फर्जी एनकाउंटर विवाद: BJP का अखिलेश पर पलटवार — केशव मौर्य बोले, अपराधियों पर बिना भेदभाव कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और कैबिनेट मंत्री असीम अरुण ने 26 मई 2026 को समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें उन्होंने योगी सरकार पर फर्जी एनकाउंटर कराने का आरोप लगाया था। भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेताओं का कहना है कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था पूरी तरह मजबूत है और पुलिस की कार्रवाई में धर्म, जाति या समुदाय के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाता।
केशव मौर्य का जवाब: तुष्टीकरण की राजनीति खत्म
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति अब समाप्ति की ओर है और इसी कारण अखिलेश यादव इस तरह के बयान दे रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूपी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ रखना है। मौर्य के अनुसार, जिन लोगों के एनकाउंटर हो रहे हैं वे सभी अपराधी हैं और कार्रवाई पूरी तरह निष्पक्ष है — 'अपराधी चाहे किसी भी वर्ग का हो, सरकार उसके खिलाफ सख्ती से कार्रवाई कर रही है।'
असीम अरुण का तर्क: पुलिस आत्मरक्षा में कार्रवाई करती है
मंत्री असीम अरुण ने कहा कि योगी सरकार के पिछले नौ वर्षों में कानून-व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार आया है, जिसका मुख्य कारण पुलिस का बढ़ा हुआ मनोबल है। उन्होंने कहा कि कोई भी पुलिसकर्मी घर से एनकाउंटर की मंशा लेकर नहीं निकलता, किंतु जब अपराधी पुलिस पर गोली चलाते हैं तो जवाबी कार्रवाई अनिवार्य हो जाती है। अरुण ने यह भी कहा कि कानून पुलिस को आत्मरक्षा में उचित बल प्रयोग का अधिकार देता है।
पहले की तुलना में बदलाव का दावा
असीम अरुण के अनुसार, पहले ऐसे अपराधियों की संख्या काफी अधिक थी जो पुलिस पर हमला करने से भी नहीं डरते थे, लेकिन अब ऐसे मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है। उन्होंने दावा किया कि योगी सरकार की सख्ती की बदौलत प्रदेश में कानून-व्यवस्था बेहतर हुई है और विकास के रास्ते खुले हैं। उनके अनुसार समाजवादी पार्टी को यही बात पसंद नहीं आ रही, इसलिए वह लगातार सरकार पर सवाल उठा रही है।
अखिलेश यादव के मूल आरोप
गौरतलब है कि अखिलेश यादव ने मंगलवार को योगी सरकार पर फर्जी एनकाउंटर कराने का आरोप लगाते हुए कहा था कि प्रदेश में डर और वर्चस्व की राजनीति हो रही है और पीडीए (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) वर्ग को निशाना बनाया जा रहा है। अखिलेश के अनुसार, 'सरकार की मर्जी से होने वाला हर एनकाउंटर संदेह के घेरे में है।' उन्होंने यह भी कहा कि पहले समाज में भाईचारा था, लेकिन अब नफरत और भय का माहौल बनाया जा रहा है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावी तैयारियों के बीच सत्तारूढ़ BJP और विपक्षी सपा के बीच कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर टकराव तेज हो रहा है। एनकाउंटर की राजनीति यूपी में लंबे समय से विमर्श का केंद्र रही है — आलोचकों का कहना है कि न्यायेतर कार्रवाइयों की स्वतंत्र न्यायिक समीक्षा होनी चाहिए, जबकि सरकार इन्हें वैध पुलिस कार्रवाई बताती है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा से लेकर सड़क तक और तेज होने की संभावना है।