संगीत सोम का बड़ा आरोप: मुजफ्फरनगर दंगों में अखिलेश यादव ने हत्या करवाने की कोशिश की
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता संगीत सोम ने 24 अक्टूबर 2026 को गाजियाबाद में एक संवाददाता वार्ता के दौरान समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर गंभीर आरोप लगाए। सोम ने कथित तौर पर दावा किया कि मुजफ्फरनगर दंगों के दौरान उनकी हत्या कराने की साजिश रची गई थी और इसके लिए वे सीधे तौर पर अखिलेश यादव को जिम्मेदार मानते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें यह बात कहने में कोई संकोच नहीं है।
मुख्य आरोप और घटनाक्रम
संगीत सोम के अनुसार, मुजफ्फरनगर दंगों के समय समाजवादी पार्टी और उसके कार्यकर्ताओं ने इलाके में भय का वातावरण बना रखा था। उस दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया और उनके खिलाफ कथित तौर पर झूठे मामले दर्ज किए गए। सोम ने बताया कि पहले उन्हें मुजफ्फरनगर जेल ले जाया गया, परंतु केवल दो घंटे के भीतर वहाँ से हटाकर पूरी रात जंगलों में घुमाया गया।
उन्होंने कहा कि उस दौरान तैनात पुलिस अधिकारियों ने जो बातें बताईं, वे कैमरे के सामने दोहराने योग्य नहीं थीं। हालाँकि, सोम के अनुसार, पुलिसकर्मियों ने स्वीकार किया था कि वे ऊपर से मिले आदेशों का पालन कर रहे हैं।
जेल खाली कराने का सवाल
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि जब उन्हें कई किलोमीटर दूर एक अन्य जेल में स्थानांतरित किया गया, तो वहाँ की पूरी जेल खाली करा दी गई थी — एक भी कैदी मौजूद नहीं था। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी क्या परिस्थिति थी कि केवल एक बैरक नहीं, बल्कि पूरी जेल खाली कराई गई। सोम ने दावा किया कि जेल अधिकारियों ने उन्हें बताया था कि उनकी जान को खतरा है और उनकी हत्या कराई जा सकती है।
वाल्मीकि समुदाय का हस्तक्षेप और महापंचायत
संगीत सोम ने बताया कि जैसे ही उन्होंने अपने समर्थकों तक संदेश पहुँचाया, वाल्मीकि समुदाय के लोगों ने तत्काल पंचायत बुलाकर जेल को घेर लिया। इसके बाद खेड़ा में एक महापंचायत आयोजित की गई। उनके अनुसार, इस महापंचायत में प्रशासन और पुलिस ने लोगों पर गोलियाँ चलाईं, जिसमें कई लोग घायल हुए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कर उनके ऑपरेशन करने पड़े। सोम ने कहा कि उस समय मीडिया भी मौके पर मौजूद थी।
राजनीतिक संदर्भ और प्रतिक्रिया
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में राजनीतिक माहौल गर्म है और मुजफ्फरनगर दंगे एक बार फिर बहस के केंद्र में हैं। गौरतलब है कि मुजफ्फरनगर दंगे 2013 में भड़के थे, जब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी। उस दौरान सैकड़ों लोगों की जान गई और हजारों विस्थापित हुए थे। संगीत सोम उन नेताओं में शामिल हैं जिन पर उस वक्त दंगों को भड़काने के आरोप लगे थे। अखिलेश यादव की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं थी।
आगे क्या
संगीत सोम के ये आरोप उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ सकते हैं, खासकर ऐसे समय में जब 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुजफ्फरनगर दंगों का मुद्दा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अभी भी चुनावी प्रासंगिकता रखता है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है और इन्हें संगीत सोम के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।