अंकित बालियान हत्याकांड: एनकाउंटर पर अखिलेश के सवाल, भाजपा के चार नेताओं ने किया पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा अंकित बालियान हत्याकांड के शूटरों के पुलिस एनकाउंटर पर उठाए गए सवालों के जवाब में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के चार वरिष्ठ नेताओं ने 31 अगस्त को तीखी प्रतिक्रिया दी। उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्रियों समेत प्रदेश अध्यक्ष और उपाध्यक्ष ने एक स्वर में पुलिस और एसटीएफ की कार्रवाई को उचित ठहराया और विपक्ष पर अपराधियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया।
मुख्य घटनाक्रम
अंकित बालियान हत्याकांड में पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने कथित तौर पर मात्र तीन दिन के भीतर आरोपी शूटरों को मुठभेड़ में मार गिराया। इसी कार्रवाई की वैधता पर अखिलेश यादव ने सार्वजनिक रूप से सवाल खड़े किए, जिसके बाद भाजपा नेताओं ने मोर्चा संभाला।
सरकार की प्रतिक्रिया
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में कानून का राज कायम है और जो भी व्यक्ति कानून अपने हाथ में लेगा, उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) की पिछली सरकार पर आरोप लगाया कि उस दौर में अपराधियों के हौसले बुलंद थे और पुलिस अधिकारियों के साथ भी दुर्व्यवहार की घटनाएँ सामने आती थीं।
मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने दावा किया कि अखिलेश यादव के सवालों का जवाब पुलिस कार्रवाई के रूप में मिल चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सपा सरकार में अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था, जबकि वर्तमान योगी सरकार में ऐसे तत्वों को बख्शा नहीं जाएगा।
भाजपा संगठन का रुख
भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष नीरज सिंह ने कहा कि अखिलेश यादव लगातार पुलिस कार्रवाई के विरुद्ध एक भ्रामक नैरेटिव गढ़ने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने दोहराया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि कानून-व्यवस्था से किसी प्रकार का समझौता नहीं होगा और सरकार की नीति अपराध व माफिया के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कहा कि विपक्ष और अखिलेश यादव को अब किसी भी संस्था पर भरोसा नहीं रह गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एसटीएफ कोई नई संस्था नहीं है और वर्षों से कार्यरत है। एसआईआर (SIR) को लेकर अखिलेश यादव के बदलते रुख पर कटाक्ष करते हुए चौधरी ने कहा कि सपा प्रमुख को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वे आखिर किस पक्ष में हैं।
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था का मुद्दा राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील बना हुआ है। एनकाउंटर की वैधता और पारदर्शिता को लेकर विपक्षी दलों की आपत्तियाँ राज्य की कानून-व्यवस्था बहस को नई दिशा दे रही हैं। गौरतलब है कि योगी सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश पुलिस एनकाउंटर की संख्या को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं।
क्या होगा आगे
अंकित बालियान हत्याकांड की जाँच जारी है और एनकाउंटर की परिस्थितियों की स्वतंत्र समीक्षा की माँग विपक्ष की ओर से उठाई जा रही है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का यह दौर आगामी दिनों में और तेज होने की संभावना है, विशेषकर जब मामले की न्यायिक या विभागीय जाँच की बात आएगी।