17 अक्टूबर 2026
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आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा रिहा, मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और अभिजीत दिपके की रिहाई की मांग

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आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा रिहा, मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और अभिजीत दिपके की रिहाई की मांग

सारांश

तिरंगा मार्च के दौरान हिरासत में ली गई आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस ने 17 अक्टूबर को रिहा किया। रिहाई के बाद उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके सहित अन्य प्रदर्शनकारियों की तत्काल रिहाई की माँग की।

मुख्य बातें

आइसा राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को 17 अक्टूबर 2026 को आरके पुरम पुलिस स्टेशन से रिहा किया गया।
उन्हें 16 अक्टूबर की शाम मंडी हाउस के पास तिरंगा मार्च के दौरान 'दिल्ली पुलिस अधिनियम' की धारा 65 के तहत हिरासत में लिया गया था।
नेहा बोरा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग फिर दोहराई।
सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके और अन्य प्रदर्शनकारियों की रिहाई की माँग की गई।
नेहा बोरा ने माना कि आंदोलन से मंडी हाउस क्षेत्र के व्यापारियों का कारोबार प्रभावित हो रहा है।

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस ने 17 अक्टूबर 2026 को रिहा कर दिया। उन्हें 16 अक्टूबर की शाम मंडी हाउस के पास तिरंगा मार्च के दौरान हिरासत में लिया गया था। आरके पुरम पुलिस स्टेशन पर 'दिल्ली पुलिस अधिनियम' की धारा 65 के तहत औपचारिक प्रक्रियाएँ पूरी करने के बाद उन्हें छोड़ा गया।

रिहाई के बाद नेहा बोरा का बयान

रिहाई के तुरंत बाद नेहा बोरा ने मीडिया से बातचीत में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग एक बार फिर दोहराई। उन्होंने कहा, 'भारत सरकार ने कानूनी और गैर-कानूनी होने की सारी हदें बहुत पहले ही पार कर दी हैं। हमारे देश में लंबे समय से यह होता आ रहा है कि लोगों को बिना किसी वजह के हिरासत में ले लिया जाता है और घंटों तक बैठाकर रखा जाता है।'

उन्होंने आगे कहा, 'अभी जो आंदोलन चल रहा है, उसमें ऐसा रोज हो रहा है। प्रदर्शनकारियों को पकड़ा और हिरासत में लिया जाता है और फिर अगली सुबह या अगली शाम को छोड़ दिया जाता है। आम नागरिकों के मन में डर पैदा करने के लिए इनका इस्तेमाल कैसे किया जा रहा है, आज हमने खुद इसका एक उदाहरण देखा।'

व्यापारियों के नुकसान का हवाला

नेहा बोरा ने यह भी स्वीकार किया कि चल रहे प्रदर्शनों और आंदोलन से मंडी हाउस क्षेत्र के व्यापारियों का कारोबार प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा, 'मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपना अहंकार छोड़ें। BJP मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा सुनिश्चित करे, जिससे व्यापारियों को नुकसान न हो।' यह टिप्पणी उल्लेखनीय है क्योंकि इसमें उन्होंने विरोध के कारण होने वाले आर्थिक व्यवधान को अप्रत्यक्ष रूप से स्वीकार किया।

अभिजीत दिपके और अन्य प्रदर्शनकारियों की रिहाई की माँग

नेहा बोरा ने सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके की रिहाई की भी माँग की। उन्होंने कहा, 'अभिजीत को रिहा किया जाना चाहिए। मुझे पता ही नहीं था कि उसे हिरासत में लिया गया है। उसे और उन सभी अन्य प्रदर्शनकारियों को रिहा किया जाना चाहिए जिन्हें कथित तौर पर गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया है। वे आम नागरिक हैं जो जवाबदेही और अपने वोट देने के अधिकार की माँग कर रहे हैं।'

व्यापक संदर्भ: आंदोलन और हिरासत का सिलसिला

गौरतलब है कि यह घटना उस व्यापक आंदोलन की पृष्ठभूमि में हुई है जिसमें प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की माँग कर रहे हैं। नेहा बोरा के अनुसार, इस आंदोलन के दौरान लगातार प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर अगले दिन रिहा करने का क्रम जारी है। यह ऐसे समय में आया है जब चुनावी जवाबदेही को लेकर विपक्षी दलों और नागरिक समाज संगठनों में बेचैनी बढ़ रही है। आगे देखना होगा कि दिल्ली पुलिस अभिजीत दिपके और अन्य हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों के मामले में क्या कदम उठाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह ध्यान देने योग्य है कि बोरा ने स्वयं व्यापारियों के नुकसान को स्वीकार करते हुए BJP और चुनाव आयुक्त पर जिम्मेदारी डाली — यह एक राजनीतिक दबाव की रणनीति है, लेकिन इससे आंदोलन की दिशा और नागरिक असुविधा के बीच तनाव भी उजागर होता है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूकती है वह यह है कि 'दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65' के तहत हिरासत और अगले दिन रिहाई का यह पैटर्न नागरिक अधिकारों के दृष्टिकोण से गंभीर कानूनी सवाल खड़े करता है, जिन पर न्यायिक नजर अभी तक केंद्रित नहीं हुई है।
RashtraPress
17 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस ने क्यों हिरासत में लिया था?
नेहा बोरा को 16 अक्टूबर 2026 की शाम मंडी हाउस के पास तिरंगा मार्च के दौरान हिरासत में लिया गया था। दिल्ली पुलिस ने 'दिल्ली पुलिस अधिनियम' की धारा 65 के तहत औपचारिक प्रक्रियाएँ पूरी करने के बाद 17 अक्टूबर को उन्हें रिहा कर दिया।
नेहा बोरा ने रिहाई के बाद क्या माँगें रखीं?
रिहाई के बाद नेहा बोरा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग दोहराई और सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके सहित सभी हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को तत्काल रिहा करने की अपील की।
अभिजीत दिपके कौन हैं और उन्हें क्यों हिरासत में लिया गया?
अभिजीत दिपके सीजेपी (Citizens for Justice and Peace) के संस्थापक हैं। नेहा बोरा के अनुसार उन्हें भी उसी आंदोलन के दौरान हिरासत में लिया गया, हालाँकि बोरा ने कहा कि उन्हें उनकी हिरासत की जानकारी पहले नहीं थी।
तिरंगा मार्च किस माँग को लेकर हो रहा है?
तिरंगा मार्च मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनावी जवाबदेही की माँग को लेकर हो रहा है। प्रदर्शनकारी अपने मतदान के अधिकार की रक्षा की माँग भी कर रहे हैं।
दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 क्या है?
दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 पुलिस को सार्वजनिक शांति और व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से व्यक्तियों को हिरासत में लेने का अधिकार देती है। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने इसी धारा के तहत नेहा बोरा को हिरासत में लिया और प्रक्रिया पूरी होने के बाद रिहा किया।
राष्ट्र प्रेस
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