संजय टंडन ने अमित शाह से की मुलाकात, चंडीगढ़ में प्रतिशत-आधारित संपत्ति हस्तांतरण की बाधाएं हटाने की माँग
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता संजय टंडन ने मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से उनके आवास पर मुलाकात की और चंडीगढ़ में प्रतिशत-आधारित संपत्ति हस्तांतरण पर लागू पाबंदियों के कारण निवासियों को हो रही परेशानियों से अवगत कराया। टंडन ने शाह से आग्रह किया कि इस मामले में केंद्र स्तर पर उचित हस्तक्षेप किया जाए ताकि आम नागरिकों को प्रशासनिक अड़चनों से राहत मिल सके।
मुद्दे की पृष्ठभूमि
यह विवाद सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले और उसके बाद चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा जारी आदेशों से उत्पन्न हुआ है, जिनके तहत प्रतिशत-आधारित संपत्ति हस्तांतरण पर पाबंदियाँ लगा दी गई थीं। इन आदेशों के लागू होने के बाद से शहर के हजारों निवासी अपनी संपत्तियाँ स्थानांतरित करने में गंभीर कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। गौरतलब है कि चंडीगढ़ एक केंद्रशासित प्रदेश है, इसलिए यहाँ की प्रशासनिक समस्याओं का समाधान सीधे केंद्र सरकार के दायरे में आता है।
टंडन ने उठाई आवाज़
टंडन ने बताया, 'लोगों को अपने काम पूरे कराने के लिए अलग-अलग सरकारी विभागों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जिससे उन्हें बेवजह परेशानी हो रही है।' उन्होंने कहा कि उन्होंने गृह मंत्री को मामले की पूरी जानकारी दी और चंडीगढ़ के निवासियों की दिक्कतें विस्तार से समझाईं। टंडन के अनुसार शाह ने उन्हें आश्वस्त किया कि 'इस मामले में जल्द से जल्द उचित कार्रवाई की जाएगी।'
बैठक का व्यापक संदर्भ
इस मुलाकात में केवल संपत्ति हस्तांतरण का मुद्दा ही नहीं, बल्कि चंडीगढ़ के समग्र विकास और आम जनता से जुड़े अन्य सवालों पर भी चर्चा हुई। टंडन ने इस बैठक को 'सौहार्दपूर्ण और सकारात्मक' बताया। यह ऐसे समय में हुई जब चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव निकट हैं — और टंडन के अनुसार गृह मंत्री शाह ने आगामी चुनावों के लिए शुभकामनाएँ देते हुए उन्हें पूरी लगन से काम जारी रखने की सलाह भी दी।
आम जनता पर असर
प्रतिशत-आधारित संपत्ति हस्तांतरण पर पाबंदी का सीधा असर उन निवासियों पर पड़ रहा है जो अपनी संपत्ति का कुछ हिस्सा परिवार के सदस्यों या अन्य पक्षों को हस्तांतरित करना चाहते हैं। विभिन्न सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने से न केवल समय और धन की बर्बादी हो रही है, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों और सीमित संसाधन वाले परिवारों के लिए यह प्रक्रिया और भी कठिन हो गई है।
आगे क्या होगा
गृह मंत्री अमित शाह के आश्वासन के बाद अब नज़रें केंद्र सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। यह देखना होगा कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के दायरे में रहते हुए चंडीगढ़ प्रशासन को कोई संशोधित दिशानिर्देश जारी किए जाते हैं या नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मुद्दे का स्थायी समाधान न्यायिक और प्रशासनिक — दोनों मोर्चों पर समन्वित प्रयास से ही निकलेगा।