24 अक्टूबर 2026
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आंध्र प्रदेश निर्वाचन आयोग पर वाईएसआरसीपी का बड़ा आरोप: 'चंद्रबाबू की कठपुतली बना SEC'

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आंध्र प्रदेश निर्वाचन आयोग पर वाईएसआरसीपी का बड़ा आरोप: 'चंद्रबाबू की कठपुतली बना SEC'

सारांश

वाईएसआरसीपी नेता अंबाती रामबाबू ने आंध्र प्रदेश निर्वाचन आयोग पर CM चंद्रबाबू नायडू की 'कठपुतली' बनने का गंभीर आरोप लगाया है। नामांकन पत्र फाड़े जाने, वरिष्ठ नेताओं की नज़रबंदी और 54 पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की माँग के साथ यह विवाद आंध्र की चुनावी राजनीति में नया तूफान खड़ा कर रहा है।

मुख्य बातें

अंबाती रामबाबू ने 24 अक्टूबर को गुंटूर में आरोप लगाया कि आंध्र प्रदेश SEC CM चंद्रबाबू नायडू की 'कठपुतली' बन गया है।
वाईएसआरसीपी उम्मीदवारों के नामांकन पत्र कथित तौर पर पुलिस की मौजूदगी में फाड़े गए, जबकि सर्वोच्च न्यायालय के सुरक्षा निर्देश लागू थे।
पूर्व मंत्री विदादला रजनी को कथित तौर पर पुलिस ने धक्का देकर गिराया; घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।
वरिष्ठ नेता पिन्नेली रामकृष्ण रेड्डी , बोला ब्रह्मा नायडू और नंबूरी शंकरा राव को कथित तौर पर घरों में नज़रबंद किया गया।
वाईएसआरसीपी ने 54 पुलिस अधिकारियों की पहचान की, जिनमें सत्तेनापल्ली DSP हनुमंता राव शामिल; उच्च एवं सर्वोच्च न्यायालय से कार्रवाई की माँग।
कथित हमले जन सेना पार्टी और BJP के उम्मीदवारों तक भी फैले होने का आरोप।

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के गुंटूर जिला अध्यक्ष और पूर्व मंत्री अंबाती रामबाबू ने 24 अक्टूबर को आरोप लगाया कि आंध्र प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की 'कठपुतली' बनकर काम कर रहा है और स्थानीय निकाय चुनावों में हिंसा व भय के माहौल के ज़रिए निर्विरोध जीत सुनिश्चित कराने में सहायक बन रहा है। रामबाबू के ये आरोप ऐसे समय में आए हैं जब राज्य में नामांकन प्रक्रिया के दौरान व्यापक अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ रही हैं।

मुख्य आरोप और घटनाक्रम

गुंटूर स्थित अपने कैंप कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए रामबाबू ने दावा किया कि सत्तारूढ़ तेलुगू देशम पार्टी (TDP) नीत गठबंधन, पुलिस और निर्वाचन आयोग की कथित मिलीभगत से लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमज़ोर किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सर्वोच्च न्यायालय के उम्मीदवारों को सुरक्षा देने संबंधी स्पष्ट निर्देशों के बावजूद वाईएसआरसीपी उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोका गया।

रामबाबू के अनुसार, 'पुलिस की मौजूदगी में उम्मीदवारों के नामांकन पत्र फाड़ दिए गए और TDP नेताओं की कथित ज्यादतियों को छिपाने के लिए मीडिया को नामांकन केंद्रों से दूर रखा गया।' उन्होंने यह भी कहा कि विपक्षी नेताओं को नज़रबंद किया गया, जबकि सत्तारूढ़ दल के उम्मीदवारों को सुविधाएँ दी गईं।

पूर्व मंत्री विदादला रजनी के साथ कथित दुर्व्यवहार

रामबाबू ने पूर्व मंत्री विदादला रजनी के साथ हुए कथित पुलिस दुर्व्यवहार की भी निंदा की। उनके अनुसार, एक उम्मीदवार की सहायता कर रही रजनी को कथित तौर पर पुलिस ने धक्का देकर ज़मीन पर गिरा दिया। शुक्रवार को वाईएसआरसीपी ने इस घटना की राज्य निर्वाचन आयोग से स्वतंत्र जाँच कराने और दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की माँग की थी।

रामबाबू के अनुसार, इस कथित घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हुआ, जिसे विपक्ष ने स्थानीय निकाय चुनावों की नामांकन प्रक्रिया के दौरान पुलिस की कथित ज्यादती का एक और उदाहरण बताया।

वरिष्ठ नेताओं की नज़रबंदी और अन्य दलों पर कथित हमले

रामबाबू ने आरोप लगाया कि पार्टी के वरिष्ठ नेता पिन्नेली रामकृष्ण रेड्डी, बोला ब्रह्मा नायडू और नंबूरी शंकरा राव को उनके घरों में नज़रबंद कर दिया गया, जिससे वे उम्मीदवारों को बी-फॉर्म वितरित करने और उनकी सहायता करने में असमर्थ रहे। उन्होंने यह भी दावा किया कि कथित हमले केवल वाईएसआरसीपी तक सीमित नहीं रहे — जन सेना पार्टी के नेता बेल्लमकोंडा श्रीनिवास के परिवार और कडप्पा में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार सुरेश पर भी कथित तौर पर हमले हुए।

54 पुलिस अधिकारियों पर आरोप, कानूनी कार्रवाई की माँग

वाईएसआरसीपी नेता ने दावा किया कि उनकी पार्टी ने चुनावी अनियमितताओं में कथित संलिप्तता के आरोप में 54 पुलिस अधिकारियों की पहचान की है, जिनमें कुछ IPS अधिकारी और सत्तेनापल्ली DSP हनुमंता राव भी शामिल हैं। रामबाबू ने इन अधिकारियों के विरुद्ध उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के माध्यम से कानूनी कार्रवाई की माँग की। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस तंत्र का उपयोग मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और उनके पुत्र एवं कैबिनेट मंत्री नारा लोकेश के राजनीतिक हितों के लिए किया जा रहा है।

गौरतलब है कि ये सभी आरोप वाईएसआरसीपी की ओर से लगाए गए हैं और इन पर संबंधित अधिकारियों या सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है। रामबाबू ने गुंटूर के मतदाताओं से अपील की कि वे पार्टी की मेयर उम्मीदवार श्रीदेवी और कॉर्पोरेटर उम्मीदवारों के समर्थन में 'पंखा' चुनाव चिह्न पर मतदान करें और कथित 'डराने-धमकाने की राजनीति' को मतपेटी के ज़रिए जवाब दें।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि राज्य निर्वाचन आयोग और न्यायालय इन आरोपों पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या स्वतंत्र जाँच का आदेश दिया जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि ये एकतरफा राजनीतिक बयान हैं — SEC और राज्य सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है। फिर भी, सर्वोच्च न्यायालय के सुरक्षा आदेशों के बावजूद नामांकन पत्र फाड़े जाने और महिला नेता के साथ कथित दुर्व्यवहार की घटनाएँ — यदि सत्यापित होती हैं — तो ये संस्थागत विफलता का संकेत देती हैं, न कि महज़ राजनीतिक आरोपबाज़ी का। आंध्र प्रदेश में सत्ता-परिवर्तन के बाद विपक्ष पर दबाव की यह पहली बड़ी सार्वजनिक शिकायत है, और न्यायालय का रुख इस पूरे प्रकरण की दिशा तय करेगा।
RashtraPress
24 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंबाती रामबाबू ने आंध्र प्रदेश SEC पर क्या आरोप लगाए हैं?
वाईएसआरसीपी नेता अंबाती रामबाबू ने आरोप लगाया है कि आंध्र प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की 'कठपुतली' बनकर काम कर रहा है और TDP नीत गठबंधन तथा पुलिस के साथ मिलकर विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोक रहा है। उनके अनुसार सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद यह सब हो रहा है।
विदादला रजनी के साथ कथित पुलिस दुर्व्यवहार की घटना क्या है?
रामबाबू के अनुसार, पूर्व मंत्री विदादला रजनी एक उम्मीदवार की सहायता कर रही थीं, तभी पुलिस ने कथित तौर पर उन्हें धक्का देकर ज़मीन पर गिरा दिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और वाईएसआरसीपी ने इसकी स्वतंत्र जाँच की माँग की है।
वाईएसआरसीपी ने किन पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की माँग की है?
वाईएसआरसीपी ने कथित चुनावी अनियमितताओं में संलिप्त 54 पुलिस अधिकारियों की पहचान की है, जिनमें कुछ IPS अधिकारी और सत्तेनापल्ली DSP हनुमंता राव शामिल हैं। पार्टी ने उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के माध्यम से इन अधिकारियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की माँग की है।
क्या ये आरोप केवल वाईएसआरसीपी से जुड़े हैं या अन्य दल भी प्रभावित हुए?
रामबाबू ने दावा किया कि कथित हमले केवल वाईएसआरसीपी तक सीमित नहीं रहे। उनके अनुसार जन सेना पार्टी के नेता बेल्लमकोंडा श्रीनिवास के परिवार और कडप्पा में BJP उम्मीदवार सुरेश पर भी कथित हमले हुए।
इन आरोपों के बाद आगे क्या होने की संभावना है?
वाईएसआरसीपी ने उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में कानूनी कार्रवाई का ऐलान किया है। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि राज्य निर्वाचन आयोग और न्यायालय इन आरोपों पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या स्वतंत्र जाँच का आदेश दिया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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