राजभर का दावा।
राजभर ने मूल खबर का लिंक कमेंट बॉक्स में डालकर सच्चाई सामने रखने का दावा किया।
यह विवाद उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों से पहले ओबीसी वोट बैंक को लेकर बढ़ती राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच आया है।

सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख और उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने 7 जुलाई 2026 को समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। राजभर ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव ने सामाजिक न्याय के पुरोधा डॉ. सोनेलाल पटेल की जयंती के नाम पर कुर्मी समाज को गुमराह करने की सुनियोजित कोशिश की — जिसमें एक पुराने स्क्रीनशॉट की तारीख छुपाकर उसे नया बताकर व्हाट्सऐप ग्रुप्स में फैलाया गया।

मुख्य आरोप: पुराने स्क्रीनशॉट से तारीख हटाई

राजभर ने सोशल मीडिया मंच एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट में दावा किया कि 2 जुलाई 2023 की एक पुरानी खबर के स्क्रीनशॉट से तारीख को चालाकी से हटाकर उसे 2026 की ताज़ा खबर के रूप में प्रसारित करवाया गया। उन्होंने कहा कि सपा कार्यकर्ताओं को व्हाट्सऐप ग्रुप्स में निर्देश दिया गया — विशेषकर कुर्मी समाज से जुड़े ग्रुप्स में — कि इस स्क्रीनशॉट को जमकर वायरल करवाया जाए।

राजभर के अनुसार, इस हेरफेर का उद्देश्य यह दिखाना था कि अखिलेश यादव ने डॉ. सोनेलाल पटेल की जयंती मनाई थी, जबकि वास्तव में उन्होंने ऐसा नहीं किया था। राजभर ने कहा कि उन्होंने मूल खबर का लिंक अपने कमेंट बॉक्स में डाला है ताकि सच्चाई सामने आ सके।

राजभर ने अखिलेश को दी सीधी चुनौती

अपनी पोस्ट में राजभर ने अखिलेश यादव को सीधे संबोधित करते हुए कहा, 'गुड मॉर्निंग अखिलेश यादव जी! एक गलती को छुपाने के लिए दूसरी गलती। ऐसा मत कीजिए मित्र।' उन्होंने यह भी कहा कि यदि अखिलेश यादव केवल यादव और मुस्लिम समुदाय को ही नायक मानते हैं तो यह उनका अधिकार है, लेकिन इसके लिए कुर्मी भाइयों के साथ झूठ बोलना उचित नहीं।

राजभर ने चेतावनी देते हुए कहा कि 'ओमप्रकाश अपने कुर्मी भाइयों के साथ ठगी नहीं होने देगा।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे अखिलेश को मित्र मानते हैं और इसीलिए यह सुझाव दे रहे हैं।

डॉ. सोनेलाल पटेल और कुर्मी समाज की राजनीति

डॉ. सोनेलाल पटेल को सामाजिक न्याय आंदोलन का प्रखर पुरोधा माना जाता है और वे कुर्मी समाज में अत्यंत सम्मानित हैं। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में पिछड़े वर्गों, विशेषकर कुर्मी और अन्य ओबीसी जातियों को लेकर राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज़ हो गई है। गौरतलब है कि सपा पर पहले भी ओबीसी समुदायों की उपेक्षा के आरोप लगते रहे हैं।

राजभर स्वयं भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री हैं और पिछड़े वर्गों के मुद्दों पर मुखर रहते हैं। उनका यह हमला ऐसे समय में आया है जब आगामी चुनावों को देखते हुए ओबीसी वोट बैंक को लेकर सभी दलों में खींचतान जारी है।

राजनीतिक निहितार्थ

राजभर ने अपनी पोस्ट के अंत में 'जय भारत, जय श्री राम, जय श्री कृष्ण, जय महाराज सुहेलदेव' लिखकर अपने राजनीतिक और सांस्कृतिक आधार को भी रेखांकित किया। इस विवाद से स्पष्ट होता है कि उत्तर प्रदेश में पिछड़े वर्गों की राजनीति में डिजिटल माध्यमों का उपयोग तेज़ी से बढ़ रहा है और सोशल मीडिया अब चुनावी नैरेटिव गढ़ने का प्रमुख अखाड़ा बन चुका है।

यदि राजभर के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह सपा की ओबीसी आउटरीच रणनीति के लिए बड़ा झटका हो सकता है। आने वाले दिनों में सपा की ओर से इस पर प्रतिक्रिया का इंतज़ार है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन डिजिटल माध्यमों से नैरेटिव गढ़ने की यह कोशिश — अगर साबित हो — दर्शाती है कि पार्टियाँ तथ्य से ज़्यादा धारणा प्रबंधन पर निर्भर हो रही हैं। राजभर का यह हमला भाजपा गठबंधन के भीतर से आया है, जो यह भी बताता है कि सत्तापक्ष ओबीसी एकता के मोर्चे पर विपक्ष को कोई छूट देने के मूड में नहीं है।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर क्या आरोप लगाए?
राजभर ने आरोप लगाया कि सपा ने 2 जुलाई 2023 की एक पुरानी खबर के स्क्रीनशॉट से तारीख हटाकर उसे 2026 की बताकर व्हाट्सऐप ग्रुप्स में फैलाया, ताकि यह दिखाया जा सके कि अखिलेश ने डॉ. सोनेलाल पटेल की जयंती मनाई। राजभर के अनुसार यह कुर्मी समाज को गुमराह करने की सुनियोजित कोशिश थी।
डॉ. सोनेलाल पटेल कौन थे और उनकी जयंती क्यों महत्वपूर्ण है?
डॉ. सोनेलाल पटेल को सामाजिक न्याय आंदोलन का प्रखर पुरोधा माना जाता है और वे कुर्मी समाज में अत्यंत सम्मानित हैं। उनकी जयंती उत्तर प्रदेश में ओबीसी राजनीति के लिहाज़ से संवेदनशील अवसर है, जिसे लेकर विभिन्न दल अपनी पहुँच साबित करने की कोशिश करते हैं।
सपा ने इस विवाद पर क्या कहा?
राजभर के आरोपों के समय तक समाजवादी पार्टी की ओर से इस विशेष विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। आने वाले दिनों में सपा के रुख का इंतज़ार है।
राजभर ने अपने दावे को साबित करने के लिए क्या किया?
राजभर ने दावा किया कि उन्होंने मूल खबर का लिंक अपनी एक्स पोस्ट के कमेंट बॉक्स में डाला है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि स्क्रीनशॉट 2023 का है न कि 2026 का। उन्होंने इसे पारदर्शिता का प्रमाण बताया।
यह विवाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में क्यों अहम है?
आगामी चुनावों से पहले कुर्मी सहित ओबीसी समुदायों का समर्थन हासिल करना सभी प्रमुख दलों की प्राथमिकता है। यह विवाद दर्शाता है कि सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप अब उत्तर प्रदेश में जाति-आधारित राजनीतिक नैरेटिव गढ़ने के प्रमुख माध्यम बन चुके हैं।
राष्ट्र प्रेस
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