4 नवंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

आयुष्मान भारत योजना से जयकिशन को मिली नई ज़िंदगी: व्हीलचेयर से उठकर चले अपने पैरों पर

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
आयुष्मान भारत योजना से जयकिशन को मिली नई ज़िंदगी: व्हीलचेयर से उठकर चले अपने पैरों पर

सारांश

व्हीलचेयर पर सिमटी जिंदगी, 30 किलो वजन और उम्मीद का टूटना — जयकिशन कपाड़िया की कहानी यही थी। फिर आयुष्मान भारत ने रास्ता खोला। चार सर्जरी और महीनों के पुनर्वास के बाद, मेहसाणा का यह युवक आज अपने पैरों पर खड़ा है — और नौकरी की तलाश में है।

मुख्य बातें

जयकिशन कपाड़िया ( 32 वर्ष , मेहसाणा, गुजरात ) को 17 वर्ष की उम्र में किडनी रोग हुआ; माँ ने किडनी दान देकर 2012 में ट्रांसप्लांट कराया।
ट्रांसप्लांट के बाद स्टेरॉयड के लंबे इस्तेमाल से दोनों कूल्हों के जोड़ खराब हो गए और वजन घटकर 30-35 किलोग्राम रह गया।
आयुष्मान भारत योजना के तहत अहमदाबाद के गवर्नमेंट स्पाइन इंस्टीट्यूट में चार सर्जरी और फिजियोथेरेपी से इलाज हुआ।
संस्थान के निदेशक डॉ.
पीयूष मित्तल की टीम ने शारीरिक के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान दिया।
जयकिशन अब स्वतंत्र रूप से चलने में सक्षम हैं और नौकरी की तलाश में हैं ताकि माँ का सहारा बन सकें।

गुजरात के मेहसाणा जिले के 32 वर्षीय जयकिशन कपाड़िया एक समय ऐसे मोड़ पर खड़े थे जहाँ उन्होंने सामान्य जीवन में लौटने की उम्मीद लगभग छोड़ दी थी — लेकिन केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना ने उनके जीवन में वह बदलाव किया जो उन्हें असंभव लग रहा था। अहमदाबाद के गवर्नमेंट स्पाइन इंस्टीट्यूट में इलाज के बाद, जयकिशन अब अपने पैरों पर चलने में सक्षम हैं — और एक स्वतंत्र जीवन जीने की नई उम्मीद लेकर आगे बढ़ रहे हैं।

मुश्किलों की शुरुआत: किडनी की बीमारी और माँ की कुर्बानी

जयकिशन के जीवन में कठिनाइयाँ तब शुरू हुईं जब महज 17 वर्ष की उम्र में उन्हें गंभीर किडनी रोग हो गया। उनकी माँ ने अपनी एक किडनी दान देकर उनकी जान बचाई और 2012 में किडनी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक हुआ।

हालाँकि, ट्रांसप्लांट के बाद लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाओं के सेवन से उनके कूल्हे के दोनों जोड़ धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होने लगे। अंगों में अकड़न और जोड़ों में असहनीय दर्द ने उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी को पूरी तरह ठप कर दिया। एक समय ऐसा भी आया जब उनका वजन घटकर मात्र 30-35 किलोग्राम रह गया और वे व्हीलचेयर के बिना एक कदम भी नहीं चल पाते थे।

आयुष्मान भारत बना उम्मीद की किरण

आर्थिक तंगी के कारण इलाज जारी रखना जयकिशन के परिवार के लिए असंभव हो चला था। इसी स्थिति में तीन वर्ष पहले उनकी माँ उन्हें अहमदाबाद के गवर्नमेंट स्पाइन इंस्टीट्यूट ले आईं, जहाँ उनका इलाज आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत निःशुल्क शुरू हुआ।

संस्थान के निदेशक डॉ. पीयूष मित्तल और उनकी विशेषज्ञ टीम ने पहले जयकिशन की शारीरिक और मानसिक स्थिति को स्थिर करने पर ध्यान दिया। डॉ. मित्तल के अनुसार, 'जब जयकिशन पहली बार संस्थान में आए, तो उनकी हड्डियाँ बेहद कमज़ोर हो चुकी थीं, कूल्हे के दोनों जोड़ खराब हो गए थे और वे बिस्तर से उठ भी नहीं पाते थे।'

चार सर्जरी और पुनर्वास की लंबी राह

जयकिशन की कुल चार सर्जरी हुईं, जिनमें दोनों कूल्हों के जोड़ों को एक-एक करके बदला गया। डॉ. मित्तल ने बताया, 'हमने फिजियोथेरेपी और ज़रूरी दवाओं के साथ इलाज शुरू किया। इसके साथ ही उनके मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया गया। हमारा लक्ष्य उन्हें फिर से अपने पैरों पर खड़ा करना और एक स्वतंत्र जीवन जीने के काबिल बनाना था।'

गौरतलब है कि इस तरह के जटिल ऑर्थोपेडिक ऑपरेशन निजी अस्पतालों में लाखों रुपये तक खर्च करा सकते हैं — आयुष्मान भारत योजना की वजह से जयकिशन जैसे आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवारों के लिए यह उपचार सुलभ हो पाया।

जयकिशन की आवाज़ में उम्मीद

इलाज के बाद जयकिशन ने कहा, 'मेरी माँ मुझे व्हीलचेयर पर अस्पताल लाई थीं। उस समय मैं ठीक से खड़ा भी नहीं हो पाता था। यहाँ के डॉक्टरों ने पहले एक पैर की और फिर दूसरे पैर की सर्जरी की। अब मैं काफी बेहतर महसूस कर रहा हूँ। एक समय ऐसा था जब मुझे नहीं लगा था कि मैं कभी दोबारा चल पाऊँगा, लेकिन अब अपनी हालत में सुधार देखकर बहुत अच्छा लग रहा है।'

जयकिशन ने यह भी बताया कि अब वे नौकरी की तलाश में हैं और अपनी माँ का सहारा बनना चाहते हैं — जिन्होंने उनके लिए न केवल अपनी किडनी दी, बल्कि वर्षों तक उनकी देखभाल में खुद को झोंक दिया।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब आयुष्मान भारत योजना की पहुँच और प्रभाव पर देशभर में चर्चा जारी है। जयकिशन का मामला दर्शाता है कि सही वक्त पर मिली सरकारी स्वास्थ्य सुविधा किस तरह किसी व्यक्ति का जीवन पूरी तरह बदल सकती है। संस्थान की टीम का अगला लक्ष्य जयकिशन के पुनर्वास को और मजबूत करना और उन्हें व्यावसायिक पुनःएकीकरण में सहयोग देना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि व्यक्तिगत जीवन में दिखती है। फिर भी, एक सफलता की कहानी उन लाखों सवालों का जवाब नहीं देती जो योजना की पहुँच, अस्पतालों की गुणवत्ता और दावों के निपटान में देरी को लेकर उठते रहे हैं। असली कसौटी यह है कि जयकिशन जैसे मामले अपवाद हैं या नियम — और यह जानने के लिए ज़रूरत है पारदर्शी, जिलेवार डेटा की, न कि केवल प्रेरणादायक उदाहरणों की।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयकिशन कपाड़िया की बीमारी क्या थी और उन्हें किस इलाज की जरूरत थी?
जयकिशन को 17 वर्ष की उम्र में किडनी रोग हुआ था, जिसके बाद 2012 में माँ की किडनी से ट्रांसप्लांट हुआ। ट्रांसप्लांट के बाद लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाओं के सेवन से उनके कूल्हे के दोनों जोड़ खराब हो गए, जिनके लिए चार सर्जरी और फिजियोथेरेपी की आवश्यकता पड़ी।
आयुष्मान भारत योजना ने जयकिशन की कैसे मदद की?
आयुष्मान भारत योजना के तहत जयकिशन का इलाज अहमदाबाद के गवर्नमेंट स्पाइन इंस्टीट्यूट में निःशुल्क हुआ। आर्थिक तंगी के कारण जो इलाज असंभव लग रहा था, उसे इस योजना ने सुलभ बनाया — चार सर्जरी सहित सम्पूर्ण उपचार और पुनर्वास का खर्च योजना के अंतर्गत वहन किया गया।
गवर्नमेंट स्पाइन इंस्टीट्यूट, अहमदाबाद में जयकिशन का इलाज कैसे हुआ?
संस्थान के निदेशक डॉ. पीयूष मित्तल की टीम ने पहले फिजियोथेरेपी और दवाओं से जयकिशन की स्थिति को स्थिर किया, साथ ही उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान दिया। इसके बाद दोनों कूल्हों की एक-एक करके सर्जरी की गई और पुनर्वास कार्यक्रम के जरिए उन्हें चलने-फिरने में सक्षम बनाया गया।
आयुष्मान भारत योजना किन लोगों के लिए है?
आयुष्मान भारत योजना केंद्र सरकार की स्वास्थ्य बीमा पहल है, जो मुख्यतः आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों को प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹5 लाख तक का निःशुल्क स्वास्थ्य कवरेज देती है। इसमें अस्पताल में भर्ती, सर्जरी और उपचार के खर्च शामिल हैं।
जयकिशन कपाड़िया अब किस स्थिति में हैं?
चार सर्जरी और लंबे पुनर्वास के बाद जयकिशन अब स्वतंत्र रूप से चलने-फिरने में सक्षम हैं। वे अब नौकरी की तलाश कर रहे हैं और अपनी माँ का सहारा बनना चाहते हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 5 घंटे पहले
  2. 6 दिन पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 10 महीने पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले