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पश्चिम बंगाल: सरकारी अस्पताल में खून की कालाबाजारी, तीन लैब सहायक गिरफ्तार

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पश्चिम बंगाल: सरकारी अस्पताल में खून की कालाबाजारी, तीन लैब सहायक गिरफ्तार

सारांश

पश्चिम बंगाल में सरकारी अस्पताल के तीन कर्मचारियों ने रक्तदान शिविरों के डोनर कार्ड ₹100-150 में खरीदकर मुफ्त सरकारी रक्त हासिल किया और उसे ज़रूरतमंद मरीजों को ऊँची कीमत पर बेचा। भ्रष्टाचार निरोधक शाखा को बड़े नेटवर्क की आशंका है।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने 25 अगस्त 2026 को पंसकुरा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के तीन लैब सहायकों को गिरफ्तार किया।
आरोपी रक्तदान शिविरों से ₹100–₹150 प्रति कार्ड की दर पर डोनर कार्ड खरीदते थे और सरकारी ब्लड बैंकों से मुफ्त रक्त लेकर ऊँची कीमत पर बेचते थे।
दुर्लभ ब्लड ग्रुप की कीमत और अधिक वसूली जाती थी; बिक्री की रकम तीनों आरोपी आपस में बाँटते थे।
पुलिस को बड़े संगठित नेटवर्क की आशंका; रक्तदान शिविर आयोजकों की गतिविधियाँ भी जाँच के दायरे में।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने इसी महीने 11 निजी ब्लड बैंकों के खिलाफ जाँच जल्द पूरी करने का निर्देश दिया; स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें रक्तदान शिविर आयोजित करने से प्रतिबंधित किया है।

पश्चिम बंगाल पुलिस की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को पूर्वी मिदनापुर जिले के पंसकुरा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में कार्यरत तीन लैब सहायकों को खून की कथित कालाबाजारी के आरोप में गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, आरोपी रक्तदान शिविरों से डोनर कार्ड खरीदकर सरकारी ब्लड बैंकों से मुफ्त रक्त प्राप्त करते थे और उसे ज़रूरतमंद मरीजों के परिजनों को ऊँची कीमत पर बेचते थे।

कैसे काम करता था यह गिरोह

जाँच में सामने आया है कि तीनों आरोपी रक्तदान शिविर आयोजित करने वाले क्लबों और सामाजिक संगठनों से डोनर कार्ड महज ₹100 से ₹150 प्रति कार्ड की दर पर खरीदते थे। एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, इन कार्डों के आधार पर सरकारी ब्लड बैंकों से निःशुल्क एक यूनिट रक्त हासिल किया जाता था।

इसके बाद यही रक्त उन मरीजों के परिजनों को कई गुना अधिक कीमत पर बेचा जाता था जिन्हें तत्काल रक्त की आवश्यकता होती थी। जाँचकर्ताओं के अनुसार, जितना दुर्लभ ब्लड ग्रुप होता था, उसकी कीमत उतनी ही अधिक वसूली जाती थी। बिक्री से प्राप्त रकम तीनों आरोपी आपस में बाँट लेते थे।

बड़े नेटवर्क की आशंका

पुलिस को संदेह है कि ये तीनों आरोपी किसी बड़े संगठित गिरोह का हिस्सा हैं। इसी कारण भ्रष्टाचार निरोधक शाखा उनसे गहन पूछताछ कर रही है ताकि नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्यों की पहचान हो सके। अभी तक पुलिस ने गिरफ्तार तीनों आरोपियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं।

जाँच एजेंसियाँ अब राज्य में रक्तदान शिविर आयोजित करने वाले विभिन्न क्लबों और संगठनों की गतिविधियों पर भी नज़र रख रही हैं, क्योंकि आशंका है कि कुछ और संगठन भी इस गिरोह के संपर्क में हो सकते हैं।

कलकत्ता हाईकोर्ट का हस्तक्षेप

यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब कलकत्ता हाईकोर्ट ने इसी महीने राज्य के स्वास्थ्य विभाग को उन 11 निजी ब्लड बैंकों के खिलाफ चल रही जाँच जल्द पूरी करने का निर्देश दिया था, जिन पर खून और प्लाज्मा की अवैध बिक्री समेत कई गंभीर अनियमितताओं के आरोप हैं। स्वास्थ्य विभाग पहले ही इन 11 निजी ब्लड बैंकों को अगले आदेश तक राज्य में कहीं भी रक्तदान शिविर आयोजित करने से प्रतिबंधित कर चुका था।

इनमें से एक निजी ब्लड बैंक ने स्वास्थ्य विभाग के इस आदेश को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। न्यायमूर्ति कृष्ण राव की पीठ ने जाँच में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए विभाग को निर्धारित समय-सीमा के भीतर जाँच पूरी करने का निर्देश दिया।

आम जनता पर असर

गौरतलब है कि सरकारी ब्लड बैंकों का उद्देश्य ज़रूरतमंद मरीजों को निःशुल्क या अत्यंत कम मूल्य पर रक्त उपलब्ध कराना है। इस कथित कालाबाजारी ने उस व्यवस्था को कमज़ोर किया जो समाज के सबसे कमज़ोर वर्ग — गंभीर रोगियों के परिजन — के लिए बनाई गई थी। यह मामला पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य तंत्र में व्यापक सुधार की माँग को और तेज़ कर सकता है।

आगे की जाँच

भ्रष्टाचार निरोधक शाखा मामले की परतें खोलने में जुटी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ संभव हैं। जाँच का दायरा अब रक्तदान शिविर आयोजकों तक भी बढ़ाया जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो बताता है कि पश्चिम बंगाल में रक्त आपूर्ति श्रृंखला में संस्थागत खामियाँ हैं। असली सवाल यह है कि डोनर कार्ड की इतनी बड़ी मात्रा में खरीद-फरोख्त इतने समय तक अस्पताल प्रशासन की नज़र से कैसे बची रही। जब तक ब्लड बैंकों में डिजिटल ट्रैकिंग और तीसरे पक्ष के ऑडिट अनिवार्य नहीं किए जाते, ऐसे गिरोह व्यवस्था की खामियों का फायदा उठाते रहेंगे।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल के सरकारी अस्पताल में खून की कालाबाजारी का मामला क्या है?
पूर्वी मिदनापुर जिले के पंसकुरा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के तीन लैब सहायकों को 25 अगस्त 2026 को भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने गिरफ्तार किया। ये आरोपी रक्तदान शिविरों से डोनर कार्ड खरीदकर सरकारी ब्लड बैंकों से मुफ्त रक्त लेते थे और उसे ज़रूरतमंद मरीजों के परिजनों को ऊँची कीमत पर बेचते थे।
आरोपी डोनर कार्ड कैसे हासिल करते थे?
पुलिस के अनुसार, जब भी किसी क्लब या सामाजिक संगठन द्वारा रक्तदान शिविर आयोजित होता था, आरोपी आयोजकों से ₹100 से ₹150 प्रति कार्ड की दर पर डोनर कार्ड खरीद लेते थे। इन कार्डों के आधार पर सरकारी ब्लड बैंकों से निःशुल्क एक यूनिट रक्त प्राप्त किया जाता था।
क्या इस मामले में और लोग शामिल हो सकते हैं?
पुलिस को आशंका है कि तीनों आरोपी एक बड़े संगठित गिरोह का हिस्सा हैं। जाँच एजेंसियाँ रक्तदान शिविर आयोजित करने वाले क्लबों और संगठनों की गतिविधियों पर भी नज़र रख रही हैं और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ संभव हैं।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने ब्लड बैंकों के मामले में क्या आदेश दिया है?
कलकत्ता हाईकोर्ट ने इसी महीने राज्य के स्वास्थ्य विभाग को 11 निजी ब्लड बैंकों के खिलाफ जाँच निर्धारित समय-सीमा में पूरी करने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति कृष्ण राव की पीठ ने जाँच में हस्तक्षेप करने से इनकार किया और स्वास्थ्य विभाग के उस आदेश को बरकरार रखा जिसमें इन बैंकों को रक्तदान शिविर आयोजित करने से प्रतिबंधित किया गया है।
इस कालाबाजारी से आम मरीजों पर क्या असर पड़ता है?
सरकारी ब्लड बैंकों का उद्देश्य ज़रूरतमंद मरीजों को निःशुल्क या न्यूनतम मूल्य पर रक्त उपलब्ध कराना है। इस कथित धोखाधड़ी से वह रक्त उन लोगों तक नहीं पहुँच पाता जिनके लिए वह आरक्षित है, और आपातकालीन स्थिति में परिजनों को भारी कीमत चुकानी पड़ती है।
राष्ट्र प्रेस
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