25 अगस्त 2026
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दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश: रोहिणी आश्रम की जांच हो, लापता महिला का पता लगाए पुलिस

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दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश: रोहिणी आश्रम की जांच हो, लापता महिला का पता लगाए पुलिस

सारांश

दिल्ली उच्च न्यायालय ने रोहिणी के अध्यात्मिक विद्यालय आश्रम से लापता एक महिला के मामले में पुलिस को केस दर्ज करने और ठिकाना पता लगाने का आदेश दिया है। आश्रम के संस्थापक पर आपराधिक मुकदमा था, वे फरार हुए और अब उनके निधन की खबर है — ऐसे में न्यायालय ने पूरे आश्रम के कामकाज की जांच जरूरी बताई।

मुख्य बातें

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 25 अगस्त 2026 को विजय विहार एसएचओ को रोहिणी आश्रम से लापता महिला का मामला दर्ज करने का आदेश दिया।
महिला के माता-पिता ने अध्यात्मिक विद्यालय आश्रम से जुड़े लोगों की कस्टडी से बेटी को छुड़ाने की याचिका दायर की थी।
न्याय मित्र आकांक्षा कौल के अनुसार महिला फिलहाल रोहिणी आश्रम में नहीं है, लेकिन उसका सामान वहीं है।
आश्रम के संस्थापक पर आपराधिक मुकदमा था, वे फरार हो गए थे और अब उनके निधन की खबर है — जानकारी सीबीआई के विशेष सरकारी अभियोजक ने दी।
कोर्ट ने आश्रम के फंडिंग स्रोत और प्रबंधन पर स्पष्टता न होने पर चिंता जताई।
मामला 31 अगस्त को अगली सुनवाई के लिए 'हाई ऑन बोर्ड' सूचीबद्ध किया गया है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 25 अगस्त 2026 को विजय विहार पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) को निर्देश दिया कि वे रोहिणी स्थित एक आश्रम से लापता हुई एक महिला का मामला दर्ज करें और उसके ठिकाने का पता लगाएं। साथ ही, न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इस अध्यात्मिक विद्यालय आश्रम के कामकाज और प्रबंधन की विस्तृत जांच होनी चाहिए।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला उस महिला के माता-पिता की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया, जिन्होंने अपनी बेटी को रोहिणी के अध्यात्मिक विद्यालय आश्रम से जुड़े लोगों की कथित कस्टडी से छुड़ाने की मांग की थी। माता-पिता ने न्यायालय को बताया कि उनका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ रहा है और अधिक उम्र के कारण उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है।

मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की डिवीजन बेंच ने इस याचिका पर सुनवाई की। गौरतलब है कि यह मामला उस आश्रम से जुड़ा है जिसके संस्थापक और आध्यात्मिक प्रमुख पर पहले से आपराधिक मुकदमा चल रहा था।

न्याय मित्र की अहम जानकारी

सुनवाई के दौरान न्याय मित्र (एमिकस क्यूरी) आकांक्षा कौल ने बेंच को बताया कि उन्होंने कोर्ट परिसर में मौजूद दो महिलाओं से बात की, जो खुद को उस आध्यात्मिक संस्था की अनुयायी बताती हैं। उनके अनुसार, लापता महिला इस समय रोहिणी आश्रम में नहीं है, हालांकि उसका सामान वहीं रखा हुआ है।

कोर्ट में मौजूद दो महिलाओं ने अपने बयान दर्ज कराए। प्रगति ने बताया कि वह दिल्ली के नांगलोई स्थित एक आश्रम में रहती हैं और सुनवाई के दिन रोहिणी आश्रम आई थीं। दूसरी महिला श्याम लता ने बताया कि वह किसी आश्रम में नहीं रहतीं, लेकिन उसी आध्यात्मिक समूह से जुड़ी हैं।

आश्रम की स्थिति पर सवाल

न्यायालय ने अपने आदेश में दर्ज किया कि आश्रम के संस्थापक और आध्यात्मिक प्रमुख पर आपराधिक मुकदमा चल रहा था, वे मुकदमे के दौरान फरार हो गए थे और अब उनके निधन की खबर है। यह जानकारी सीबीआई की ओर से पेश विशेष सरकारी अभियोजक ने दी।

बेंच ने यह भी नोट किया कि एक संबंधित रिट याचिका में कुछ रिपोर्टें उपलब्ध होने के बावजूद यह स्पष्ट नहीं है कि वर्तमान में आश्रम का संचालन और प्रबंधन कौन कर रहा है, इस आश्रम और इससे जुड़े अन्य आश्रमों को फंड कहाँ से मिलता है, और इन संस्थानों का प्रबंधन किस प्रकार हो रहा है।

कोर्ट के निर्देश

मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली बेंच ने कहा, 'इन हालात को देखते हुए, हमारी राय है कि आश्रम के कामकाज और जिस तरह से इसे चलाया जा रहा है, उसकी जांच-पड़ताल होनी चाहिए।'

विजय विहार पुलिस स्टेशन के एसएचओ को निर्देश दिया गया कि वे लापता व्यक्ति का मामला दर्ज करें, जांच करें और अगली सुनवाई पर रिपोर्ट लेकर खुद बेंच के सामने उपस्थित रहें। दिल्ली सरकार के स्टैंडिंग काउंसिल समीर वशिष्ठ को निर्देश दिया गया कि वे संबंधित एसएचओ को इस आदेश से अवगत कराएं और जांच में हर आवश्यक सहयोग सुनिश्चित करें।

आगे की सुनवाई

इस मामले को एक संबंधित रिट याचिका के साथ 31 अगस्त को सूचीबद्ध करने और 'हाई ऑन बोर्ड' रखने का आदेश दिया गया है। रिकॉर्ड की जांच के बाद रिट याचिका में मौजूद जरूरी जानकारी पुलिस अधिकारी को उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए गए हैं। अब सभी की निगाहें 31 अगस्त की सुनवाई पर टिकी हैं, जब पुलिस को अपनी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

वे फरार हों और उनके निधन की खबर हो, तब भी संस्था बिना किसी स्पष्ट उत्तरदायित्व के चलती रहे — यह प्रशासनिक विफलता का संकेत है। दिल्ली उच्च न्यायालय का यह हस्तक्षेप उस बड़े सवाल को उठाता है कि देशभर में ऐसे कितने धार्मिक-आध्यात्मिक संस्थान नियामकीय निगरानी से बाहर हैं। अब देखना यह होगा कि 31 अगस्त की सुनवाई में पुलिस और प्रशासन कितनी पारदर्शिता के साथ जवाब देते हैं।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली हाई कोर्ट ने रोहिणी आश्रम मामले में क्या आदेश दिया?
दिल्ली उच्च न्यायालय ने विजय विहार पुलिस स्टेशन के एसएचओ को रोहिणी के अध्यात्मिक विद्यालय आश्रम से लापता महिला का मामला दर्ज करने और उसके ठिकाने का पता लगाने का निर्देश दिया है। साथ ही, न्यायालय ने आश्रम के कामकाज और प्रबंधन की जांच के भी आदेश दिए हैं।
रोहिणी आश्रम का संस्थापक कौन था और उनका क्या हुआ?
आश्रम के संस्थापक और आध्यात्मिक प्रमुख पर आपराधिक मुकदमा चल रहा था, जिसके दौरान वे फरार हो गए थे। सीबीआई के विशेष सरकारी अभियोजक ने न्यायालय को बताया कि अब उनके निधन की खबर है।
महिला के माता-पिता ने कोर्ट में क्या मांग की थी?
माता-पिता ने याचिका दायर कर अपनी बेटी को रोहिणी स्थित अध्यात्मिक विद्यालय आश्रम से जुड़े लोगों की कथित कस्टडी से छुड़ाने की मांग की थी। उन्होंने यह भी बताया कि उनका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ रहा है और अधिक उम्र के कारण उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है।
लापता महिला अभी कहाँ है?
न्याय मित्र आकांक्षा कौल ने न्यायालय को बताया कि महिला इस समय रोहिणी आश्रम में नहीं है, हालांकि उसका सामान वहीं रखा हुआ है। उनका वर्तमान ठिकाना अभी तक अज्ञात है, जिसकी जांच के लिए पुलिस को निर्देश दिए गए हैं।
इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मामले को एक संबंधित रिट याचिका के साथ 31 अगस्त को सूचीबद्ध किया है और इसे 'हाई ऑन बोर्ड' रखने का आदेश दिया है। उस तारीख पर एसएचओ को जांच रिपोर्ट लेकर स्वयं बेंच के सामने उपस्थित रहना होगा।
राष्ट्र प्रेस
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