भारत रिन्यूएबल एनर्जी का ग्लोबल हब बनेगा: BRE समिट 2026 में बोले मंत्री प्रह्लाद जोशी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने 3 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित भारत रिन्यूएबल एनर्जी (BRE) समिट एंड एक्सपो 2026 में कहा कि भारत में स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की रफ्तार असाधारण है, और देश आने वाले वर्षों में इस सेक्टर का वैश्विक केंद्र बनकर उभरेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों, प्रोत्साहन और दूरदृष्टि को इस उछाल का मुख्य आधार बताया।
समिट में बढ़ती भागीदारी: क्षेत्र के उत्साह की झलक
जोशी ने समिट में लोगों की भागीदारी को इस क्षेत्र की बढ़ती रुचि का प्रत्यक्ष प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि कुछ वर्ष पहले तक रिन्यूएबल एनर्जी या सोलर एनर्जी से जुड़ी इतनी बड़ी प्रदर्शनी की कल्पना भी कठिन थी। एक्सपो के लिए तीन-तीन और चार-चार बड़े हॉल उपयोग में लाए जा रहे हैं, फिर भी प्रदर्शकों और प्रतिभागियों की मांग इतनी अधिक है कि सभी को स्थान उपलब्ध कराना संभव नहीं हो पा रहा।
310 गीगावाट का आंकड़ा पार, अब 190 GW का अतिरिक्त लक्ष्य
मंत्री ने बताया कि भारत नवीकरणीय ऊर्जा की स्थापित क्षमता के मामले में 310 गीगावाट का आंकड़ा पार कर चुका है। अब देश को अतिरिक्त 190 गीगावाट क्षमता जोड़नी है, और उन्होंने विश्वास जताया कि भारत यह लक्ष्य भी हासिल करेगा। उल्लेखनीय है कि जब देश पहले निर्धारित लक्ष्य के करीब पहुँचा, तो प्रधानमंत्री मोदी ने और आगे बढ़ने का नया लक्ष्य निर्धारित किया।
विस्तार के पीछे तीन बड़े कारण
जोशी ने रिन्यूएबल एनर्जी क्षेत्र के विस्तार के लिए तीन प्रमुख कारण गिनाए — पहला, यह स्वच्छ ऊर्जा का स्रोत है; दूसरा, यह अपेक्षाकृत सस्ती है; और तीसरा, केंद्र सरकार की ओर से मिले नीतिगत प्रोत्साहन ने उद्यमियों और निवेशकों को इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया है। उन्होंने कहा कि जब जन-रुचि बढ़ती है तो इसके साथ कारोबार और मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियाँ भी स्वाभाविक रूप से फलती-फूलती हैं।
आगे की राह: भारत का ग्लोबल हब बनने का दावा
जोशी ने स्वच्छ ऊर्जा की बढ़ती माँग, सरकारी समर्थन और विनिर्माण विस्तार को मिलाकर भारत की मज़बूत स्थिति का चित्र खींचा। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संक्रमण की गति तेज हो रही है और भारत चीन व यूरोपीय देशों के साथ नवीकरणीय ऊर्जा नेतृत्व की दौड़ में शामिल है। विशेषज्ञों के अनुसार, क्षमता के आंकड़े उत्साहजनक हैं, लेकिन ग्रिड एकीकरण और भंडारण अवसंरचना अगली असली परीक्षा होगी।