राजनाथ सिंह का 'तरंग शक्ति 2026' में बड़ा बयान: रक्षा आत्मनिर्भरता ही संकट में असली ताकत
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 10 अक्टूबर 2026 को राजस्थान के एयर फोर्स स्टेशन जोधपुर में आयोजित मल्टीनेशनल एयर एक्सरसाइज 'तरंग शक्ति 2026' को संबोधित करते हुए कहा कि संकट की घड़ी में केवल स्वदेशी हथियार और तकनीकें ही किसी राष्ट्र की रक्षा कर सकती हैं, और इसीलिए भारत ने रक्षा क्षेत्र में 'आत्मनिर्भरता' को राष्ट्रीय नीति के रूप में अपनाया है। यह बहुराष्ट्रीय अभ्यास भारतीय वायु सेना की बढ़ती क्षमता और वैश्विक रक्षा साझेदारियों का प्रमुख मंच बना।
भविष्य की सैन्य ताकत की नई परिभाषा
राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा, 'भविष्य की सैन्य ताकत का अंदाजा हमारे पास मौजूद प्लेटफॉर्म्स की संख्या से नहीं, बल्कि चीजों को भांपने, समझने, फैसला लेने और कार्रवाई करने की रफ्तार से लगाया जाएगा।' उन्होंने कहा कि रफ्तार, सटीकता, जानकारी और तालमेल अब आधुनिक युद्धकौशल की असली पहचान हैं।
रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने कई वर्ष पूर्व ही यह भाँप लिया था कि राष्ट्रीय सुरक्षा को अप्रत्याशित चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इसी दूरदर्शिता के चलते भारतीय सशस्त्र बल संरचना, संसाधनों और रणनीति के स्तर पर एक बड़े बदलाव से गुज़र रहे हैं।
आत्मनिर्भरता क्यों बनी राष्ट्रीय नीति
रक्षा मंत्री ने आधुनिक शासन-कला की एक कठोर सच्चाई रेखांकित करते हुए कहा कि 'संकट के समय, कोई भी देश लंबे समय तक चलने वाला युद्ध तब तक नहीं लड़ सकता जब तक कि वह अपने हथियार और ज़रूरी तकनीकें खुद बनाने में सक्षम न हो।' यही वह मूल कारण है जिसके चलते रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण को नीतिगत प्राथमिकता दी गई।
गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक रक्षा आपूर्ति शृंखलाओं में अपनी भागीदारी बढ़ाने के साथ-साथ घरेलू उत्पादन में भी उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है। सिंह ने स्पष्ट किया कि 'आत्मनिर्भर भारत' का अर्थ वैश्विक अलगाव नहीं, बल्कि रक्षा तकनीकों को डिज़ाइन करने, विकसित करने, निर्मित करने, रखरखाव करने और अपग्रेड करने की घरेलू क्षमता विकसित करना है।
स्वदेशी रक्षा कार्यक्रमों की बढ़ती रेंज
राजनाथ सिंह ने तेजस फाइटर एयरक्राफ्ट, ध्रुव, रुद्र, प्रचंड और LUH (लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर) जैसे स्वदेशी कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये भारत की बढ़ती रक्षा-निर्माण क्षमता के जीवंत प्रमाण हैं। आकाश एयर डिफेंस सिस्टम, AESA रडार, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और मानवरहित (अनमैन्ड) एयरोस्पेस तकनीकों की बढ़ती रेंज भी इस प्रगति की बानगी है।
भविष्य की ओर देखते हुए उन्होंने 'एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट' (AMCA) कार्यक्रम का विशेष उल्लेख किया, जो भारत को पाँचवीं पीढ़ी की स्टील्थ फाइटर तकनीक में महारत दिलाने का मार्ग प्रशस्त करेगा। उन्होंने यह भी बताया कि अब एडवांस्ड एयरो-इंजन के विकास और सह-उत्पादन पर भी विशेष बल दिया जा रहा है।
बहुराष्ट्रीय अभ्यास का महत्व
रक्षा मंत्री ने 'तरंग शक्ति 2026' की व्यापक प्रासंगिकता बताते हुए कहा कि तकनीक इतनी तेज़ी से विकसित हो रही है कि कोई भी एकल वायु सेना केवल अपने अनुभव से नहीं सीख सकती। उन्होंने कहा, 'सामूहिक रूप से सीखना अब सिर्फ वांछनीय नहीं है, यह जरूरी है।'
उन्होंने बताया कि बहुराष्ट्रीय अभ्यास का गहरा महत्व केवल उड़ान भरने में नहीं, बल्कि सक्षम सेनाओं के साथ प्रभावी तालमेल, संवाद और अंतर-संचालन क्षमता विकसित करने में है। जोधपुर के आसमान में अनेक देशों के विमानों ने एकसाथ उड़ान भरी — अलग-अलग देश, अलग-अलग विमान, अलग-अलग अनुभव, पर एक आसमान।
वैश्विक साझेदारी और भारत की भूमिका
राजनाथ सिंह ने रेखांकित किया कि भविष्य के रक्षा संबंध केवल प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि तकनीक और आपसी विश्वास पर केंद्रित होंगे। उन्होंने कहा कि भारत उन देशों के साथ सहयोग के लिए तत्पर है जो एक स्थिर, सुरक्षित और शांतिपूर्ण अंतरराष्ट्रीय परिवेश के प्रति प्रतिबद्ध हैं। अहम तकनीकें, मज़बूत आपूर्ति शृंखलाएँ, ऑपरेशनल इंटर-ऑपरेबिलिटी और भरोसेमंद साझेदारियाँ राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य होती जा रही हैं।
रक्षा मंत्री ने समापन में उम्मीद जताई कि 'तरंग शक्ति' से मिले अनुभव भारतीय वायु सेना की ट्रेनिंग, रणनीति, तकनीक और भविष्य की क्षमता-विकास में स्थायी रूप से शामिल किए जाएँगे।