राजनाथ सिंह बोले — चिप से जहाज तक स्वदेशी उत्पादन ज़रूरी, आत्मनिर्भर रक्षा इकोसिस्टम राष्ट्रीय सुरक्षा की कुंजी
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 27 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एनडीटीवी डिफेंस समिट 2026 को संबोधित करते हुए कहा कि भारत को घरेलू रक्षा विनिर्माण क्षमताओं को सुदृढ़ करना होगा और महत्वपूर्ण तकनीकों पर अधिकतम नियंत्रण हासिल करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि तेज़ी से जटिल होते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में रणनीतिक स्वायत्तता के लिए यह अनिवार्य कदम है।
मुख्य संदेश: आयात पर निर्भरता घटाओ
सिंह ने कहा कि देश का दृष्टिकोण एक सुस्पष्ट सोच पर आधारित है — भारत में जो भी बनाया जा सकता है, वह यहीं बने और विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम हो। उन्होंने अपनी बात एक सशक्त पंक्ति से कही: "चिप से लेकर जहाजों तक, स्क्रू से लेकर पूरी हथियार प्रणालियों तक — यही भारत को रणनीतिक स्वायत्तता की ओर ले जाएगा।" रक्षा मंत्री के अनुसार, रक्षा आपूर्ति श्रृंखला के महत्वपूर्ण घटकों का घरेलू उत्पादन और उन पर नियंत्रण राष्ट्रीय सुरक्षा की बुनियाद को मज़बूत करेगा।
पाँचवीं पीढ़ी के युद्ध और उभरती तकनीकें
दूरसंचार के 2जी से 5जी तक के विकास से तुलना करते हुए सिंह ने कहा कि युद्ध भी अब पाँचवीं पीढ़ी के चरण में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने रेखांकित किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम तकनीक, रोबोटिक्स, स्वायत्त प्रणालियाँ और साइबर सुरक्षा अब आधुनिक सैन्य अभियानों का अभिन्न हिस्सा हैं। उनके अनुसार, जो देश इन अत्याधुनिक तकनीकों में बढ़त हासिल करेंगे, वे भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से बेहतर ढंग से निपट सकेंगे।
स्वदेशी नवाचार और युवाओं की भूमिका
रक्षा मंत्री ने रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी डिज़ाइन और स्थानीय ज़रूरतों के अनुरूप तकनीक विकसित करने को अपरिहार्य बताया। उन्होंने भारतीय युवाओं की विशेष सराहना करते हुए कहा कि वे AI, ड्रोन तकनीक, रोबोटिक्स, क्वांटम कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा समाधान और स्वायत्त प्रणालियों पर सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। सिंह ने कहा: "भारत के युवा अब केवल भविष्य की नौकरियों की तैयारी नहीं कर रहे हैं। वे भारत के भविष्य के युद्धों के लिए तकनीक तैयार कर रहे हैं।"
नीतिगत सुधारों का संदर्भ
हाल के नीतिगत बदलावों का उल्लेख करते हुए सिंह ने बताया कि सरकार ने घरेलू रक्षा उद्योग को गति देने के लिए संरचनात्मक और परिवर्तनकारी सुधार किए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत स्वदेशी क्वांटम तकनीकों को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहा है और उभरते रक्षा नवाचारों को समर्थन देने के लिए नीतिगत ढाँचा मज़बूत किया जा रहा है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत अपने रक्षा निर्यात लक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में तेज़ कदम उठा रहा है और रक्षा बजट लगातार बढ़ाया जा रहा है।
आगे की राह: बहु क्षेत्रीय युद्धक्षेत्र की तैयारी
सिंह ने कहा कि भारत संपर्क और गैर संपर्क युद्ध दोनों के लिए, तथा काइनेटिक और नॉन काइनेटिक सैन्य अभियानों के लिए क्षमता निर्माण कर रहा है। साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण ऊर्जा संसाधनों में विविधता लाने पर भी बल दिया जा रहा है। गौरतलब है कि यह वक्तव्य ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर रक्षा प्रौद्योगिकी की होड़ तेज़ हो रही है और भारत रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है।