राजनाथ सिंह: विकसित भारत के लिए तकनीकी सक्षमता और नवाचार अनिवार्य, IIT कानपुर से बोले रक्षा मंत्री
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 14 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में स्पष्ट किया कि विकसित भारत का लक्ष्य महज एक बड़ी अर्थव्यवस्था बनना नहीं, बल्कि ऐसा राष्ट्र बनाना है जो तकनीकी रूप से सक्षम, आर्थिक रूप से प्रतिस्पर्धी और नवाचार में अग्रणी हो। उन्होंने जोर देकर कहा कि आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना इस लक्ष्य की रीढ़ है और भारत को केवल विदेशी तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि नए ज्ञान और तकनीक का निर्माता बनना होगा।
मुख्य घटनाक्रम
राजनाथ सिंह आईआईटी कानपुर के 'ग्रेटर दैन अस' अभियान को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता का वास्तविक अर्थ देश की सीमाओं के भीतर उत्पादन बढ़ाना मात्र नहीं है — इसका अर्थ है देश की सोचने, अभिकल्प तैयार करने, निर्माण करने और नवाचार करने की क्षमता को विकसित करना। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में अपनी स्थिति सुदृढ़ करने की कोशिश में है।
IIT संस्थानों की भूमिका और उपलब्धियाँ
रक्षा मंत्री ने आईआईटी संस्थानों के योगदान का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि अगस्त 2025 तक आईआईटी से जुड़े तंत्र ने 6,000 से अधिक नवोद्यमों (स्टार्टअप्स) को सहयोग दिया। इसी तंत्र से 56 यूनिकॉर्न सामने आए और लगभग 5,000 पेटेंट दर्ज किए गए।
उन्होंने कहा कि आईआईटी संस्थानों का योगदान केवल स्नातकों की संख्या या प्रकाशित शोधपत्रों से नहीं आँका जा सकता। इसका वास्तविक प्रभाव उन तकनीकों, उद्यमों और समस्या-समाधानों में दिखाई देता है जो पूर्व छात्र तैयार करते हैं और जिनसे नए अवसर उत्पन्न होते हैं।
उद्योग, शिक्षा और रक्षा के बीच तालमेल
राजनाथ सिंह ने कहा कि भविष्य के औद्योगिक विकास में तकनीक, नवाचार, उत्पादकता और कुशल मानव संसाधन की भूमिका लगातार बढ़ेगी। इसके लिए शैक्षणिक संस्थानों, शोधकर्ताओं और उद्योगों के बीच बेहतर तालमेल आवश्यक है। उन्होंने आईआईटी कानपुर को वैज्ञानिक शोध और औद्योगिक उपयोग के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु बताया।
गौरतलब है कि रक्षा मंत्री ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO), उद्योग और शिक्षाविदों के सहयोग से आईआईटी कानपुर में स्थापित उत्कृष्टता केंद्र का विशेष उल्लेख किया और इसे शोध तथा व्यावहारिक जरूरतों को जोड़ने का आदर्श उदाहरण बताया।
रक्षा प्रौद्योगिकी विद्यालय का प्रस्ताव
रक्षा मंत्री ने आईआईटी कानपुर में रक्षा प्रौद्योगिकी विद्यालय स्थापित करने के प्रस्ताव पर प्रसन्नता व्यक्त की। उनके अनुसार ऐसी पहल से शैक्षणिक शोध और रक्षा क्षेत्र की आवश्यकताओं के बीच सहयोग मजबूत होगा तथा वैज्ञानिक उपलब्धियों को रणनीतिक महत्व की तकनीकों में बदला जा सकेगा।
आगे की राह
राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि जब किसी संस्थान का ज्ञान और नवाचार विभिन्न क्षेत्रों तथा पीढ़ियों तक पहुँचता है, तो राष्ट्र निर्माण में उसका योगदान कई गुना बढ़ जाता है। रक्षा, शिक्षा और उद्योग के इस त्रिकोणीय सहयोग को आगे और सुदृढ़ करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने की अपेक्षा है।