योगिनी एकादशी पर महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती: हजारों श्रद्धालुओं ने किए बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन स्थित बाबा महाकालेश्वर मंदिर में योगिनी एकादशी के पावन अवसर पर 10 जुलाई 2026 को शुक्रवार तड़के आयोजित विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती में हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़े। मंदिर के कपाट सुबह 4 बजे खुलते ही पूरा परिसर 'जय श्री महाकाल' के जयघोष से गूंज उठा और भक्तों ने भगवान महाकाल के दिव्य दर्शन कर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया।
गुरुवार रात से ही लगीं कतारें
गुरुवार की देर रात से ही मंदिर परिसर और गर्भगृह के बाहर भक्तों की लंबी कतारें लग गई थीं। योगिनी एकादशी का धार्मिक महत्व होने के कारण देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु उज्जैन पहुँचे थे। भीड़ को नियंत्रित करने और व्यवस्था बनाए रखने के लिए मंदिर परिसर के आसपास बड़े पैमाने पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी।
भस्म आरती की पूजन विधि
आरती का शुभारंभ परंपरागत रूप से प्रथम घंटाल बजाकर और हरिओम जल अर्पण के साथ हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का ध्यान किया गया। कपूर आरती संपन्न होने के पश्चात ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित कर पवित्र भस्म अर्पित की गई।
धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं, इसीलिए इस आरती को विशेष पवित्र माना जाता है। भस्म आरती से पूर्व गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं का विधिवत पूजन किया गया। तत्पश्चात भगवान महाकाल का जलाभिषेक और पंचामृत अभिषेक संपन्न हुआ — जिसमें दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस का उपयोग किया गया। अभिषेक के बाद भांग, चंदन और सुगंधित द्रव्यों का लेप भी अर्पित किया गया।
राजा स्वरूप में हुए दिव्य दर्शन
भस्म अर्पण के उपरांत बाबा महाकाल का भव्य श्रृंगार किया गया। भगवान के मस्तक पर चंद्र, रजत मुकुट, रजत मुण्डमाल, रुद्राक्ष की मालाएँ और रंग-बिरंगे पुष्पों से अलंकरण किया गया। दिव्य आभूषणों और पुष्पों से सुसज्जित बाबा महाकाल के राजा स्वरूप के दर्शन कर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
भस्म की परंपरा और पोशाक नियम
जानकारी के अनुसार, पहले महाकाल को श्मशान की राख अर्पित की जाती थी, किंतु अब विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग होता है। आरती के दौरान पुरुषों के लिए धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है।
आरती के बाद का वातावरण
आरती संपन्न होने के बाद भक्तों ने नंदी महाराज के दर्शन किए और उनके कान में अपनी मनोकामनाएँ व्यक्त कीं। पूरे मंदिर परिसर में दिनभर भक्ति और श्रद्धा का वातावरण बना रहा। बाबा महाकाल की भस्म आरती देश-विदेश में प्रसिद्ध है और इसे देखने के लिए आम श्रद्धालुओं से लेकर著名 हस्तियाँ भी उज्जैन पहुँचती हैं। योगिनी एकादशी जैसे विशेष अवसरों पर इस आरती का महत्व और भी बढ़ जाता है।