10 अक्टूबर 2026
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तरंग शक्ति 2026: राजनाथ सिंह बोले — संकट में खुद के हथियार काम आते हैं, रक्षा आत्मनिर्भरता राष्ट्रीय नीति

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तरंग शक्ति 2026: राजनाथ सिंह बोले — संकट में खुद के हथियार काम आते हैं, रक्षा आत्मनिर्भरता राष्ट्रीय नीति

सारांश

जोधपुर में 'तरंग शक्ति 2026' के मंच से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक स्पष्ट संदेश दिया — संकट में केवल अपने हथियार काम आते हैं। तेजस से AMCA तक, भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की यात्रा अब वैश्विक डिफेंस सप्लाई चेन में भागीदारी की महत्वाकांक्षा के साथ आगे बढ़ रही है।

मुख्य बातें

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 10 अक्टूबर 2026 को जोधपुर एयर फोर्स स्टेशन में 'तरंग शक्ति 2026' मल्टीनेशनल एयर एक्सरसाइज को संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि संकट में खुद के हथियार ही काम आते हैं, इसीलिए रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय नीति बनाया गया।
स्वदेशी कार्यक्रमों — तेजस, ध्रुव, रुद्र, प्रचंड, LUH, आकाश सिस्टम और AESA रडार — को बढ़ती क्षमता के प्रमाण के रूप में गिनाया।
AMCA (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) कार्यक्रम भारत को पाँचवीं पीढ़ी की स्टील्थ फाइटर तकनीक में महारत दिलाएगा।
रक्षा मंत्री ने कहा कि एडवांस्ड एयरो-इंजन के को-प्रोडक्शन पर भी ज़ोर दिया जा रहा है।
'तरंग शक्ति' का संदेश — 'अलग-अलग देश, अलग-अलग विमान, लेकिन एक आसमान' — भविष्य के रक्षा सहयोग की दिशा तय करता है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 10 अक्टूबर 2026 को जोधपुर के एयर फोर्स स्टेशन में आयोजित मल्टीनेशनल एयर एक्सरसाइज 'तरंग शक्ति 2026' को संबोधित करते हुए कहा कि संकट के समय केवल स्वनिर्मित हथियार और तकनीकें ही किसी देश के काम आती हैं, इसीलिए भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय नीति के रूप में अपनाया है। यह बहुराष्ट्रीय वायु अभ्यास राजस्थान के जोधपुर में संपन्न हो रहा है, जिसमें कई देशों के युद्धक विमानों ने भारतीय वायु सेना के साथ संयुक्त उड़ान भरी।

भविष्य की सैन्य ताकत की परिभाषा

राजनाथ सिंह ने कहा, 'भविष्य की सैन्य ताकत का अंदाज़ा हमारे पास मौजूद प्लेटफॉर्म्स की संख्या से नहीं, बल्कि चीजों को भांपने, समझने, फैसला लेने और कार्रवाई करने की रफ्तार से लगाया जाएगा।' उन्होंने कहा कि रफ्तार, सटीकता, जानकारी और तालमेल अब आधुनिक युद्धक क्षमता की असली पहचान हैं। रक्षा मंत्री ने जोड़ा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने कई वर्ष पहले ही यह अनुमान लगा लिया था कि राष्ट्रीय सुरक्षा की परीक्षाएँ अप्रत्याशित तरीकों से आ सकती हैं।

आत्मनिर्भरता क्यों बनी राष्ट्रीय नीति

रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि संकट के समय कोई भी देश लंबे समय तक युद्ध तब तक नहीं लड़ सकता जब तक वह अपने हथियार और ज़रूरी तकनीकें स्वयं बनाने में सक्षम न हो। उन्होंने कहा, 'इसी वजह से हमने रक्षा क्षेत्र में 'आत्मनिर्भरता' को अपनी राष्ट्रीय नीति के तौर पर अपनाया।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 'आत्मनिर्भर भारत' के विजन का अर्थ दुनिया से अलग-थलग पड़ना नहीं है, बल्कि रक्षा से जुड़ी अहम तकनीकों को डिजाइन करने, विकसित करने, बनाने, रखरखाव करने और अपग्रेड करने की घरेलू क्षमता विकसित करना है।

भारतीय वायु सेना की स्वदेशी उपलब्धियाँ

राजनाथ सिंह ने कहा कि आज़ादी के समय सीमित संसाधनों के साथ काम करने वाली भारतीय वायु सेना अब एडवांस्ड एयरक्राफ्ट, सटीक हथियार, अत्याधुनिक सेंसर और इंटीग्रेटेड नेटवर्क से लैस एक आधुनिक सेना बन चुकी है। उन्होंने कहा कि जब भी कोई भारतीय विमान आसमान में उड़ान भरता है, तो वह केवल एक मशीन की उड़ान नहीं होती — वह भारत के व्यापक एयरोस्पेस इकोसिस्टम की उड़ान होती है। स्वदेशी प्रोग्राम जैसे तेजस फाइटर एयरक्राफ्ट, हेलीकॉप्टर श्रृंखला — ध्रुव, रुद्र, प्रचंड और LUH — आकाश एयर डिफेंस सिस्टम, AESA रडार तथा अनमैन्ड एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी की बढ़ती रेंज इस बढ़ती क्षमता के प्रमाण हैं।

एडवांस्ड एयरो-इंजन और पाँचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान

रक्षा मंत्री ने जानकारी दी कि भारत अब एडवांस्ड एयरो-इंजन के विकास और को-प्रोडक्शन पर भी ज़ोर दे रहा है, ताकि एविएशन टेक्नोलॉजी के सबसे जटिल क्षेत्र में महारत हासिल की जा सके। उन्होंने कहा कि प्रमुख 'एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट' (AMCA) कार्यक्रम भारत के लिए पाँचवीं पीढ़ी की स्टील्थ फाइटर तकनीक में महारत हासिल करने का मार्ग प्रशस्त करता है। भारत का लक्ष्य केवल उपकरण बनाना नहीं, बल्कि डिज़ाइन करना, इनोवेट करना, इंटीग्रेट करना और डिलीवर करना है।

बहुराष्ट्रीय सहयोग और तरंग शक्ति का संदेश

राजनाथ सिंह ने कहा कि भविष्य में रक्षा संबंध केवल प्लेटफॉर्म के बारे में नहीं, बल्कि तकनीक और भरोसे के बारे में होंगे। उन्होंने कहा, 'कोई भी देश अकेले काम नहीं कर सकता' — मज़बूत स्वदेशी क्षमताएँ बनाना और भरोसेमंद साझेदारों के साथ सार्थक सहयोग दोनों साथ-साथ चलने चाहिए। अभ्यास के समापन पर उन्होंने कहा कि 'तरंग शक्ति' का संदेश यही है — 'अलग-अलग देश, अलग-अलग विमान, अलग-अलग अनुभव, लेकिन एक आसमान।' उन्होंने उम्मीद जताई कि इस अभ्यास से मिली सीख भारतीय वायु सेना की ट्रेनिंग, रणनीति, तकनीक और भविष्य की क्षमता विकास में शामिल होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

आलोचकों का कहना है कि भारत अभी भी एयरो-इंजन जैसी अहम तकनीकों के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर काफी हद तक निर्भर है। AMCA की घोषणाएँ वर्षों से चल रही हैं और समयसीमाएँ खिसकती रही हैं — असली परीक्षा घोषणाओं की नहीं, क्रियान्वयन की है। 'तरंग शक्ति' जैसे बहुराष्ट्रीय अभ्यास भारत की साझेदारी क्षमता दिखाते हैं, लेकिन स्वदेशी रक्षा उत्पादन में वास्तविक आत्मनिर्भरता तब मानी जाएगी जब भारत महत्वपूर्ण प्रणालियों का निर्यात करने की स्थिति में पहुँचे।
RashtraPress
10 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'तरंग शक्ति 2026' क्या है और यह कहाँ आयोजित हुई?
'तरंग शक्ति 2026' एक मल्टीनेशनल एयर एक्सरसाइज है जो राजस्थान के जोधपुर एयर फोर्स स्टेशन में आयोजित की गई। इसमें कई देशों के युद्धक विमानों ने भारतीय वायु सेना के साथ संयुक्त उड़ान अभ्यास किया।
राजनाथ सिंह ने रक्षा आत्मनिर्भरता पर क्या कहा?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि संकट के समय कोई भी देश लंबे समय तक युद्ध तब तक नहीं लड़ सकता जब तक वह अपने हथियार और ज़रूरी तकनीकें खुद बनाने में सक्षम न हो। इसीलिए भारत ने रक्षा क्षेत्र में 'आत्मनिर्भरता' को राष्ट्रीय नीति के रूप में अपनाया है।
AMCA क्या है और इसका क्या महत्व है?
AMCA यानी 'एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट' भारत का पाँचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर विमान विकास कार्यक्रम है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अनुसार यह कार्यक्रम भारत को पाँचवीं पीढ़ी की स्टील्थ फाइटर तकनीक में महारत हासिल करने का मार्ग प्रशस्त करता है।
भारत के स्वदेशी रक्षा कार्यक्रमों में कौन-कौन सी प्रणालियाँ शामिल हैं?
राजनाथ सिंह ने तेजस फाइटर एयरक्राफ्ट, ध्रुव, रुद्र, प्रचंड और LUH हेलीकॉप्टर, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम, AESA रडार, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और अनमैन्ड एयरोस्पेस तकनीकों का उल्लेख किया। इनके अलावा एडवांस्ड एयरो-इंजन के को-प्रोडक्शन पर भी ज़ोर दिया जा रहा है।
बहुराष्ट्रीय रक्षा अभ्यासों को भारत क्यों महत्व देता है?
रक्षा मंत्री ने कहा कि तकनीक इतनी तेज़ी से विकसित हो रही है कि कोई भी एक वायु सेना केवल अपने अनुभव से काम नहीं चला सकती, इसलिए सामूहिक रूप से सीखना अनिवार्य हो गया है। ऐसे अभ्यास सक्षम सेनाओं के साथ प्रभावी ढंग से काम करने, बातचीत करने और तालमेल बिठाने की क्षमता विकसित करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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