25 अगस्त 2026
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दिल्ली विधानसभा स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने किरोड़ी मल व रामजस कॉलेज के छात्रों को दिया लोकतांत्रिक भागीदारी का संदेश

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दिल्ली विधानसभा स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने किरोड़ी मल व रामजस कॉलेज के छात्रों को दिया लोकतांत्रिक भागीदारी का संदेश

सारांश

दिल्ली विधानसभा की 'यूथ आउटरीच पहल' के तहत स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने किरोड़ी मल और रामजस कॉलेज के छात्रों से सीधा संवाद किया। 1912 के ऐतिहासिक भवन का दौरा, विधायी प्रक्रियाओं की जानकारी और अनुपम खेर की आवाज़ वाली लघु फिल्म — यह पहल जेन ज़ी को शासन से जोड़ने की कोशिश है।

मुख्य बातें

दिल्ली विधानसभा स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने 25 अगस्त 2026 को किरोड़ी मल और रामजस कॉलेज के छात्रों से विधानसभा में संवाद किया।
यह कार्यक्रम विधानसभा सचिवालय की 'यूथ आउटरीच पहल' के तहत आयोजित हुआ, जिसका लक्ष्य युवाओं और शासन-तंत्र की दूरी पाटना है।
1912 में निर्मित विधानसभा भवन की ऐतिहासिक विरासत और 1993 की पुनर्स्थापना से छात्रों को अवगत कराया गया।
पद्म भूषण अनुपम खेर की आवाज़ में बनी लघु फिल्म और 'एक शताब्दी यात्रा' कॉफी टेबल बुक छात्रों को भेंट की गई।
कानून निर्माण प्रक्रिया पर विस्तृत जानकारी सत्र और विधानसभा सदन का गाइडेड टूर भी कार्यक्रम का हिस्सा रहा।

दिल्ली विधानसभा के स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को विधानसभा परिसर में दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ी मल कॉलेज और रामजस कॉलेज के छात्रों से सीधे संवाद किया और उन्हें देश के लोकतांत्रिक ढाँचे में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया। यह बातचीत विधानसभा सचिवालय की विशेष 'यूथ आउटरीच पहल' के अंतर्गत आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य युवा पीढ़ी और शासन-तंत्र के बीच की दूरी को पाटना है।

स्पीकर का संदेश: युवा ही लोकतंत्र की नींव

संवाद सत्र की शुरुआत करते हुए विजेंद्र गुप्ता ने कहा, 'एक मजबूत लोकतंत्र तब बनता है जब उसके युवा नागरिक इसके संस्थानों, विचारों और प्रक्रियाओं में सक्रिय रूप से शामिल होते हैं।' उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक समाज की जीवंतता जानकार, जागरूक और सक्रिय युवाओं पर टिकी होती है। गुप्ता के अनुसार, विधायी संस्थानों को प्रत्यक्ष रूप से देखने और समझने का अनुभव युवाओं की स्वाभाविक जिज्ञासा को सार्थक नागरिक भागीदारी, जवाबदेही और जनसेवा में रूपांतरित करने में सहायक होता है।

ऐतिहासिक विधानसभा भवन से परिचय

कार्यक्रम के दौरान छात्रों को भारत की संसदीय विरासत से परिचित कराया गया। 1912 में निर्मित इस ऐतिहासिक भवन में कभी केंद्रीय विधायी सभा (Central Legislative Assembly) का संचालन होता था और यह विट्ठलभाई पटेल जैसी महान विभूतियों की स्मृतियों को संजोए हुए है। छात्रों को 1993 में दिल्ली विधानसभा की पुनर्स्थापना के बाद से लोकतांत्रिक शासन में इसकी निरंतर भूमिका के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई।

विधायी प्रक्रियाओं की व्यावहारिक जानकारी

छात्रों की समझ को और गहरा करने के लिए एक विस्तृत जानकारी सत्र आयोजित किया गया, जिसमें कानून बनाने, उन पर बहस करने और उन्हें पारित करने की प्रक्रिया को सरल भाषा में समझाया गया। इस शैक्षिक सत्र में संस्थान के विकासक्रम पर आधारित एक लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई, जिसमें पद्म भूषण से सम्मानित अभिनेता अनुपम खेर की आवाज़ (वॉयस-ओवर) शामिल थी।

यादगार उपहार और गाइडेड टूर

कार्यक्रम में प्रतिभागी छात्रों को 'एक शताब्दी यात्रा' नामक विशेष कॉफी टेबल प्रकाशन भेंट किया गया, जो विधायी इतिहास की एक सदी का दस्तावेज़ है। कार्यक्रम का समापन विधानसभा सदन के कक्ष के गाइडेड टूर के साथ हुआ, जिससे छात्र स्थानीय शासन के केंद्रबिंदु को प्रत्यक्ष रूप से देख सके।

पहल का व्यापक उद्देश्य

दिल्ली विधानसभा सचिवालय की यह व्यवस्थित पहल भारत के युवाओं — विशेष रूप से 'जेन ज़ी' पीढ़ी — में गहरी नागरिक जिम्मेदारी की भावना जागृत करने और विधायी प्रक्रियाओं को आम जन के लिए सुलभ बनाने के व्यापक लक्ष्य के साथ संचालित की जा रही है। आने वाले समय में इस तरह के और संवाद सत्र अन्य कॉलेजों के छात्रों के साथ भी आयोजित किए जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ये एकबारगी दौरे युवाओं में स्थायी नागरिक चेतना जगा पाते हैं। देश भर की विधानसभाएँ ऐसे कार्यक्रम आयोजित करती हैं, पर अधिकांश प्रतीकात्मक बनकर रह जाते हैं — क्योंकि इनका कोई निरंतर अनुवर्ती ढाँचा नहीं होता। जेन ज़ी पीढ़ी को संस्थानों से जोड़ने के लिए एकमुश्त 'टूर' से आगे जाकर इंटर्नशिप, मॉक विधानसभा और नीति-परामर्श जैसे गहरे जुड़ाव के माध्यम चाहिए। अनुपम खेर की आवाज़ वाली फिल्म और कॉफी टेबल बुक प्रभावशाली हैं, पर जब तक युवा वास्तव में विधायी बहसों में भागीदार नहीं बनते, लोकतांत्रिक भागीदारी की यह अपील महज़ एक औपचारिकता बनी रहेगी।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली विधानसभा की 'यूथ आउटरीच पहल' क्या है?
यह दिल्ली विधानसभा सचिवालय की एक व्यवस्थित पहल है, जिसके तहत दिल्ली विश्वविद्यालय समेत अन्य कॉलेजों के छात्रों को विधानसभा में आमंत्रित कर विधायी प्रक्रियाओं, संसदीय इतिहास और नागरिक जिम्मेदारी से परिचित कराया जाता है। इसका उद्देश्य युवाओं और शासन-तंत्र के बीच की दूरी कम करना है।
25 अगस्त के कार्यक्रम में कौन-कौन से कॉलेज शामिल हुए?
दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ी मल कॉलेज और रामजस कॉलेज के छात्रों ने 25 अगस्त 2026 को दिल्ली विधानसभा का दौरा किया और स्पीकर विजेंद्र गुप्ता से सीधे संवाद किया।
दिल्ली विधानसभा भवन का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
1912 में निर्मित यह भवन ब्रिटिश काल में केंद्रीय विधायी सभा (Central Legislative Assembly) का केंद्र था और विट्ठलभाई पटेल जैसी महान विभूतियों की विरासत को संजोए हुए है। 1993 में दिल्ली विधानसभा की पुनर्स्थापना के बाद से यह स्थानीय लोकतांत्रिक शासन का प्रमुख केंद्र है।
कार्यक्रम में छात्रों को क्या-क्या दिखाया और सिखाया गया?
छात्रों को कानून निर्माण, बहस और विधेयक पारित करने की प्रक्रिया पर विस्तृत जानकारी दी गई। पद्म भूषण अनुपम खेर की आवाज़ में बनी संस्थागत लघु फिल्म दिखाई गई, 'एक शताब्दी यात्रा' कॉफी टेबल बुक भेंट की गई और विधानसभा सदन का गाइडेड टूर कराया गया।
इस पहल से युवाओं को क्या फायदा होगा?
इस पहल के माध्यम से युवा नागरिक विधायी संस्थानों को प्रत्यक्ष रूप से समझ सकते हैं, जिससे उनकी नागरिक जागरूकता और जवाबदेही की भावना मजबूत होती है। स्पीकर गुप्ता के अनुसार, यह अनुभव युवाओं की जिज्ञासा को सार्थक सार्वजनिक भागीदारी और जनसेवा में बदलने में सहायक है।
राष्ट्र प्रेस
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