कनॉट प्लेस निषेधाज्ञा उल्लंघन: दिल्ली पुलिस ने दर्ज की कई एफआईआर, BNSS धारा 163 के तहत कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 17 अक्टूबर 2026 — दिल्ली पुलिस ने कनॉट प्लेस और नई दिल्ली के अन्य क्षेत्रों में लागू निषेधाज्ञा आदेशों के कथित उल्लंघन पर कई प्राथमिकियाँ (एफआईआर) दर्ज की हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, बार-बार घोषणाओं के बावजूद कनॉट प्लेस के आसपास भीड़ जमा हो गई, जिसके बाद भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के अंतर्गत मामले दर्ज किए जा रहे हैं।
मुख्य घटनाक्रम
यह कार्रवाई शुक्रवार, 17 अक्टूबर को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क के बाहर प्रदर्शनकारियों द्वारा तिरंगा रैली निकाले जाने के बाद हुई। आम आदमी पार्टी (AAP) के कार्यकर्ता और समर्थक चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर चुनाव आयोग (ECI) के विरुद्ध अपना विरोध दर्ज कराने के उद्देश्य से एकत्र हुए थे।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने लोगों से 16 अक्टूबर को 'लहरा दो तिरंगा' रैली के अंतर्गत सेंट्रल पार्क में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए एकत्र होने का आह्वान किया था। अधिकारियों के अनुसार, इसी आह्वान के बाद बड़ी संख्या में लोग जमा हुए और निषेधाज्ञा का उल्लंघन हुआ।
हिरासत और रिहाई
शुक्रवार शाम को हिरासत में ली गईं अखिल भारतीय छात्र संघ (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद आर.के. पुरम थाने से रिहा कर दिया गया।
रिहाई के बाद नेहा बोरा ने पत्रकारों से कहा, 'अभिजीत को रिहा किया जाना चाहिए, मुझे तो पता ही नहीं था कि उन्हें हिरासत में लिया गया है। उन्हें और बाकी सभी प्रदर्शनकारियों को रिहा किया जाना चाहिए जिन्हें कथित तौर पर अवैध रूप से हिरासत में लिया गया है। वे आम नागरिक हैं जो जवाबदेही और अपने मताधिकार की माँग कर रहे हैं।'
विरोध प्रदर्शन का संदर्भ
बोरा ने आगे कहा कि इस देश में लंबे समय से लोगों को बिना पर्याप्त कारण के हिरासत में लिया जाता रहा है और यह प्रवृत्ति अब और भी स्पष्ट हो गई है। उन्होंने कहा, 'प्रदर्शनकारियों को पकड़ा जाता है, हिरासत में लिया जाता है और अगली सुबह या शाम को रिहा किया जाता है — इस तरह की हिरासतों का मकसद आम नागरिकों में भय फैलाना है।' गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों पर अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
पुलिस का रुख
पुलिस सूत्रों के अनुसार, बार-बार नियम तोड़ने वालों के विरुद्ध बीएनएसएस धारा 163 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि निषेधाज्ञा आदेश कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत जारी किए गए थे और उनका पालन अनिवार्य था। प्रभावित क्षेत्रों में तैनात सुरक्षाबलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए घोषणाएँ कीं, लेकिन लोगों के एकत्र होते रहने पर कार्रवाई की गई।
आगे क्या
दर्ज एफआईआर में आरोपियों की पहचान और पूछताछ की प्रक्रिया जारी है। अभिजीत दिपके की हिरासत की स्थिति को लेकर विरोध प्रदर्शनकारियों में असंतोष बना हुआ है। यह मामला राजनीतिक विरोध, नागरिक स्वतंत्रता और कानूनी प्रावधानों के संतुलन पर आने वाले दिनों में बहस का केंद्र बनने की संभावना है।