3 नवंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

राजनाथ सिंह: रक्षा आत्मनिर्भरता का अर्थ तकनीकी संप्रभुता, विदेशी निर्भरता से मुक्ति

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
राजनाथ सिंह: रक्षा आत्मनिर्भरता का अर्थ तकनीकी संप्रभुता, विदेशी निर्भरता से मुक्ति

सारांश

राजनाथ सिंह ने दिल्ली डिफेंस डायलॉग में रक्षा आत्मनिर्भरता की नई परिभाषा दी — असेंबली नहीं, संप्रभुता। उनका संदेश साफ़ है: डिज़ाइन, सुधार और रखरखाव की क्षमता ही असली ताकत है। 2047 तक भारत को वैश्विक रक्षा नवाचार केंद्र बनाने का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है — अब परीक्षा क्रियान्वयन की है।

मुख्य बातें

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 3 नवंबर 2026 को दिल्ली डिफेंस डायलॉग 2026 में कहा — आत्मनिर्भरता का अर्थ तकनीकी संप्रभुता है, न केवल देश में उत्पादन।
असली आत्मनिर्भरता के लिए डिज़ाइन ज्ञान, निर्माण तकनीक, सुधार के अधिकार और रखरखाव क्षमता — चारों ज़रूरी बताए।
DRDO के साथ-साथ शैक्षणिक संस्थानों, DPSUs , निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स के सहयोग से नवाचार तंत्र बनाने पर ज़ोर।
रक्षा निर्यात को हथियारों से आगे रखरखाव, प्रशिक्षण, रसद और तकनीकी सहयोग तक विस्तारित करने की वकालत।
वर्ष 2047 तक भारत को रक्षा क्षेत्र में डिज़ाइन, विकास, निर्माण और नवाचार का प्रमुख वैश्विक केंद्र बनाने का लक्ष्य।
संयुक्त विकास और साझा नवाचार पर आधारित अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को प्राथमिकता देने का आह्वान।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 3 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 'दिल्ली डिफेंस डायलॉग' 2026 को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का अर्थ देश में हर चीज़ का उत्पादन करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि भारत की महत्वपूर्ण रक्षा जरूरतें किसी भी अन्य देश पर निर्भर न रहें। उन्होंने कहा कि इसका असली लक्ष्य तकनीकी संप्रभुता हासिल करना है — ताकि भारत स्वयं रक्षा तकनीक विकसित कर सके, उसमें सुधार कर सके और उसे नियंत्रित कर सके।

आत्मनिर्भरता की परिभाषा

राजनाथ सिंह ने कहा कि किसी रक्षा उपकरण को देश में केवल असेंबल या निर्मित कर लेना सच्ची आत्मनिर्भरता नहीं है। उनके अनुसार, वास्तविक आत्मनिर्भरता तब मानी जाएगी जब भारत के पास उस उपकरण को डिज़ाइन करने का ज्ञान, निर्माण की तकनीक, सुधार के अधिकार और उसके पूरे जीवनकाल तक रखरखाव की क्षमता हो। यह परिभाषा पारंपरिक 'मेड इन इंडिया' की सोच से कहीं व्यापक है।

अनुसंधान एवं नवाचार तंत्र को मजबूत करने पर बल

रक्षा मंत्री ने कहा कि देश में एक ऐसा माहौल बनाना होगा जहाँ नए विचार तेज़ी से प्रयोग, विकास और सैन्य उपयोग तक पहुँच सकें। उन्होंने माना कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने भारत की रक्षा क्षमताओं को मज़बूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन तकनीकी नेतृत्व की जिम्मेदारी केवल एक संस्था की नहीं हो सकती।

उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों, शोध प्रयोगशालाओं, रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (DPSUs), निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स को मिलकर एक समन्वित नवाचार तंत्र बनाना होगा। गौरतलब है कि यह वक्तव्य ऐसे समय में आया है जब सरकार iDEX (इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सेलेंस) जैसे मंचों के ज़रिए रक्षा स्टार्टअप इकोसिस्टम को विस्तार दे रही है।

प्रयोग और विफलता को स्वीकार करने की ज़रूरत

राजनाथ सिंह ने नवाचार के लिए एक खुला दृष्टिकोण अपनाने पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि हर प्रयोग सफल नहीं होगा, लेकिन हर प्रयोग से कुछ नया सीखने को मिलना चाहिए। साथ ही उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि सफल प्रयोग केवल प्रयोगशाला या प्रोटोटाइप स्तर पर नहीं रुकने चाहिए — उन्हें बड़े पैमाने पर उत्पादन और वास्तविक सैन्य उपयोग तक पहुँचाना ज़रूरी है।

2047 तक वैश्विक रक्षा केंद्र बनने का लक्ष्य

रक्षा मंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 में आज़ादी के 100 वर्ष पूरे होने तक भारत को रक्षा क्षेत्र में डिज़ाइन, विकास, निर्माण और नवाचार का प्रमुख वैश्विक केंद्र बनने का लक्ष्य रखना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आत्मनिर्भरता की यह कोशिश दुनिया से अलग-थलग पड़ने की नहीं है — बल्कि तकनीकी रूप से सक्षम भारत अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए अवसर भी पैदा करेगा।

रक्षा निर्यात का विस्तारित दायरा

राजनाथ सिंह ने रक्षा निर्यात को केवल हथियारों और सैन्य उपकरणों तक सीमित न रखने की वकालत की। उनके अनुसार, इसमें रखरखाव, मरम्मत, प्रशिक्षण, रसद और तकनीकी सहयोग को भी शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत को पारंपरिक खरीदार-विक्रेता संबंध से आगे बढ़कर संयुक्त विकास, संयुक्त उत्पादन और साझा नवाचार पर आधारित साझेदारियाँ करनी चाहिए, जिससे वैश्विक रक्षा उद्योग में भारत की स्थायी पहचान बन सके।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत का रक्षा निर्यात पिछले कुछ वर्षों में तेज़ी से बढ़ा है और सरकार ने ₹50,000 करोड़ के रक्षा निर्यात लक्ष्य की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। आने वाले महीनों में इन नीतिगत प्राथमिकताओं के क्रियान्वयन की दिशा स्पष्ट होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि यह उस खामी को स्वीकार करती है जिसे आलोचक वर्षों से उठाते रहे हैं — लाइसेंस के तहत असेंबली को आत्मनिर्भरता कहना भ्रामक है। लेकिन यह वक्तव्य ऐसे समय में आया है जब भारत अभी भी अपने प्रमुख लड़ाकू विमानों के इंजन और कुछ उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर है। 2047 का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, लेकिन बिना स्पष्ट बेंचमार्क, बजटीय प्रतिबद्धता और जवाबदेही तंत्र के, यह वक्तव्य भी पिछली नीतिगत घोषणाओं की तरह केवल दिशा-संकेत बनकर रह सकता है। DRDO की उत्पाद-विकास समयसीमा और निजी क्षेत्र के साथ व्यावहारिक साझेदारी मॉडल — यही दो बिंदु इस दृष्टिकोण की सफलता या विफलता तय करेंगे।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजनाथ सिंह के अनुसार रक्षा आत्मनिर्भरता का क्या अर्थ है?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अनुसार आत्मनिर्भरता का अर्थ केवल देश में रक्षा उपकरण बनाना नहीं है, बल्कि तकनीकी संप्रभुता हासिल करना है। इसका मतलब है कि भारत के पास उपकरण को डिज़ाइन करने, उसमें सुधार करने और उसके पूरे जीवनकाल तक रखरखाव करने की स्वतंत्र क्षमता हो।
दिल्ली डिफेंस डायलॉग 2026 क्या है और यह कहाँ आयोजित हुआ?
दिल्ली डिफेंस डायलॉग 2026 नई दिल्ली में आयोजित एक रक्षा नीति संवाद कार्यक्रम है, जिसमें 3 नवंबर 2026 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संबोधन दिया। इस मंच पर उन्होंने भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता, नवाचार और निर्यात नीति पर विस्तृत विचार रखे।
DRDO की भूमिका के बारे में राजनाथ सिंह ने क्या कहा?
राजनाथ सिंह ने माना कि DRDO ने भारत की रक्षा क्षमताओं को मज़बूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि तकनीकी नेतृत्व की ज़िम्मेदारी केवल एक संस्था की नहीं हो सकती। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों, निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स को भी इस तंत्र में सक्रिय भागीदार बनाने की बात कही।
भारत के रक्षा निर्यात में किन नए क्षेत्रों को शामिल करने की बात कही गई?
राजनाथ सिंह ने कहा कि रक्षा निर्यात केवल हथियारों और सैन्य उपकरणों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसमें रखरखाव, मरम्मत, प्रशिक्षण, रसद और तकनीकी सहयोग को भी शामिल करने की ज़रूरत है, ताकि प्रत्येक सफल रक्षा निर्यात एक दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी का आधार बन सके।
2047 तक रक्षा क्षेत्र में भारत का क्या लक्ष्य है?
आज़ादी के 100 वर्ष पूरे होने पर वर्ष 2047 तक भारत का लक्ष्य रक्षा क्षेत्र में डिज़ाइन, विकास, निर्माण और नवाचार का प्रमुख वैश्विक केंद्र बनना है। राजनाथ सिंह ने इसके लिए तकनीकी और औद्योगिक क्षमताओं को लगातार मज़बूत करने और संयुक्त विकास पर आधारित अंतरराष्ट्रीय साझेदारियाँ बढ़ाने की ज़रूरत बताई।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले