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आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा एसईएम कोर्ट पहुंचीं, दिल्ली पुलिस ने नोटिस के दस्तावेज सौंपे; 28 अक्टूबर को अगली सुनवाई

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आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा एसईएम कोर्ट पहुंचीं, दिल्ली पुलिस ने नोटिस के दस्तावेज सौंपे; 28 अक्टूबर को अगली सुनवाई

सारांश

आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा 24 अक्टूबर को एसईएम कोर्ट पहुंचीं, जहाँ दिल्ली पुलिस ने शांति भंग नोटिस के दस्तावेज सौंपे। 16 अक्टूबर के 'तिरंगा असेंबली' प्रदर्शन और हिरासत से उपजे इस मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय याचिका खारिज कर चुका है। अब 28 अक्टूबर को अगली सुनवाई में बोरा को जवाब दाखिल करना होगा।

मुख्य बातें

आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा 24 अक्टूबर को मंदिर मार्ग स्थित एसईएम कोर्ट में पेश हुईं।
दिल्ली पुलिस ने सुनवाई के दौरान शांति भंग नोटिस से जुड़े दस्तावेजों की प्रतियाँ नेहा बोरा को सौंपीं।
मामला 16 अक्टूबर के 'तिरंगा असेंबली' प्रदर्शन से जुड़ा है, जिसे एनडीएमसी की अनुमति नहीं मिली थी।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 23 अक्टूबर को नेहा बोरा की याचिका खारिज की, लेकिन दस्तावेज देने और सावधानीपूर्वक विचार का निर्देश दिया।
एसईएम ने ₹10,000 के निजी बॉन्ड और एक जमानतदार के साथ शांति बनाए रखने की कार्रवाई बीएनएसएस के तहत शुरू की है।
अगली सुनवाई और नेहा बोरा का जवाब दाखिल करने की तारीख 28 अक्टूबर निर्धारित है।

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा शनिवार, 24 अक्टूबर को मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन से संबद्ध स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (एसईएम) कोर्ट में पेश हुईं, जहाँ दिल्ली पुलिस ने उन्हें उन दस्तावेजों की प्रतियाँ सौंपीं जिनके आधार पर शांति भंग की आशंका में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को निर्धारित है, और उसी दिन नेहा बोरा को अपना औपचारिक जवाब भी दाखिल करना होगा।

मामले की पृष्ठभूमि

यह पूरा विवाद 16 अक्टूबर को नई दिल्ली में प्रस्तावित 'तिरंगा असेंबली' प्रदर्शन से उपजा है। उस दिन नई दिल्ली नगर परिषद (एनडीएमसी) से अनुमति न मिलने के बावजूद प्रदर्शन की कोशिश के दौरान दिल्ली पुलिस ने नेहा बोरा सहित कई लोगों को हिरासत में लिया था। सुरक्षा व्यवस्था उस दिन विशेष रूप से कड़ी की गई थी।

इसके अगले दिन, 17 अक्टूबर को, एसईएम ने नेहा बोरा को नोटिस जारी कर ₹10,000 के निजी बॉन्ड और एक जमानतदार के साथ शांति बनाए रखने की कार्रवाई शुरू की। यह कार्रवाई भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के प्रावधानों के तहत की गई।

दिल्ली उच्च न्यायालय का हस्तक्षेप

नेहा बोरा ने एसईएम के नोटिस को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। हालाँकि, 23 अक्टूबर को उच्च न्यायालय ने उनकी याचिका खारिज कर दी। साथ ही अदालत ने दो महत्त्वपूर्ण निर्देश दिए — पहला, कार्यवाही में आधार बने दस्तावेज नेहा बोरा को उपलब्ध कराए जाएँ; और दूसरा, एसईएम कोई भी अंतिम आदेश पारित करने से पहले सभी तथ्यों और सामग्री पर सावधानीपूर्वक विचार करे।

गौरतलब है कि उच्च न्यायालय के इन्हीं निर्देशों के अनुपालन में 24 अक्टूबर की सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने नेहा बोरा को दस्तावेजों की प्रतियाँ सौंपीं।

सुनवाई में क्या हुआ

एसईएम कोर्ट ने पहले नेहा बोरा को नोटिस जारी कर पूछा था कि उन्हें शांति बनाए रखने के लिए व्यक्तिगत बॉन्ड भरने का निर्देश क्यों न दिया जाए। 24 अक्टूबर की सुनवाई में नोटिस से संबंधित दस्तावेज अदालत में प्रस्तुत किए गए और नेहा बोरा को उनकी प्रतियाँ दी गईं।

यह ऐसे समय में आया है जब छात्र संगठनों और पुलिस के बीच प्रदर्शन की अनुमति और सार्वजनिक व्यवस्था को लेकर तनाव की घटनाएँ बार-बार सामने आ रही हैं।

आगे क्या होगा

मामले की अगली और निर्णायक सुनवाई 28 अक्टूबर को एसईएम कोर्ट में होगी। उसी दिन नेहा बोरा को कारण बताओ नोटिस का औपचारिक लिखित जवाब भी दाखिल करना है। उच्च न्यायालय के निर्देश के मद्देनज़र एसईएम को अंतिम आदेश से पहले समस्त सामग्री की विधिवत समीक्षा करनी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसका उपयोग आलोचकों के अनुसार असहमति की आवाज़ों को दबाने के लिए होता रहा है। दिल्ली उच्च न्यायालय का याचिका खारिज करना लेकिन साथ ही दस्तावेज उपलब्ध कराने और सावधानीपूर्वक विचार का निर्देश देना — यह संकेत देता है कि अदालत प्रक्रियागत निष्पक्षता को लेकर सजग है। असली सवाल यह है कि क्या एनडीएमसी की अनुमति न मिलना और हिरासत, शांति भंग की 'आशंका' के लिए पर्याप्त आधार है — यह 28 अक्टूबर की सुनवाई तय करेगी।
RashtraPress
24 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेहा बोरा को एसईएम कोर्ट से नोटिस क्यों मिला?
नेहा बोरा को 16 अक्टूबर के 'तिरंगा असेंबली' प्रदर्शन के बाद शांति भंग की आशंका के आधार पर एसईएम कोर्ट ने नोटिस जारी किया। यह कार्रवाई भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के प्रावधानों के तहत शुरू की गई और उन्हें ₹10,000 के निजी बॉन्ड और एक जमानतदार के साथ शांति बनाए रखने का निर्देश देने पर विचार हो रहा है।
'तिरंगा असेंबली' प्रदर्शन क्या था और इसे क्यों रोका गया?
'तिरंगा असेंबली' 16 अक्टूबर को नई दिल्ली में प्रस्तावित एक प्रदर्शन था। इसे नई दिल्ली नगर परिषद (एनडीएमसी) से अनुमति नहीं मिली थी, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच नेहा बोरा सहित कई लोगों को हिरासत में लिया।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने नेहा बोरा की याचिका पर क्या फैसला दिया?
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 23 अक्टूबर को नेहा बोरा की याचिका खारिज कर दी। हालाँकि, अदालत ने निर्देश दिया कि कार्यवाही में आधार बने दस्तावेज उन्हें उपलब्ध कराए जाएँ और एसईएम कोई अंतिम आदेश पारित करने से पहले सभी तथ्यों पर सावधानीपूर्वक विचार करे।
इस मामले में अगली सुनवाई कब होगी और क्या होगा?
मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को एसईएम कोर्ट में निर्धारित है। उसी दिन नेहा बोरा को कारण बताओ नोटिस का औपचारिक लिखित जवाब भी दाखिल करना होगा।
बीएनएसएस के तहत शांति बॉन्ड की कार्रवाई क्या होती है?
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के प्रावधानों के तहत यदि किसी व्यक्ति से शांति भंग की आशंका हो, तो मजिस्ट्रेट उसे निर्धारित राशि का निजी बॉन्ड और जमानतदार के साथ शांति बनाए रखने का निर्देश दे सकता है। इस मामले में नेहा बोरा के लिए ₹10,000 का निजी बॉन्ड और एक जमानतदार का प्रस्ताव है।
राष्ट्र प्रेस
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