3 नवंबर 2026
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एसआईआर विसंगतियाँ छिपाने को भाजपा बना रही राष्ट्र विरोधी का लेबल: टीपीसीसी उपाध्यक्ष डॉ. कोटा नीलिमा

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एसआईआर विसंगतियाँ छिपाने को भाजपा बना रही राष्ट्र विरोधी का लेबल: टीपीसीसी उपाध्यक्ष डॉ. कोटा नीलिमा

सारांश

एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल उठाना अब 'राष्ट्र विरोध' बन गया है — कम से कम भाजपा की नज़र में। टीपीसीसी उपाध्यक्ष डॉ. कोटा नीलिमा का कहना है कि यह रणनीति असल विसंगतियों से ध्यान भटकाने की है। रामलीला मैदान में 20+ विपक्षी दलों की एकजुटता के बाद यह बहस राष्ट्रीय रूप ले चुकी है।

मुख्य बातें

टीपीसीसी उपाध्यक्ष डॉ.
कोटा नीलिमा ने 3 नवंबर 2026 को कहा कि भाजपा एसआईआर पर सवाल उठाने वालों को राष्ट्र विरोधी बताकर गंभीर विसंगतियाँ छिपाने की कोशिश कर रही है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हैदराबाद में 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान शुरू किया, जिसकी विपक्ष ने निंदा की।
1 नवंबर 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में 'वोट बचाओ, देश बचाओ' रैली में 20 से अधिक विपक्षी दल एकजुट हुए।
रैली का नेतृत्व मल्लिकार्जुन खड़गे , सोनिया गांधी , राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने किया।
संयुक्त विपक्ष के अनुसार एसआईआर के तहत 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं (लगभग 14% आबादी) के नाम हटाने का प्रस्ताव लोकतंत्र पर सीधा हमला है।

तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (टीपीसीसी) की उपाध्यक्ष डॉ. कोटा नीलिमा ने 3 नवंबर 2026 को हैदराबाद में कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) का नया राजनीतिक अभियान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में मौजूद गंभीर विसंगतियों को उजागर करने वाले नागरिकों को राष्ट्र विरोधी करार देकर मुद्दे से ध्यान भटकाने की सुनियोजित कोशिश है। उनका यह बयान उस समय आया है जब देशभर में एसआईआर प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों का विरोध तेज़ हो रहा है।

भाजपा अभियान पर सीधा हमला

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को हैदराबाद में 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान की शुरुआत की। डॉ. नीलिमा ने इस अभियान की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि यह एसआईआर को लेकर नागरिकों की वास्तविक चिंताओं का समाधान करने के बजाय उन्हीं नागरिकों को निशाना बनाता है।

उन्होंने अपने बयान में कहा, "अपने चिर परिचित अहंकारी अंदाज में भाजपा एसआईआर पर सवाल उठाने वाले किसी भी व्यक्ति को राष्ट्र विरोधी करार देने की कोशिश कर रही है। यह उन नागरिकों, राजनीतिक दलों और नेताओं को डराने की एक सोची समझी कोशिश है, जिन्होंने एसआईआर प्रक्रिया पर ठोस सबूतों के साथ जायज आपत्तियाँ उठाई हैं।"

दिल्ली रैली और विपक्ष की एकजुटता

डॉ. नीलिमा रविवार 1 नवंबर 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित कांग्रेस के नेतृत्व वाली 'वोट बचाओ, देश बचाओ' रैली में भी शामिल हुईं। उन्होंने कहा कि जनता की इस भारी प्रतिक्रिया ने भाजपा को घबरा दिया है।

रैली का नेतृत्व कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, विपक्ष के नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने किया। इस रैली में 20 से अधिक विपक्षी दल एकजुट हुए, जिनमें समाजवादी पार्टी (SP), राष्ट्रीय जनता दल (RJD), तृणमूल कांग्रेस (TMC), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP SP), शिवसेना (यूबीटी), पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP), जम्मू कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (JKNC) और वामपंथी दल शामिल रहे।

एसआईआर पर संयुक्त विपक्ष का तर्क

संयुक्त विपक्ष का कहना है कि 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं — जो देश की कुल आबादी का लगभग 14 प्रतिशत हैं — के नाम मतदाता सूची से हटाना लोकतंत्र पर सीधा हमला है और नागरिकों से मताधिकार छीनने के बराबर है। आलोचकों का कहना है कि इस पैमाने पर नाम हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही का अभाव है।

भाजपा की प्रतिक्रिया और आरोप प्रत्यारोप

डॉ. नीलिमा ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह ने हैदराबाद में एक पदयात्रा के दौरान उन नागरिकों को ही दोषी ठहराया जो अपने मतदान के अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह 'सही और गलत' की समझ का पूरी तरह अभाव दर्शाता है। BJP की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

आगे क्या होगा

एसआईआर को लेकर राजनीतिक संग्राम अब केवल तेलंगाना तक सीमित नहीं रहा — यह राष्ट्रीय स्वरूप ले चुका है। इंडिया ब्लॉक का दबाव और रामलीला मैदान जैसी बड़ी रैलियाँ संकेत देती हैं कि विपक्ष इस मुद्दे को आगामी चुनावों तक जीवित रखने की रणनीति पर काम कर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चुनाव आयोग (ECI) इन आपत्तियों पर क्या रुख अपनाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जब 13 करोड़ संभावित प्रभावित मतदाताओं का आँकड़ा सामने हो, तो मुख्यधारा की कवरेज में यह सवाल गायब नहीं होना चाहिए कि चुनाव आयोग इस पर क्या कार्रवाई कर रहा है। रामलीला मैदान की रैली में 20 से अधिक दलों की उपस्थिति विपक्षी एकता की दुर्लभ तस्वीर है, लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब यह एकता संसद या न्यायिक मंच पर ठोस कदमों में बदले — सिर्फ रैलियों तक सिमटे नहीं।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण मतदाता सूची को अद्यतन करने की एक प्रक्रिया है जिसमें अपात्र या गलत दर्ज नाम हटाए जाते हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में 13 करोड़ से अधिक वैध मतदाताओं के नाम बिना पर्याप्त जाँच के हटाए जा रहे हैं, जो मताधिकार का उल्लंघन है।
डॉ. कोटा नीलिमा ने भाजपा के 'लोकतंत्र बचाओ' अभियान की आलोचना क्यों की?
टीपीसीसी उपाध्यक्ष डॉ. कोटा नीलिमा का कहना है कि यह अभियान एसआईआर की गंभीर खामियों पर जवाब देने के बजाय सवाल उठाने वालों को राष्ट्र विरोधी बताकर डराने की कोशिश करता है। उनके अनुसार ठोस सबूतों के साथ आपत्तियाँ दर्ज करना लोकतांत्रिक अधिकार है, देशद्रोह नहीं।
दिल्ली में 'वोट बचाओ, देश बचाओ' रैली में कौन कौन शामिल हुए?
1 नवंबर 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई इस रैली का नेतृत्व कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे , सोनिया गांधी , राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने किया। SP, RJD, TMC, NCP(SP), शिवसेना (यूबीटी), PDP, JKNC और वामपंथी दलों समेत 20 से अधिक विपक्षी दल इंडिया ब्लॉक के बैनर तले एकजुट हुए।
एसआईआर से कितने मतदाता प्रभावित हो सकते हैं?
संयुक्त विपक्ष के अनुसार एसआईआर प्रक्रिया के तहत 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए जाने का खतरा है, जो देश की कुल आबादी का लगभग 14 प्रतिशत है। विपक्ष इसे लोकतंत्र पर सीधा हमला बता रहा है।
इस विवाद में आगे क्या होने की उम्मीद है?
इंडिया ब्लॉक की रैलियों और बयानों के बाद अब नज़रें चुनाव आयोग (ECI) पर हैं कि वह विपक्ष की आपत्तियों पर औपचारिक रुख कब स्पष्ट करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा आगामी राज्य और लोकसभा चुनावों तक राजनीतिक बहस का केंद्र बना रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
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