आंध्र प्रदेश निर्वाचन आयोग पर वाईएसआरसीपी का बड़ा आरोप: 'चंद्रबाबू की कठपुतली बना SEC'
सारांश
मुख्य बातें
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के गुंटूर जिला अध्यक्ष और पूर्व मंत्री अंबाती रामबाबू ने 24 अक्टूबर को आरोप लगाया कि आंध्र प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की 'कठपुतली' बनकर काम कर रहा है और स्थानीय निकाय चुनावों में हिंसा व भय के माहौल के ज़रिए निर्विरोध जीत सुनिश्चित कराने में सहायक बन रहा है। रामबाबू के ये आरोप ऐसे समय में आए हैं जब राज्य में नामांकन प्रक्रिया के दौरान व्यापक अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ रही हैं।
मुख्य आरोप और घटनाक्रम
गुंटूर स्थित अपने कैंप कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए रामबाबू ने दावा किया कि सत्तारूढ़ तेलुगू देशम पार्टी (TDP) नीत गठबंधन, पुलिस और निर्वाचन आयोग की कथित मिलीभगत से लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमज़ोर किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सर्वोच्च न्यायालय के उम्मीदवारों को सुरक्षा देने संबंधी स्पष्ट निर्देशों के बावजूद वाईएसआरसीपी उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोका गया।
रामबाबू के अनुसार, 'पुलिस की मौजूदगी में उम्मीदवारों के नामांकन पत्र फाड़ दिए गए और TDP नेताओं की कथित ज्यादतियों को छिपाने के लिए मीडिया को नामांकन केंद्रों से दूर रखा गया।' उन्होंने यह भी कहा कि विपक्षी नेताओं को नज़रबंद किया गया, जबकि सत्तारूढ़ दल के उम्मीदवारों को सुविधाएँ दी गईं।
पूर्व मंत्री विदादला रजनी के साथ कथित दुर्व्यवहार
रामबाबू ने पूर्व मंत्री विदादला रजनी के साथ हुए कथित पुलिस दुर्व्यवहार की भी निंदा की। उनके अनुसार, एक उम्मीदवार की सहायता कर रही रजनी को कथित तौर पर पुलिस ने धक्का देकर ज़मीन पर गिरा दिया। शुक्रवार को वाईएसआरसीपी ने इस घटना की राज्य निर्वाचन आयोग से स्वतंत्र जाँच कराने और दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की माँग की थी।
रामबाबू के अनुसार, इस कथित घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हुआ, जिसे विपक्ष ने स्थानीय निकाय चुनावों की नामांकन प्रक्रिया के दौरान पुलिस की कथित ज्यादती का एक और उदाहरण बताया।
वरिष्ठ नेताओं की नज़रबंदी और अन्य दलों पर कथित हमले
रामबाबू ने आरोप लगाया कि पार्टी के वरिष्ठ नेता पिन्नेली रामकृष्ण रेड्डी, बोला ब्रह्मा नायडू और नंबूरी शंकरा राव को उनके घरों में नज़रबंद कर दिया गया, जिससे वे उम्मीदवारों को बी-फॉर्म वितरित करने और उनकी सहायता करने में असमर्थ रहे। उन्होंने यह भी दावा किया कि कथित हमले केवल वाईएसआरसीपी तक सीमित नहीं रहे — जन सेना पार्टी के नेता बेल्लमकोंडा श्रीनिवास के परिवार और कडप्पा में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार सुरेश पर भी कथित तौर पर हमले हुए।
54 पुलिस अधिकारियों पर आरोप, कानूनी कार्रवाई की माँग
वाईएसआरसीपी नेता ने दावा किया कि उनकी पार्टी ने चुनावी अनियमितताओं में कथित संलिप्तता के आरोप में 54 पुलिस अधिकारियों की पहचान की है, जिनमें कुछ IPS अधिकारी और सत्तेनापल्ली DSP हनुमंता राव भी शामिल हैं। रामबाबू ने इन अधिकारियों के विरुद्ध उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के माध्यम से कानूनी कार्रवाई की माँग की। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस तंत्र का उपयोग मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और उनके पुत्र एवं कैबिनेट मंत्री नारा लोकेश के राजनीतिक हितों के लिए किया जा रहा है।
गौरतलब है कि ये सभी आरोप वाईएसआरसीपी की ओर से लगाए गए हैं और इन पर संबंधित अधिकारियों या सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है। रामबाबू ने गुंटूर के मतदाताओं से अपील की कि वे पार्टी की मेयर उम्मीदवार श्रीदेवी और कॉर्पोरेटर उम्मीदवारों के समर्थन में 'पंखा' चुनाव चिह्न पर मतदान करें और कथित 'डराने-धमकाने की राजनीति' को मतपेटी के ज़रिए जवाब दें।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि राज्य निर्वाचन आयोग और न्यायालय इन आरोपों पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या स्वतंत्र जाँच का आदेश दिया जाता है।