आयुष्मान भारत वय वंदना योजना: 1.20 करोड़ वरिष्ठ नागरिक पंजीकृत, ₹3,000 करोड़ के 13.84 लाख इलाज
सारांश
मुख्य बातें
आयुष्मान भारत वय वंदना योजना के तहत देशभर में 1.20 करोड़ से अधिक वरिष्ठ नागरिकों का पंजीकरण हो चुका है और 13.84 लाख से ज्यादा उपचार किए जा चुके हैं, जिनकी कुल लागत लगभग ₹3,000 करोड़ रही है। सरकार ने 6 जून 2026 को यह जानकारी दी। यह आँकड़े भारत की बुजुर्ग आबादी के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में उठाए गए कदमों की व्यापकता को दर्शाते हैं।
वय वंदना योजना की मुख्य उपलब्धियाँ
सरकारी बयान के अनुसार, इस योजना के तहत बुजुर्ग लाभार्थियों को सूचीबद्ध अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा दी जा रही है। ₹3,000 करोड़ की कुल उपचार लागत यह संकेत देती है कि प्रति उपचार औसत खर्च लगभग ₹21,000 के आसपास रहा है — जो बुजुर्गों की जटिल स्वास्थ्य जरूरतों को देखते हुए महत्त्वपूर्ण आँकड़ा है।
टीकाकरण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य में प्रगति
सरकार ने बताया कि मिशन इंद्रधनुष अभियान के तहत 5.46 करोड़ बच्चों और 1.32 करोड़ गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण किया गया, जिन्हें पहले कोई टीका नहीं लगा था। एक अधिकारिक बयान में कहा गया कि जीरो-डोज बच्चों की हिस्सेदारी वर्ष 2023 के 0.11 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2024 में 0.06 प्रतिशत रह गई।
सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) के तहत हर साल 2.67 करोड़ नवजात शिशुओं और 2.9 करोड़ गर्भवती महिलाओं को 12 बीमारियों से बचाव के लिए मुफ्त टीके उपलब्ध कराए जाते हैं।
आयुष्मान भारत PM-JAY की व्यापक पहुँच
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY) के तहत सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को प्रति वर्ष प्रति परिवार ₹5 लाख तक का मुफ्त स्वास्थ्य बीमा दिया जाता है। यह योजना देश की कुल आबादी के लगभग 40 प्रतिशत यानी करीब 12 करोड़ परिवारों को कवर करती है।
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, अब तक 44.14 करोड़ आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं, 12.03 करोड़ अस्पताल भर्ती के मामले कवर किए गए हैं और लगभग ₹1,80,435 करोड़ मूल्य का इलाज उपलब्ध कराया गया है। इस योजना से जुड़े 36,218 अस्पतालों में 19,659 सरकारी और 16,559 निजी अस्पताल शामिल हैं।
बुनियादी ढाँचे और डिजिटल स्वास्थ्य में बदलाव
पिछले 12 वर्षों में स्वास्थ्य क्षेत्र में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए सरकार ने कहा कि 44 करोड़ से अधिक परिवारों को विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत स्वास्थ्य बीमा का लाभ मिला है और 1.86 लाख से ज्यादा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित हो चुके हैं।
देशभर में 18,000 से अधिक जन औषधि केंद्रों के माध्यम से जेनेरिक दवाएँ बाजार कीमतों की तुलना में 50 से 90 प्रतिशत तक कम दाम पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। 47 करोड़ से अधिक टेलीमेडिसिन परामर्श दिए जा चुके हैं। 2014 के बाद मेडिकल कॉलेजों की संख्या दोगुनी से अधिक हो गई है और 12 नए AIIMS संस्थान कार्यरत हो चुके हैं। डॉक्टरों और नर्सों के प्रशिक्षण की क्षमता भी दोगुनी से अधिक बढ़ाई गई है।
आगे की राह
सरकार ने पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को औपचारिक रूप से सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली का हिस्सा बनाने की भी जानकारी दी। आलोचकों का कहना है कि पंजीकरण और कार्ड-निर्माण के आँकड़े प्रभावशाली हैं, लेकिन योजना की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि अंतिम छोर के लाभार्थियों — विशेषकर ग्रामीण बुजुर्गों — तक सेवाएँ कितनी सुगमता से पहुँच रही हैं।