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राजनाथ सिंह का 'स्वावलंबन 2026' में ऐलान: आत्मनिर्भरता के दूसरे चरण में अत्याधुनिक तकनीक पर होगा फोकस

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राजनाथ सिंह का 'स्वावलंबन 2026' में ऐलान: आत्मनिर्भरता के दूसरे चरण में अत्याधुनिक तकनीक पर होगा फोकस

सारांश

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 'स्वावलंबन 2026' में ऐलान किया कि भारत की आत्मनिर्भरता यात्रा अब दूसरे चरण में है — जहाँ लक्ष्य सिर्फ उत्पादन नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी अत्याधुनिक तकनीक का विकास है। ₹1,900 करोड़ के नौसैनिक अनुबंध और 4,000 से अधिक iDEX प्रस्ताव इस दावे को ज़मीन देते हैं।

मुख्य बातें

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 26 अक्टूबर 2026 को 'स्वावलंबन 2026' कार्यक्रम में आत्मनिर्भरता के दूसरे चरण की घोषणा की।
₹1,900 करोड़ से अधिक के नौसैनिक अनुबंधों को आत्मनिर्भरता के ठोस परिणाम बताया गया।
नौसेना की 229 iDEX चुनौतियों के लिए स्टार्टअप्स और MSMEs से 4,000 से अधिक प्रस्ताव प्राप्त हुए।
दूसरे चरण में कम लागत, बेहतर गुणवत्ता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को केंद्र में रखा जाएगा।
नागरिक और सैन्य जहाजरानी दोनों के लिए साझा प्राथमिकता सूची बनाने का सुझाव दिया गया।
शैक्षणिक संस्थानों में R&D संस्कृति और उद्योग-शिक्षा सहयोग को मजबूत करने पर बल दिया गया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 26 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 'स्वावलंबन 2026' कार्यक्रम में कहा कि ₹1,900 करोड़ से अधिक के नौसैनिक अनुबंध भारत की आत्मनिर्भरता यात्रा के ठोस परिणाम हैं। नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन की उपस्थिति में बोलते हुए उन्होंने घोषणा की कि देश अब आत्मनिर्भरता के दूसरे चरण में प्रवेश कर रहा है, जिसमें केवल उत्पादन नहीं, बल्कि अत्याधुनिक तकनीकों का विकास सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।

आत्मनिर्भरता का दूसरा चरण: क्या है नई रणनीति

राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि पहले चरण में 'मेड इन इंडिया' पर ज़ोर था, जबकि दूसरे चरण में वे क्षेत्र प्राथमिकता में आएंगे जिन्हें अब तक 'असंभव' माना जाता था। उन्होंने कहा कि इस चरण में केवल देश के भीतर उत्पादन करना पर्याप्त नहीं है — उत्पाद कम लागत वाले, परिचालन में बेहतर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भी होने चाहिए। गौरतलब है कि यह बदलाव उस समय आया है जब भारत रक्षा निर्यात को नई ऊँचाई पर ले जाने का लक्ष्य रख रहा है।

आईडेक्स और नवाचार: उत्साहजनक आँकड़े

रक्षा मंत्री ने बताया कि नौसेना की ओर से शुरू की गई 229 'iDEX' (इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सेलेंस) चुनौतियों के लिए स्टार्टअप्स और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) से 4,000 से अधिक प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि इन नवाचारकर्ताओं ने नौसैनिक प्रणालियों, संवेदक तकनीक और संचार प्रणालियों जैसे क्षेत्रों में ऐसे समाधान विकसित किए हैं, जिनके लिए भारत पहले विदेशों पर निर्भर था। यह संख्या इस बात का प्रमाण है कि भारतीय उद्यमिता का उत्साह रक्षा नवाचार में प्रवेश कर चुका है।

युवाओं और शोध संस्कृति पर ज़ोर

राजनाथ सिंह ने शैक्षणिक संस्थानों में शोध को बढ़ावा देने और उद्योग-शिक्षा सहयोग को मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पहले प्रतिभाशाली युवाओं के सपने धन की कमी के कारण अधूरे रह जाते थे, लेकिन अब सरकार ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि वित्तीय बाधाएँ नवाचार की राह न रोकें। उनके अनुसार, युवाओं को शोध में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करने से देश में अनुसंधान और विकास (R&D) की मजबूत संस्कृति विकसित होगी।

नागरिक और सैन्य जहाजरानी के लिए साझा प्राथमिकता सूची

रक्षा मंत्री ने एक महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि ऐसी तकनीकों और उत्पादों के विकास के लिए प्राथमिकता सूची बनाने पर विचार किया जाना चाहिए, जिनकी ज़रूरत नागरिक और सैन्य, दोनों जहाजरानी क्षेत्रों में होती है। यह 'दोहरे उपयोग' (dual-use) तकनीक का विचार भारत के रक्षा औद्योगिक आधार को व्यापक बनाने की दिशा में एक नई रणनीतिक सोच को दर्शाता है।

आगे की राह

'स्वावलंबन 2026' मंच पर दिए गए इस भाषण में राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि भारत की तकनीकी क्षमता किसी भी देश से कम नहीं है और देश के नवाचारकर्ता युवा आत्मनिर्भरता के दूसरे चरण की रीढ़ बनेंगे। आलोचकों का कहना है कि वास्तविक परीक्षा इन लक्ष्यों के क्रियान्वयन और सरकारी खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता से होगी। रक्षा विशेषज्ञों की नज़र अब इस बात पर होगी कि iDEX के ज़रिए विकसित तकनीकों को सशस्त्र बलों की वास्तविक परिचालन आवश्यकताओं में कितनी जल्दी एकीकृत किया जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

परंतु इसे वास्तविकता में बदलने की चुनौती बड़ी है। iDEX से 4,000 प्रस्ताव आना उत्साहजनक है, लेकिन असली कसौटी यह है कि इनमें से कितनी तकनीकें वास्तव में सशस्त्र बलों की परिचालन श्रृंखला में शामिल हो पाती हैं। रक्षा खरीद की जटिल और धीमी प्रक्रिया अक्सर नवाचार की गति को बाधित करती है — यही वह अंतराल है जिसे भरे बिना 'दूसरा चरण' कागज़ों तक सीमित रह सकता है। नागरिक-सैन्य dual-use तकनीक का सुझाव सही दिशा में है, लेकिन इसके लिए नौकरशाही और सैन्य खरीद ढाँचे में समन्वय की ज़रूरत होगी, जो अभी तक एक अनसुलझी चुनौती बनी हुई है।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आत्मनिर्भरता का दूसरा चरण क्या है?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अनुसार, आत्मनिर्भरता का दूसरा चरण केवल घरेलू उत्पादन तक सीमित नहीं है — इसमें अत्याधुनिक तकनीकों का विकास, कम लागत पर गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और वैश्विक बाज़ार में प्रतिस्पर्धा शामिल है। उन्होंने कहा कि यह चरण उन क्षेत्रों पर ध्यान देगा जिन्हें अब तक 'असंभव' माना जाता था।
'स्वावलंबन 2026' कार्यक्रम क्या है?
'स्वावलंबन 2026' भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित रक्षा नवाचार कार्यक्रम है, जहाँ रक्षा मंत्रालय, उद्योग जगत और स्टार्टअप्स एक मंच पर आते हैं। इस वर्ष यह कार्यक्रम 26 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन की उपस्थिति में आयोजित हुआ।
iDEX योजना से नौसेना को क्या मिला?
नौसेना की 229 iDEX चुनौतियों के जवाब में स्टार्टअप्स और MSMEs से 4,000 से अधिक प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनमें नौसैनिक प्रणालियों, संवेदक तकनीक और संचार प्रणालियों में ऐसे समाधान विकसित हुए हैं जिनके लिए पहले भारत विदेशों पर निर्भर था।
₹1,900 करोड़ के नौसैनिक अनुबंध किस काम के हैं?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ₹1,900 करोड़ से अधिक के इन अनुबंधों को भारत की आत्मनिर्भरता के ठोस परिणाम बताया। ये अनुबंध घरेलू रक्षा उद्योग को दिए गए हैं और यह दर्शाते हैं कि नौसेना अपनी ज़रूरतों के लिए स्वदेशी समाधानों की ओर तेज़ी से बढ़ रही है।
dual-use तकनीक पर राजनाथ सिंह का सुझाव क्या था?
राजनाथ सिंह ने सुझाव दिया कि ऐसी तकनीकों और उत्पादों के लिए प्राथमिकता सूची बनाई जाए जो नागरिक और सैन्य, दोनों जहाजरानी क्षेत्रों में काम आ सकें। यह 'दोहरे उपयोग' (dual-use) तकनीक का विचार रक्षा और वाणिज्यिक समुद्री क्षेत्र दोनों को एकसाथ मज़बूत करने की रणनीति है।
राष्ट्र प्रेस
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