एसआईआर विसंगतियाँ छिपाने को भाजपा बना रही राष्ट्र विरोधी का लेबल: टीपीसीसी उपाध्यक्ष डॉ. कोटा नीलिमा
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (टीपीसीसी) की उपाध्यक्ष डॉ. कोटा नीलिमा ने 3 नवंबर 2026 को हैदराबाद में कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) का नया राजनीतिक अभियान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में मौजूद गंभीर विसंगतियों को उजागर करने वाले नागरिकों को राष्ट्र विरोधी करार देकर मुद्दे से ध्यान भटकाने की सुनियोजित कोशिश है। उनका यह बयान उस समय आया है जब देशभर में एसआईआर प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों का विरोध तेज़ हो रहा है।
भाजपा अभियान पर सीधा हमला
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को हैदराबाद में 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान की शुरुआत की। डॉ. नीलिमा ने इस अभियान की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि यह एसआईआर को लेकर नागरिकों की वास्तविक चिंताओं का समाधान करने के बजाय उन्हीं नागरिकों को निशाना बनाता है।
उन्होंने अपने बयान में कहा, "अपने चिर परिचित अहंकारी अंदाज में भाजपा एसआईआर पर सवाल उठाने वाले किसी भी व्यक्ति को राष्ट्र विरोधी करार देने की कोशिश कर रही है। यह उन नागरिकों, राजनीतिक दलों और नेताओं को डराने की एक सोची समझी कोशिश है, जिन्होंने एसआईआर प्रक्रिया पर ठोस सबूतों के साथ जायज आपत्तियाँ उठाई हैं।"
दिल्ली रैली और विपक्ष की एकजुटता
डॉ. नीलिमा रविवार 1 नवंबर 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित कांग्रेस के नेतृत्व वाली 'वोट बचाओ, देश बचाओ' रैली में भी शामिल हुईं। उन्होंने कहा कि जनता की इस भारी प्रतिक्रिया ने भाजपा को घबरा दिया है।
रैली का नेतृत्व कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, विपक्ष के नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने किया। इस रैली में 20 से अधिक विपक्षी दल एकजुट हुए, जिनमें समाजवादी पार्टी (SP), राष्ट्रीय जनता दल (RJD), तृणमूल कांग्रेस (TMC), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP SP), शिवसेना (यूबीटी), पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP), जम्मू कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (JKNC) और वामपंथी दल शामिल रहे।
एसआईआर पर संयुक्त विपक्ष का तर्क
संयुक्त विपक्ष का कहना है कि 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं — जो देश की कुल आबादी का लगभग 14 प्रतिशत हैं — के नाम मतदाता सूची से हटाना लोकतंत्र पर सीधा हमला है और नागरिकों से मताधिकार छीनने के बराबर है। आलोचकों का कहना है कि इस पैमाने पर नाम हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही का अभाव है।
भाजपा की प्रतिक्रिया और आरोप प्रत्यारोप
डॉ. नीलिमा ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह ने हैदराबाद में एक पदयात्रा के दौरान उन नागरिकों को ही दोषी ठहराया जो अपने मतदान के अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह 'सही और गलत' की समझ का पूरी तरह अभाव दर्शाता है। BJP की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आगे क्या होगा
एसआईआर को लेकर राजनीतिक संग्राम अब केवल तेलंगाना तक सीमित नहीं रहा — यह राष्ट्रीय स्वरूप ले चुका है। इंडिया ब्लॉक का दबाव और रामलीला मैदान जैसी बड़ी रैलियाँ संकेत देती हैं कि विपक्ष इस मुद्दे को आगामी चुनावों तक जीवित रखने की रणनीति पर काम कर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चुनाव आयोग (ECI) इन आपत्तियों पर क्या रुख अपनाता है।