23 अक्टूबर 2026
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दिल्ली हाईकोर्ट ने आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका खारिज की, दस्तावेज़ सौंपने का आदेश

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दिल्ली हाईकोर्ट ने आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका खारिज की, दस्तावेज़ सौंपने का आदेश

सारांश

दिल्ली हाईकोर्ट ने आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका तो खारिज कर दी, लेकिन साथ ही मजिस्ट्रेट को सावधानी बरतने और दस्तावेज़ सौंपने का आदेश भी दिया। 16 अक्टूबर को मंडी हाउस में हिरासत और बीएनएसएस के तहत शांति बंधपत्र की यह लड़ाई छात्र अधिकारों और निवारक कार्रवाई की सीमाओं पर बड़े सवाल उठाती है।

मुख्य बातें

दिल्ली हाईकोर्ट ने 23 अक्टूबर 2026 को आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका खारिज की।
याचिका में ₹10,000 के निजी मुचलके और एक जमानतदार देने संबंधी विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के नोटिस को चुनौती दी गई थी।
अदालत ने निर्देश दिया कि कार्यवाही में प्रयुक्त दस्तावेज़ों की प्रतियाँ नेहा बोरा को उपलब्ध कराई जाएँ।
न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने एसईएम को जाँच पूरी होने के बाद सावधानी के साथ आदेश पारित करने का निर्देश दिया।
बोरा को 16 अक्टूबर को मंडी हाउस पहुँचने के 10-15 मिनट के भीतर हिरासत में लिया गया था; एनडीएमसी ने 'तिरंगा असेंबली' की अनुमति नहीं दी थी।
सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने बोरा पर 12 उल्लंघनों का आरोप लगाया।

दिल्ली हाईकोर्ट ने 23 अक्टूबर 2026 को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने शांति बनाए रखने के लिए ₹10,000 के निजी मुचलके और एक जमानतदार प्रस्तुत करने संबंधी नोटिस को चुनौती दी थी। हालाँकि अदालत ने साथ ही यह भी निर्देश दिया कि कार्यवाही में जिन दस्तावेज़ों और सामग्री का उपयोग किया गया है, उनकी प्रतियाँ बोरा को उपलब्ध कराई जाएँ।

मुख्य घटनाक्रम

न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की एकल पीठ ने याचिका को फिलहाल खारिज करते हुए विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) को निर्देश दिया कि जाँच पूरी होने के पश्चात कोई भी आदेश पारित करते समय आवश्यक सावधानी बरती जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 136 के अंतर्गत शांति बंधपत्र केवल जाँच पूर्ण होने के बाद ही लागू किया जा सकता है।

नेहा बोरा ने 17 अक्टूबर 2026 को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट द्वारा जारी उस नोटिस को चुनौती दी थी, जो बीएनएसएस की धाराओं 126, 130 और 135(3) के तहत जारी किया गया था।

बचाव पक्ष के तर्क

बोरा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत को बताया कि 16 अक्टूबर की शाम मंडी हाउस पहुँचने के मात्र 10-15 मिनट के भीतर ही बोरा को हिरासत में ले लिया गया था। उन्होंने तर्क दिया कि बोरा ने कोई ऐसा कृत्य नहीं किया जिससे शांति भंग होने की आशंका उत्पन्न हो, और इसलिए उनकी हिरासत कानूनी रूप से अवैध थी।

वकील ने यह भी कहा कि बोरा का कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में प्रस्तावित 'तिरंगा असेंबली' कार्यक्रम से किसी प्रकार का कोई संबंध नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि हिरासत के तुरंत बाद बोरा को न तो अपने परिवार से और न ही अपने अधिवक्ताओं से संपर्क करने की अनुमति दी गई — जो कि उनके मूल अधिकारों का उल्लंघन है।

सरकार की प्रतिक्रिया

याचिका का विरोध करते हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि बोरा द्वारा एक के बाद एक 12 उल्लंघन किए गए थे, जिनकी मजिस्ट्रेट द्वारा विधिवत जाँच की गई है। उन्होंने एक कथित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोरा की सत्ता परिवर्तन संबंधी टिप्पणी का भी उल्लेख किया और कहा कि सत्ता परिवर्तन मतों के माध्यम से होता है, न कि नई दिल्ली के संवेदनशील इलाके में अराजक तत्वों द्वारा।

घटना की पृष्ठभूमि

16 अक्टूबर 2026 को दिल्ली पुलिस ने नेहा बोरा सहित कई लोगों को हिरासत में लिया था। उस दिन सीजेपी द्वारा कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में शाम 5 बजे प्रस्तावित 'तिरंगा असेंबली' कार्यक्रम को देखते हुए मध्य दिल्ली में सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी। नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (एनडीएमसी) ने इस प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी।

याचिका में दलील दी गई थी कि नोटिस में कोई ठोस आधार नहीं बताया गया, जो बीएनएसएस की धारा 126 के तहत निवारक कार्रवाई आरंभ करने के लिए अनिवार्य शर्त है। यह ऐसे समय में आया है जब छात्र संगठनों और प्रशासन के बीच नागरिक स्वतंत्रता को लेकर तनाव बढ़ा है।

आगे की राह

अदालत के निर्देश के अनुसार, अब नेहा बोरा को कार्यवाही से संबंधित दस्तावेज़ उपलब्ध कराए जाएँगे, जिसके बाद वे उन्हें देखकर आगे की कानूनी कार्यवाही का निर्णय कर सकती हैं। विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के स्तर पर जाँच जारी रहेगी, और अदालत ने सतर्कता के साथ अंतिम आदेश पारित करने का निर्देश दिया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और छात्र-राजनीतिक गतिविधियों पर इसके प्रयोग से नागरिक स्वतंत्रता के प्रश्न और गहरे होते हैं। मुख्यधारा की कवरेज याचिका खारिज होने पर केंद्रित है, लेकिन असली मुद्दा यह है कि क्या निवारक कार्रवाई से पहले पर्याप्त प्रारंभिक जाँच हुई — जो अभी भी अनुत्तरित है। जब तक जाँच का पूरा रिकॉर्ड सामने नहीं आता, इस मामले में न्यायिक अध्याय बंद नहीं हुआ है।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेहा बोरा की याचिका किस बारे में थी?
नेहा बोरा ने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट द्वारा जारी उस नोटिस को चुनौती दी थी, जिसमें उनसे शांति बनाए रखने के लिए ₹10,000 का निजी मुचलका और एक जमानतदार प्रस्तुत करने को कहा गया था। यह नोटिस बीएनएसएस की धाराओं 126, 130 और 135(3) के तहत जारी किया गया था।
दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?
न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की एकल पीठ ने याचिका खारिज कर दी, लेकिन साथ ही निर्देश दिया कि कार्यवाही में प्रयुक्त दस्तावेज़ों की प्रतियाँ नेहा बोरा को उपलब्ध कराई जाएँ। अदालत ने एसईएम को जाँच पूरी होने के बाद सावधानी के साथ आदेश पारित करने को भी कहा।
नेहा बोरा को हिरासत में कब और कहाँ लिया गया था?
नेहा बोरा को 16 अक्टूबर 2026 की शाम मंडी हाउस पहुँचने के मात्र 10-15 मिनट बाद हिरासत में लिया गया था। उस दिन कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में प्रस्तावित 'तिरंगा असेंबली' कार्यक्रम के मद्देनज़र मध्य दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी।
'तिरंगा असेंबली' कार्यक्रम क्या था और उसे अनुमति क्यों नहीं मिली?
यह कार्यक्रम कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में शाम 5 बजे आयोजित किया जाना था। नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (एनडीएमसी) ने इस प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी।
सरकार ने अदालत में क्या तर्क दिए?
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि नेहा बोरा ने एक के बाद एक 12 उल्लंघन किए, जिनकी मजिस्ट्रेट ने जाँच की है। उन्होंने एक कथित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोरा की सत्ता परिवर्तन संबंधी टिप्पणी का भी उल्लेख किया और कहा कि सत्ता परिवर्तन मतों के ज़रिए होता है।
राष्ट्र प्रेस
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