3 नवंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा के खिलाफ एफआईआर की मांग, मंदिर पुजारियों पर टिप्पणी का मामला

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा के खिलाफ एफआईआर की मांग, मंदिर पुजारियों पर टिप्पणी का मामला

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय की वकील अमिता सचदेवा ने आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा के खिलाफ दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि बोरा के वायरल वीडियो में मंदिर पुजारियों पर यौन अपराधों का सामूहिक आरोप लगाया गया, जो सार्वजनिक शांति के लिए खतरा है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय की वकील अमिता सचदेवा ने 3 नवंबर 2026 को दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा के खिलाफ है, जिन पर मंदिर पुजारियों पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी का आरोप है।
शिकायत में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 196 के तहत कार्रवाई की मांग की गई है।
वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है और कई समाचार माध्यमों ने इसे प्रसारित किया है।
शिकायतकर्ता ने स्पष्ट किया कि यह किसी समुदाय की शिकायत नहीं, बल्कि सार्वजनिक शांति और कानून-व्यवस्था का मामला है।

सर्वोच्च न्यायालय की एक वकील ने 3 नवंबर 2026 को दिल्ली पुलिस से मांग की है कि ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। यह मांग बोरा के उस वीडियो को लेकर की गई है जिसमें उन्होंने कथित तौर पर मंदिरों के पुजारियों को महिलाओं के विरुद्ध यौन अपराधों से जोड़ते हुए टिप्पणी की है।

शिकायत का विवरण

नई दिल्ली के साइबर पुलिस स्टेशन के एसएचओ को दी गई शिकायत में सर्वोच्च न्यायालय की एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड अमिता सचदेवा ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 196 और अन्य लागू प्रावधानों के तहत कार्रवाई की माँग की है। उनका तर्क है कि इन बयानों से विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी बढ़ सकती है और सार्वजनिक शांति भंग हो सकती है।

शिकायत के अनुसार, सोशल मीडिया पर बोरा का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसे कई समाचार माध्यमों ने भी प्रसारित किया है। इस वीडियो में बोरा को कथित तौर पर यह कहते सुना जा सकता है: 'ब्राह्मण महिलाएं सड़कों पर चलते हुए भी सुरक्षित नहीं हैं। उनके साथ बलात्कार होता है। मंदिरों में पुजारी भी बलात्कार करते हैं। उन्नाव और कठुआ में हम ऐसी घटनाएं देख चुके हैं।' वीडियो में एक टेक्स्ट भी अंकित है जिसमें लिखा है, 'पुजारी मंदिरों के अंदर महिलाओं का बलात्कार करते हैं।'

शिकायतकर्ता का तर्क

सचदेवा ने अपनी शिकायत में स्पष्ट किया है कि यौन अपराध आपराधिक कृत्य हैं और ऐसी घटनाओं में कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि, उनका कहना है कि किसी पूरे वर्ग पर सार्वजनिक रूप से इस प्रकार का आरोप लगाना और उसे बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से फैलाना, नागरिकों के अलग-अलग समूहों के बीच 'अशांति, दुश्मनी, नफरत या द्वेष' पैदा कर सकता है।

शिकायत में यह भी उल्लेख है कि इन बयानों के बड़े पैमाने पर ऑनलाइन प्रसार के बाद लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएँ भी सामने आई हैं। वकील ने स्पष्ट किया कि यह मामला सार्वजनिक शांति और कानून-व्यवस्था से जुड़ा है, न कि किसी विशेष समुदाय की ओर से या उनकी किसी शिकायत के रूप में।

जाँच की माँग

सचदेवा ने दिल्ली पुलिस से माँग की है कि नेहा बोरा और जाँच के दौरान सामने आने वाले अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। उन्होंने इन बयानों के पीछे के इरादे, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, उनके प्रसार और सार्वजनिक व्यवस्था पर पड़े कथित असर की गहन जाँच की भी माँग की है।

व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब सोशल मीडिया पर धार्मिक-सामाजिक मसलों पर की गई टिप्पणियों के खिलाफ कानूनी शिकायतें दर्ज करने का चलन तेज़ हुआ है। गौरतलब है कि बीएनएस की धारा 196 का संबंध विभिन्न वर्गों के बीच वैमनस्य फैलाने से है, जो पहले भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153ए के तहत आता था। फिलहाल यह शिकायत के स्तर पर है और दिल्ली पुलिस की ओर से किसी प्रतिक्रिया की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई दिल्ली पुलिस के रुख पर निर्भर करेगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेहा बोरा के खिलाफ एफआईआर की मांग क्यों की गई है?
सर्वोच्च न्यायालय की वकील अमिता सचदेवा ने आरोप लगाया है कि आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा के वायरल वीडियो में मंदिर पुजारियों पर यौन अपराधों का सामूहिक आरोप लगाया गया, जो विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी और सार्वजनिक अशांति फैला सकता है। शिकायत में बीएनएस 2023 की धारा 196 के तहत कार्रवाई की माँग की गई है।
आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा ने क्या कहा था?
वायरल वीडियो में बोरा को कथित तौर पर यह कहते सुना जा सकता है कि मंदिरों में पुजारी भी बलात्कार करते हैं और उन्होंने उन्नाव व कठुआ की घटनाओं का संदर्भ दिया। वीडियो में एक टेक्स्ट भी अंकित है जिसमें पुजारियों पर सीधा आरोप लगाया गया है।
बीएनएस की धारा 196 क्या है?
भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 196 विभिन्न वर्गों, समुदायों या समूहों के बीच वैमनस्य, दुश्मनी या नफरत फैलाने से संबंधित है। यह पूर्ववर्ती भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153ए के स्थान पर आई है।
शिकायत किसने और कहाँ दर्ज की?
सर्वोच्च न्यायालय की एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड अमिता सचदेवा ने नई दिल्ली जिले के साइबर पुलिस स्टेशन के एसएचओ को शिकायत सौंपी है। उन्होंने बोरा और जाँच में सामने आने वाले अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर और गहन जाँच की माँग की है।
अब इस मामले में आगे क्या होगा?
फिलहाल यह शिकायत के स्तर पर है; दिल्ली पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पुलिस शिकायत की जाँच कर एफआईआर दर्ज करने या न करने का निर्णय लेगी, और यदि पुलिस कार्रवाई नहीं करती तो शिकायतकर्ता मजिस्ट्रेट के समक्ष जा सकती हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 7 घंटे पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 1 सप्ताह पहले
  5. 2 सप्ताह पहले
  6. 2 सप्ताह पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले