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कनॉट प्लेस निषेधाज्ञा उल्लंघन: दिल्ली पुलिस ने दर्ज की कई एफआईआर, BNSS धारा 163 के तहत कार्रवाई

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कनॉट प्लेस निषेधाज्ञा उल्लंघन: दिल्ली पुलिस ने दर्ज की कई एफआईआर, BNSS धारा 163 के तहत कार्रवाई

सारांश

कनॉट प्लेस में तिरंगा रैली और चुनाव आयोग विरोध प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस ने BNSS धारा 163 के तहत कई एफआईआर दर्ज कीं। AISA प्रमुख नेहा बोरा रिहा, CJP संस्थापक अभिजीत दिपके की हिरासत पर विवाद।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस ने 17 अक्टूबर 2026 को कनॉट प्लेस और नई दिल्ली के अन्य हिस्सों में निषेधाज्ञा उल्लंघन पर कई एफआईआर दर्ज कीं।
मामले भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत दर्ज किए जा रहे हैं; बार-बार नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई का ऐलान।
CJP संस्थापक अभिजीत दिपके के आह्वान पर सेंट्रल पार्क में 'लहरा दो तिरंगा' रैली के लिए भीड़ जमा हुई; AAP कार्यकर्ता भी चुनाव आयोग के विरोध में मौजूद थे।
AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस अधिनियम धारा 65 के तहत हिरासत के बाद आर.के.
पुरम थाने से रिहा किया गया।
बोरा ने कथित 'अवैध हिरासत' पर सवाल उठाते हुए अभिजीत दिपके और अन्य प्रदर्शनकारियों की तत्काल रिहाई की माँग की।

नई दिल्ली, 17 अक्टूबर 2026 — दिल्ली पुलिस ने कनॉट प्लेस और नई दिल्ली के अन्य क्षेत्रों में लागू निषेधाज्ञा आदेशों के कथित उल्लंघन पर कई प्राथमिकियाँ (एफआईआर) दर्ज की हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, बार-बार घोषणाओं के बावजूद कनॉट प्लेस के आसपास भीड़ जमा हो गई, जिसके बाद भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के अंतर्गत मामले दर्ज किए जा रहे हैं।

मुख्य घटनाक्रम

यह कार्रवाई शुक्रवार, 17 अक्टूबर को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क के बाहर प्रदर्शनकारियों द्वारा तिरंगा रैली निकाले जाने के बाद हुई। आम आदमी पार्टी (AAP) के कार्यकर्ता और समर्थक चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर चुनाव आयोग (ECI) के विरुद्ध अपना विरोध दर्ज कराने के उद्देश्य से एकत्र हुए थे।

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने लोगों से 16 अक्टूबर को 'लहरा दो तिरंगा' रैली के अंतर्गत सेंट्रल पार्क में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए एकत्र होने का आह्वान किया था। अधिकारियों के अनुसार, इसी आह्वान के बाद बड़ी संख्या में लोग जमा हुए और निषेधाज्ञा का उल्लंघन हुआ।

हिरासत और रिहाई

शुक्रवार शाम को हिरासत में ली गईं अखिल भारतीय छात्र संघ (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद आर.के. पुरम थाने से रिहा कर दिया गया।

रिहाई के बाद नेहा बोरा ने पत्रकारों से कहा, 'अभिजीत को रिहा किया जाना चाहिए, मुझे तो पता ही नहीं था कि उन्हें हिरासत में लिया गया है। उन्हें और बाकी सभी प्रदर्शनकारियों को रिहा किया जाना चाहिए जिन्हें कथित तौर पर अवैध रूप से हिरासत में लिया गया है। वे आम नागरिक हैं जो जवाबदेही और अपने मताधिकार की माँग कर रहे हैं।'

विरोध प्रदर्शन का संदर्भ

बोरा ने आगे कहा कि इस देश में लंबे समय से लोगों को बिना पर्याप्त कारण के हिरासत में लिया जाता रहा है और यह प्रवृत्ति अब और भी स्पष्ट हो गई है। उन्होंने कहा, 'प्रदर्शनकारियों को पकड़ा जाता है, हिरासत में लिया जाता है और अगली सुबह या शाम को रिहा किया जाता है — इस तरह की हिरासतों का मकसद आम नागरिकों में भय फैलाना है।' गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों पर अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

पुलिस का रुख

पुलिस सूत्रों के अनुसार, बार-बार नियम तोड़ने वालों के विरुद्ध बीएनएसएस धारा 163 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि निषेधाज्ञा आदेश कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत जारी किए गए थे और उनका पालन अनिवार्य था। प्रभावित क्षेत्रों में तैनात सुरक्षाबलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए घोषणाएँ कीं, लेकिन लोगों के एकत्र होते रहने पर कार्रवाई की गई।

आगे क्या

दर्ज एफआईआर में आरोपियों की पहचान और पूछताछ की प्रक्रिया जारी है। अभिजीत दिपके की हिरासत की स्थिति को लेकर विरोध प्रदर्शनकारियों में असंतोष बना हुआ है। यह मामला राजनीतिक विरोध, नागरिक स्वतंत्रता और कानूनी प्रावधानों के संतुलन पर आने वाले दिनों में बहस का केंद्र बनने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो पहले CrPC की धारा 144 की जगह आई, राजनीतिक विरोध-प्रदर्शनों पर लागू होने पर हमेशा संवेदनशील रहा है। AISA जैसे छात्र संगठनों की नेताओं की हिरासत और रातभर थाने में रोके जाने के आरोप — जिन्हें पुलिस ने अब तक न स्वीकारा न नकारा — यह सवाल उठाते हैं कि निषेधाज्ञा को लागू करने और असहमति की आवाज़ दबाने के बीच की रेखा कहाँ खींची जाए।
RashtraPress
17 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कनॉट प्लेस में निषेधाज्ञा उल्लंघन पर कितनी एफआईआर दर्ज हुई हैं?
दिल्ली पुलिस ने कनॉट प्लेस और नई दिल्ली के अन्य हिस्सों में निषेधाज्ञा उल्लंघन पर कई एफआईआर दर्ज की हैं। मामले भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत दर्ज किए जा रहे हैं और बार-बार नियम तोड़ने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
कनॉट प्लेस में 'लहरा दो तिरंगा' रैली क्यों हुई?
CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने 16 अक्टूबर को सेंट्रल पार्क में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए लोगों को एकत्र होने का आह्वान किया था। AAP कार्यकर्ता और समर्थक भी चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के विरोध में चुनाव आयोग के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराने के लिए वहाँ पहुँचे थे।
AISA प्रमुख नेहा बोरा को किस कानून के तहत हिरासत में लिया गया और वे कब रिहा हुईं?
नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत हिरासत में लिया गया था। औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें आर.के. पुरम थाने से रिहा कर दिया गया।
BNSS की धारा 163 क्या है और यह किस पर लागू होती है?
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 पुरानी CrPC की धारा 144 की जगह आई है, जो किसी क्षेत्र में चार या अधिक व्यक्तियों के एकत्र होने पर रोक लगाने का अधिकार देती है। इसका उल्लंघन दंडनीय अपराध है और पुलिस इसके तहत एफआईआर दर्ज कर सकती है।
अभिजीत दिपके की हिरासत पर क्या स्थिति है?
नेहा बोरा के अनुसार, अभिजीत दिपके को अभी तक रिहा नहीं किया गया था और उन्होंने उनकी तत्काल रिहाई की माँग की। दिल्ली पुलिस ने इस पर अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
राष्ट्र प्रेस
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