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सावन में काशी विश्वनाथ मंदिर में वीआईपी दर्शन बंद, संत समाज बोला — 'भगवान के दरबार में सब समान'

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सावन में काशी विश्वनाथ मंदिर में वीआईपी दर्शन बंद, संत समाज बोला — 'भगवान के दरबार में सब समान'

सारांश

सावन में काशी विश्वनाथ मंदिर ने वीआईपी दर्शन पर रोक लगाई — और संत समाज ने इसे धर्म की भावना के अनुरूप बताया। अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी का कहना है कि भगवान के दरबार में अमीर-गरीब का भेद नहीं चलता। यह फैसला मंदिर प्रबंधन की दिशा में एक बड़े बदलाव का संकेत है।

मुख्य बातें

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में सावन माह के दौरान वीआईपी दर्शन व्यवस्था पर रोक लगाई गई है।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि पूरा साधु समाज इसके समर्थन में है।
वृद्ध, वरिष्ठ नागरिक या विशेष आवश्यकता वाले श्रद्धालुओं के लिए अलग व्यवस्था संभव, परंतु शुल्क लेना अनुचित — महंत रवींद्र पुरी।
हरिद्वार के प्रमुख मंदिरों में टिकट-आधारित दर्शन व्यवस्था नहीं; श्रद्धालु स्वेच्छा से दान देते हैं।
महंत रवींद्र पुरी ने सुझाया कि सरकार चाहे तो सभी मंदिरों के लिए एकसमान अधिसूचना जारी कर सकती है।

सावन माह के दौरान श्री काशी विश्वनाथ मंदिर, वाराणसी में वीआईपी दर्शन व्यवस्था पर रोक लगाने के फैसले का संत समाज ने खुलकर स्वागत किया है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि ईश्वर के दरबार में सभी श्रद्धालु एक समान हैं और किसी भी भक्त के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। यह निर्णय उस समय आया है जब श्रावण मास में लाखों कांवड़ियों और श्रद्धालुओं की भीड़ प्रमुख धार्मिक स्थलों पर उमड़ती है।

संत समाज की प्रतिक्रिया

महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि पूरा साधु समाज इस फैसले के साथ खड़ा है। उनके अनुसार, 'ईश्वर के घर में सभी के लिए एक समान व्यवस्था होनी चाहिए।' हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अपरिहार्य परिस्थितियों में — जैसे वृद्ध महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों या विशेष आवश्यकता वाले व्यक्तियों के लिए — मंदिर प्रबंधन अलग व्यवस्था कर सकता है, परंतु ऐसी सुविधा के लिए किसी प्रकार का शुल्क लेना उचित नहीं होगा।

टिकट आधारित दर्शन पर रुख

महंत रवींद्र पुरी ने बताया कि दक्षिण भारत के अनेक मंदिरों में टिकट-आधारित दर्शन व्यवस्था पहले से लागू है, और अब राम मंदिर, अयोध्या तथा काशी विश्वनाथ मंदिर जैसे उत्तर भारत के प्रमुख मंदिरों में भी इसी प्रकार की व्यवस्था देखने को मिल रही है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि हरिद्वार के प्रमुख मंदिरों में ऐसी कोई टिकट प्रणाली नहीं है — वहाँ श्रद्धालु अपनी इच्छा से दान देते हैं और किसी पर कोई शुल्क नहीं थोपा जाता।

सरकारी व निजी मंदिरों में अंतर

अन्य मंदिरों में समान दर्शन व्यवस्था लागू करने के सवाल पर महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि यदि सरकार चाहे, तो सभी मंदिरों के लिए एकसमान अधिसूचना जारी कर सकती है। उन्होंने बताया कि देश के अनेक बड़े मंदिर सरकारी प्रबंधन के अधीन हैं, जबकि साधु-संतों या धार्मिक संस्थाओं द्वारा संचालित मंदिरों में सामान्यतः दर्शन के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता।

श्रद्धालुओं की सुविधाएं और आगे की राह

महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि वीआईपी दर्शन के नाम पर आम श्रद्धालुओं का रास्ता रोकना या मंदिर के द्वार बंद करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। यदि किसी विशेष अतिथि के दर्शन अनिवार्य हों, तो प्रबंधन को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जिससे आम भक्तों की पूजा-अर्चना बाधित न हो। उन्होंने हरिद्वार के दक्ष मंदिर का उदाहरण देते हुए बताया कि वहाँ सामान्य और विशेष अतिथि — दोनों को बिना भेदभाव के दर्शन कराए जाते हैं। श्रावण मास और कांवड़ यात्रा के दौरान जलपान, चिकित्सा सहायता और सुचारु दर्शन जैसी सुविधाएं विशेष रूप से सुनिश्चित की जाती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्रियान्वयन कितना सुसंगत होगा — क्योंकि अतीत में ऐसे आदेश भी वीआईपी दबाव में शिथिल पड़ते देखे गए हैं। महंत रवींद्र पुरी का यह सुझाव कि सरकार सभी मंदिरों के लिए एकसमान अधिसूचना जारी करे, व्यापक नीतिगत सुधार की माँग को रेखांकित करता है। दक्षिण और उत्तर भारत के मंदिरों में दर्शन व्यवस्था की असमानता यह भी दर्शाती है कि धार्मिक पर्यटन और आस्था के बीच संतुलन अभी अधूरा है। जब तक स्वतंत्र निगरानी तंत्र नहीं बनता, 'समान दर्शन' की घोषणाएं केवल सावन तक सीमित रह सकती हैं।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

काशी विश्वनाथ मंदिर में सावन के दौरान वीआईपी दर्शन पर रोक क्यों लगाई गई?
सावन माह में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रबंधन ने वीआईपी दर्शन व्यवस्था पर रोक लगाई, ताकि हर भक्त को समान अवसर मिले। अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी के अनुसार, भगवान के दरबार में किसी के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने इस फैसले पर क्या कहा?
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने इस निर्णय का पूर्ण समर्थन किया और कहा कि पूरा साधु समाज इसके पक्ष में है। उन्होंने कहा कि ईश्वर के घर में सभी के लिए एकसमान व्यवस्था होनी चाहिए।
क्या वृद्ध या दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए कोई विशेष व्यवस्था होगी?
महंत रवींद्र पुरी के अनुसार, वृद्ध महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों या विशेष आवश्यकता वाले व्यक्तियों के लिए मंदिर प्रबंधन अलग व्यवस्था कर सकता है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी सुविधा के लिए किसी प्रकार का शुल्क लेना उचित नहीं है।
क्या अन्य मंदिरों में भी समान दर्शन व्यवस्था लागू होगी?
महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि यदि सरकार चाहे तो सभी मंदिरों के लिए एकसमान अधिसूचना जारी कर सकती है। उन्होंने बताया कि साधु-संतों द्वारा संचालित मंदिरों में पहले से ही दर्शन के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता।
हरिद्वार के मंदिरों में दर्शन व्यवस्था कैसी है?
हरिद्वार के प्रमुख मंदिरों में टिकट-आधारित दर्शन व्यवस्था नहीं है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार स्वेच्छा से दान देते हैं और किसी पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाता। दक्ष मंदिर सहित कई स्थानों पर सामान्य और विशेष अतिथि — दोनों को बिना भेदभाव के दर्शन कराए जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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