अंकित हत्याकांड एनकाउंटर पर सपा के सवाल, संगीत सोम का पलटवार — 'अखिलेश हैं अपराधियों के गॉडफादर'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा गायक अंकित बालियान हत्याकांड के दो शूटरों का एनकाउंटर किए जाने के बाद राजनीतिक घमासान तेज़ हो गया है। 31 अगस्त को पीड़ित परिजनों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली की सराहना की, जबकि समाजवादी पार्टी (सपा) ने एनकाउंटर की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। इसके जवाब में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने सपा पर तीखा पलटवार किया।
संगीत सोम का सपा पर हमला
भाजपा नेता संगीत सोम ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि 'अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश में अपराधियों के गॉडफादर हैं। वे किसी भी कीमत पर अपराधियों का साथ नहीं छोड़ना चाहते।' उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश एक समय मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद, मुश्ताक और अन्य अपराधियों के साथ खड़े थे और अब फिर उसी रास्ते पर लौट आए हैं।
सोम ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि 'इसीलिए मैं कहता हूँ कि PDA का मतलब है — पापी, डकैत और अपराधी।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अखिलेश यादव ने सनातन का अपमान किया है, और मुख्यमंत्री योगी का AI वीडियो में जिस तरह चित्रण किया गया, उससे सनातनी समाज आहत हुआ है। सोम ने चेतावनी दी कि इसका जवाब आगामी चुनाव में मिलेगा।
विधायक नंद किशोर गुर्जर की प्रतिक्रिया
लोनी के भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर ने अंकित बालियान की हत्या को दुखद बताया और कहा कि इस घटना ने पूरे प्रदेश और देश को शोक में डुबो दिया था। उन्होंने विपक्षी नेताओं की एनकाउंटर पर सवाल उठाने की प्रवृत्ति की आलोचना करते हुए कहा कि 'कुछ नेता पहले भी माफिया और अपराधियों के मारे जाने पर दुख जताते रहे हैं।'
गुर्जर ने यह भी कहा कि कई ज्योतिषियों ने उन्हें बताया है कि अखिलेश यादव पर 'राहु की दशा' का असर है और यदि वे इसे ठीक करने के उपाय नहीं करते, तो वे ऐसे ही बयान देते रहेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि योगी सरकार का संदेश साफ़ है — उत्तर प्रदेश में अपराध करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
भाजपा नेता राजेश चौधरी का बयान
भाजपा नेता राजेश चौधरी ने कहा कि प्रदेश सरकार निष्पक्षता के साथ काम कर रही है और 'अपराधी की कोई जाति नहीं होती।' उन्होंने आरोप लगाया कि जाति देखकर कार्रवाई करना समाजवादी पार्टी का पुराना इतिहास रहा है। चौधरी ने कहा कि कानून अपना काम कर रहा है और अपराध के खिलाफ कार्रवाई में किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए।
सपा के सवाल और राजनीतिक संदर्भ
समाजवादी पार्टी ने एनकाउंटर की परिस्थितियों पर सवाल उठाए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ तेज़ हो रही हैं और कानून-व्यवस्था दोनों प्रमुख दलों के लिए एक केंद्रीय चुनावी मुद्दा बन चुकी है। गौरतलब है कि योगी सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश पुलिस के एनकाउंटर पहले भी विपक्ष और मानवाधिकार संगठनों की आलोचना का विषय रहे हैं।
आगे क्या होगा
अंकित बालियान हत्याकांड में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी और जाँच की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का यह दौर आने वाले दिनों में और तेज़ होने की संभावना है, क्योंकि दोनों दल इस मुद्दे को जनता के बीच अपने-अपने नज़रिए से पेश करने में जुटे हैं।