क्या सपा सरकार में जेपीएनआईसी पर अनुमानित लागत से तीन गुना अधिक खर्च होने के बाद भी परियोजना अधूरी रही?

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क्या सपा सरकार में जेपीएनआईसी पर अनुमानित लागत से तीन गुना अधिक खर्च होने के बाद भी परियोजना अधूरी रही?

सारांश

उत्तर प्रदेश सरकार ने जेपीएनआईसी परियोजना की जिम्मेदारी लखनऊ विकास प्राधिकरण को सौंपकर जेपीएनआईसी सोसायटी को भंग किया है। विपक्षी दलों ने इसका विरोध किया है। जयवीर सिंह ने सपा के कार्यकाल की कुप्रबंधन पर सवाल उठाए हैं।

मुख्य बातें

जेपीएनआईसी परियोजना की जिम्मेदारी लखनऊ विकास प्राधिकरण को सौंपी गई।
सपा के कार्यकाल में तीन गुना खर्च होने के बावजूद परियोजना अधूरी रही।
विपक्ष ने इस मुद्दे पर तीखे हमले किए हैं।

मैनपुरी, 5 जुलाई (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश सरकार ने जयप्रकाश नारायण अंतर्राष्ट्रीय केंद्र (जेपीएनआईसी) परियोजना की जिम्मेदारी लखनऊ विकास प्राधिकरण को सौंपते हुए पूर्व सरकार द्वारा स्थापित जेपीएनआईसी सोसायटी को भंग कर दिया है। इस पर विपक्ष ने तीखे हमले किए हैं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने चुटकी लेते हुए कहा है कि केंद्र सरकार जेपीएनआईसी को बेच रही है और सपा खरीदने के लिए तैयार है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री जयवीर सिंह ने पलटवार करते हुए कहा कि सपा के कार्यकाल के दौरान जेपीएनआईसी पर अनुमानित लागत से तीन गुना अधिक खर्च होने के बावजूद यह परियोजना अधूरी रह गई।

मंत्री जयवीर सिंह ने कहा, "जेपीएनआईसी पर अनुमानित लागत से तीन गुना अधिक खर्च होने के बाद भी परियोजना अधूरी रही। यह सब अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली 2012-2017 की समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान हुआ। यह एक बड़ी विडंबना और कुप्रबंधन है कि परियोजना, जिसकी लागत उसके मूल अनुमान से तीन गुना अधिक थी, उनके पूरे कार्यकाल में अधूरी रही। फिर भी, वे इसके लिए तीन गुना भुगतान करने में सफल रहे। अखिलेश ने पहले ही सोसायटी को खरीद लिया था। अब उस कमेटी को खत्म करते हुए इसके संरक्षण, रखरखाव और देखरेख की जिम्मेदारी लखनऊ विकास प्राधिकरण को दी गई है।"

महागठबंधन में एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के शामिल होने के मुद्दे पर जयवीर सिंह ने कहा कि यह 'इंडिया' ब्लॉक का विषय है। वे जिसे चाहें शामिल करें, जिसे चाहें अलग करें। जो लोग विकास और देश की तरक्की चाहते हैं, वे भारतीय जनता पार्टी के समर्थक और वोटर हैं। उन्होंने दावा किया कि बिहार में प्रचंड बहुमत के साथ एनडीए की सरकार बनने जा रही है।

कांवड़ यात्रा के दौरान दुकानों पर नेम प्लेट लगाने के आदेश पर उन्होंने कहा कि नेम प्लेट लगाने में किसी को क्या परेशानी हो सकती है? ऐसा करने से संदिग्ध स्थिति और सांप्रदायिक बवाल नहीं होगा। मुस्लिम होने के बावजूद पंडित जी के नाम से दुकान चल रही है, लोगों को अपनी पहचान छिपाने की क्या जरूरत है? कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को शुद्ध शाकाहारी भोजन मिलना चाहिए। अगर लोग अपनी पहचान छिपा रहे हैं, तो उनकी मंशा पर सवाल उठता है।

आजमगढ़ में अखिलेश यादव द्वारा पीडीए भवन के उद्घाटन पर मंत्री जयवीर सिंह ने सपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अखिलेश ने पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) नहीं, निजी भवन का उद्घाटन किया है। पीडीए के बारे में जनता सब जान चुकी है, यह पूरी तरह विफल हुआ है। उनका असली पीडीए 'परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी' है, जिसे जनता ने 2012 से 2017 के बीच झेला है। प्रदेश की जनता जानती है कि यदि दोबारा अवसर मिला तो वही स्थितियां पैदा होंगी जो 2012 से 2017 के बीच जनता ने झेली हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश की वर्तमान सरकार को पूर्व सरकार की नीतियों और कुप्रबंधन का सामना करना पड़ रहा है। यह मुद्दा न केवल राजनीतिक है, बल्कि यह विकास और पारदर्शिता की आवश्यकता पर भी प्रकाश डालता है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेपीएनआईसी परियोजना का क्या महत्व है?
जेपीएनआईसी परियोजना का महत्व इस बात में है कि यह विकास के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में कार्य करती है।
क्या सपा ने जेपीएनआईसी के लिए सही कदम उठाए?
सपा के कार्यकाल में जेपीएनआईसी पर खर्च बढ़ा, लेकिन परियोजना अधूरी रह गई, जो कुप्रबंधन का संकेत है।
क्या योगी सरकार ने सही निर्णय लिया?
योगी सरकार ने लखनऊ विकास प्राधिकरण को जिम्मेदारी देकर एक नया कदम उठाया है।
राष्ट्र प्रेस