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वाईएसआरसीपी के सज्जाला रेड्डी का आरोप: हिंसा और डराने-धमकाने से निकाय चुनावों में भागीदारी नहीं रोकी जा सकती

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वाईएसआरसीपी के सज्जाला रेड्डी का आरोप: हिंसा और डराने-धमकाने से निकाय चुनावों में भागीदारी नहीं रोकी जा सकती

सारांश

वाईएसआरसीपी नेता सज्जाला रामकृष्ण रेड्डी ने टीडीपी सरकार पर निकाय चुनावों में हिंसा, पुलिस फायरिंग और 921 नेताओं पर झूठे मामले दर्ज कर विपक्ष की भागीदारी बाधित करने का आरोप लगाया — और पुलिवेंदुला की जाँच के लिए हाई कोर्ट जज की नियुक्ति तथा राज्य चुनाव आयोग के तत्काल हस्तक्षेप की माँग की।

मुख्य बातें

वाईएसआरसीपी के राज्य समन्वयक सज्जाला रामकृष्ण रेड्डी ने 20 अक्टूबर को ताडेपल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
उन्होंने आरोप लगाया कि जमीनी स्तर के 921 नेताओं पर मामले दर्ज कर उन्हें नगर निकाय, एमपीटीसी और जेडपीटीसी चुनावों से दूर रखने की कोशिश हो रही है।
पुलिवेंदुला में पुलिस फायरिंग की हाई कोर्ट के मौजूदा जज से न्यायिक जाँच की माँग की गई।
कडप्पा में कथित तौर पर 40-50 उम्मीदवारों को रोका गया और 10-12 नामांकन खारिज हुए।
दलित नेता राजायाह पर दुग्गीराला में 'प्रिवेंटिव डिटेंशन एक्ट' के इस्तेमाल का आरोप।
राज्य चुनाव आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की गई।

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के राज्य समन्वयक सज्जाला रामकृष्ण रेड्डी ने मंगलवार, 20 अक्टूबर को ताडेपल्ली स्थित पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में मीडिया को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि हमलों, आपराधिक मामलों और डराने-धमकाने की रणनीति के ज़रिए पार्टी को स्थानीय निकाय चुनावों से बाहर नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि टीडीपी नीत सरकार और पुलिस मिलकर विपक्षी उम्मीदवारों के नामांकन की प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से बाधित कर रही हैं।

पुलिवेंदुला फायरिंग और न्यायिक जाँच की माँग

सज्जाला ने पुलिवेंदुला में हुई पुलिस फायरिंग की जाँच हाई कोर्ट के किसी मौजूदा जज से कराने की माँग की। उनके अनुसार, जब विपक्षी उम्मीदवार नगर निकाय चुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने की कोशिश कर रहे थे, तब पुलिस अधिकारियों ने बिना किसी उकसावे के हवा में गोलियाँ चलाईं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस टीडीपी कार्यकर्ताओं से भी आगे बढ़कर सीधे उम्मीदवारों पर हमला कर रही है और उनके काम में बाधा डाल रही है।

नामांकन रोकने के कथित हथकंडे

सज्जाला ने विभिन्न क्षेत्रों से ऐसी घटनाओं का ब्यौरा दिया जहाँ कथित तौर पर उम्मीदवारों को चुनावी प्रक्रिया से दूर रखने की कोशिश की गई। उन्होंने बताया कि मंत्री लोकेश के मंगलगिरी निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत दुग्गीराला में वरिष्ठ दलित नेता राजायाह के खिलाफ 'प्रिवेंटिव डिटेंशन एक्ट' का इस्तेमाल किया गया, ताकि वे आगामी एमपीपी चुनाव में हिस्सा न ले सकें।

उनके मुताबिक, जाति प्रमाण पत्र और 'नो-ड्यूज' सर्टिफिकेट जारी करने में जानबूझकर देरी की जा रही थी। तिरुपति में उम्मीदवार जेबी श्रीनिवास को उनके घर पर जन सेना के एक उम्मीदवार के पति ने कथित तौर पर धमकी दी। कडप्पा में पुलिस ने लगभग 40-50 संभावित उम्मीदवारों को रोका और 10-12 नामांकन खारिज कर दिए गए।

मेयर उम्मीदवार पर हमला, हत्या प्रयास के मामले

सज्जाला के अनुसार, सोमवार रात मेयर पद के उम्मीदवार के घर पर हमला किया गया ताकि वे नामांकन वापस ले लें। डिप्टी मेयर पद के उम्मीदवार नित्यानंद रेड्डी के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया गया। पुलिवेंदुला में हत्या के प्रयास के दो मामलों में उम्मीदवार राघवा रेड्डी और अन्य लोगों को नामजद किया गया है। उन्होंने बताया कि जमीनी स्तर के 921 नेताओं पर ऐसे मामले दर्ज किए गए हैं, जिनका उद्देश्य उन्हें नगर निकाय, एमपीटीसी और जेडपीटीसी चुनावों से दूर रखना है।

टीडीपी सरकार पर 'निर्विरोध जीत' की साजिश का आरोप

सज्जाला ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और सत्तारूढ़ दल का मीडिया इस तरह बाहर किए जाने को 'जनसमर्थन' के रूप में प्रचारित कर रहा है, जबकि असल में सत्ताधारी दल के समूहों द्वारा हिंसा की जा रही है और दोष वाईएसआरसीपी पर मढ़ा जा रहा है।

उन्होंने इन घटनाओं को महज सामान्य झड़पें मानने से इनकार किया और कहा कि यह सुनियोजित डराने-धमकाने की कार्रवाई है। उन्होंने माँग की कि राज्य चुनाव आयोग तत्काल दखल दे और इन घटनाओं की न्यायिक जाँच सुनिश्चित की जाए। यह देखना होगा कि राज्य चुनाव आयोग और न्यायपालिका इन आरोपों पर क्या कदम उठाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पुलिवेंदुला फायरिंग और 921 नेताओं पर एक साथ दर्ज मामलों की संख्या सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई की सीमा पार करती दिखती है, और इसी वजह से न्यायिक जाँच की माँग को खारिज करना मुश्किल है। आंध्र प्रदेश में सत्ता-परिवर्तन के बाद विपक्ष पर दबाव की यह पहली बड़ी सार्वजनिक शिकायत है — राज्य चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि लोकतांत्रिक संस्थाएँ कितनी स्वायत्त हैं।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सज्जाला रामकृष्ण रेड्डी ने निकाय चुनावों को लेकर क्या आरोप लगाए?
वाईएसआरसीपी के राज्य समन्वयक सज्जाला रामकृष्ण रेड्डी ने आरोप लगाया कि टीडीपी सरकार और पुलिस मिलकर हिंसा, डराने-धमकाने और आपराधिक मामले दर्ज कर विपक्षी उम्मीदवारों को नगर निकाय चुनावों से बाहर करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने 921 जमीनी नेताओं पर मामले दर्ज होने का भी उल्लेख किया।
पुलिवेंदुला पुलिस फायरिंग क्या है और जाँच की माँग क्यों की जा रही है?
सज्जाला के अनुसार, पुलिवेंदुला में जब वाईएसआरसीपी उम्मीदवार नामांकन दाखिल करने जा रहे थे, तब पुलिस अधिकारियों ने बिना किसी उकसावे के हवा में गोलियाँ चलाईं। इस घटना की निष्पक्ष जाँच के लिए हाई कोर्ट के मौजूदा जज की नियुक्ति की माँग की गई है।
आंध्र प्रदेश में निकाय चुनावों में और किन-किन जगहों पर अनियमितताओं का आरोप है?
कडप्पा में 40-50 उम्मीदवारों को रोकने और 10-12 नामांकन खारिज करने, तिरुपति में उम्मीदवार जेबी श्रीनिवास को धमकी, और दुग्गीराला में दलित नेता राजायाह पर 'प्रिवेंटिव डिटेंशन एक्ट' के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया है। इसके अलावा डिप्टी मेयर नित्यानंद रेड्डी के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला भी दर्ज किया गया बताया गया है।
वाईएसआरसीपी ने राज्य चुनाव आयोग से क्या माँग की है?
वाईएसआरसीपी ने राज्य चुनाव आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है ताकि उम्मीदवारों को बिना डर के नामांकन दाखिल करने का अवसर मिले। साथ ही पुलिवेंदुला जैसी घटनाओं की न्यायिक जाँच सुनिश्चित करने की भी अपील की गई है।
टीडीपी सरकार पर 'निर्विरोध जीत' का षड्यंत्र रचने का आरोप क्यों लगाया गया?
सज्जाला ने आरोप लगाया कि टीडीपी सरकार नामांकन रुकवाकर, नाम वापसी के लिए दबाव डालकर और नामांकन रद्द करवाकर बाद में 'निर्विरोध जीत' का जश्न मनाने की योजना बना रही है। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू पर इस प्रक्रिया को 'जनसमर्थन' की तरह पेश करने का भी आरोप लगाया गया।
राष्ट्र प्रेस
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