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चंद्रबाबू नायडू का वाईएसआरसीपी पर बड़ा आरोप: अदालतों से चुनाव रोकने की साजिश

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चंद्रबाबू नायडू का वाईएसआरसीपी पर बड़ा आरोप: अदालतों से चुनाव रोकने की साजिश

सारांश

चंद्रबाबू नायडू ने वाईएसआरसीपी पर न्यायालयों के ज़रिए स्थानीय निकाय चुनाव ठप कराने का आरोप लगाया। जगन मोहन रेड्डी पर बेंगलुरु से तोड़फोड़ की साजिश का इल्ज़ाम भी लगाया। बीसी आरक्षण पर 60 याचिकाओं का हवाला देते हुए नायडू ने एनडीए कार्यकर्ताओं को गठबंधन प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने 21 अक्टूबर 2026 को वाईएसआरसीपी पर अदालतों के ज़रिए स्थानीय निकाय चुनाव रोकने की कोशिश का आरोप लगाया।
नायडू के अनुसार जगन मोहन रेड्डी बेंगलुरु में रहकर तोड़फोड़ की योजनाएँ बना रहे हैं।
वाईएसआरसीपी पर पिछड़ा वर्ग आरक्षण को रोकने के लिए उच्च न्यायालय व सर्वोच्च न्यायालय में लगभग 60 याचिकाएँ दायर करने का आरोप।
टीडीपी , जन सेना और BJP के गठबंधन के उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए टेली कॉन्फ्रेंस के ज़रिए पार्टी कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए गए।
नायडू ने कहा कि आपराधिक मामलों में उलझे लोगों को राजनीति से दूर रखना चाहिए।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) पर आरोप लगाया कि वह न्यायालयों का सहारा लेकर स्थानीय निकाय चुनावों और विकास कार्यों को जानबूझकर बाधित करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वाईएसआरसीपी अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी बेंगलुरु में रहकर तोड़फोड़ की योजनाएँ बना रहे हैं।

टेली कॉन्फ्रेंस में पार्टी नेताओं को दिए निर्देश

तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) प्रमुख ने मंत्रियों, विधायकों, सांसदों, उम्मीदवारों और बूथस्तरीय कार्यकर्ताओं के साथ एक टेली कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इसमें उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि स्थानीय निकाय चुनावों में टीडीपी, जन सेना और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के गठबंधन के सभी उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करना प्राथमिक लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने कार्यकर्ताओं से उम्मीदवार चयन से लेकर मतगणना तक हर चरण को पूरी गंभीरता से लेने का आह्वान किया।

वाईएसआरसीपी पर न्यायालय का दुरुपयोग करने का आरोप

नायडू ने आरोप लगाया कि जब सरकार ने वाईएसआरसीपी की तोड़फोड़ की कोशिशों पर सख्त कार्रवाई की, तो पार्टी ने चुनाव स्थगित कराने के लिए न्यायालय का रुख किया। उन्होंने कहा, 'जब भी उनकी तोड़फोड़ की कोशिशें नाकाम हो जाती हैं, तो वे चुनावों को रोकने के लिए अदालत पहुंच जाते हैं। लोकतंत्र में भरोसा न रखने वाले लोग इसी तरह सोचते हैं।' नायडू का इशारा कथित तौर पर शहरी स्थानीय निकाय चुनावों से जुड़ी याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद वाईएसआरसीपी की प्रतिक्रिया की ओर था।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वाईएसआरसीपी ने मतदाता सूची पर आपत्ति जताते हुए अदालत में माँग की कि नई सूची तैयार होने तक चुनाव न कराए जाएँ। इसके अलावा, पिछड़ा वर्ग (बैकवर्ड क्लास) आरक्षण को बाधित करने के लिए उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में लगभग 60 याचिकाएँ दायर किए जाने का भी आरोप उन्होंने लगाया।

जगन मोहन रेड्डी पर सीधा हमला

नायडू ने वाईएसआरसीपी को 'कुल्हाड़ी पार्टी' करार दिया और कहा कि जहाँ NDA चुनावों के लिए मजबूत उम्मीदवारों के चयन में व्यस्त है, वहीं बेंगलुरु में बैठे 'कुल्हाड़ी पार्टी' के अध्यक्ष तोड़फोड़ की साजिश रच रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया, 'जगन दूसरे राज्यों से गुंडों को बुलाकर कुछ खास इलाकों को निशाना बनाने की योजना बना रहे हैं।' गौरतलब है कि यह आरोप सत्यापित नहीं हैं और ये नायडू के अपने बयान हैं।

नायडू ने यह भी कहा कि केवल जगन जैसे 'आपराधिक प्रवृत्ति वाले मुकदमेबाज' ही ऐसी रणनीति अपना सकते हैं, जिसमें खुद तबाही मचाई जाए और फिर तुरंत अदालत का दरवाजा खटखटाया जाए। उन्होंने कहा कि आपराधिक मामलों में उलझे लोगों को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए, क्योंकि वे विकास और जनकल्याण कार्यों में बाधक बनते हैं।

उम्मीदवार चयन और गठबंधन रणनीति

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि टीडीपी उन उम्मीदवारों को प्राथमिकता दे रही है जिन्होंने पार्टी के लिए वर्षों तक कड़ी मेहनत की है। उन्होंने कहा, 'हम मजबूत उम्मीदवारों का चयन कर रहे हैं, जबकि कुल्हाड़ी पार्टी विनाशकारी लोगों को मैदान में उतार रही है।' चुनावी प्रक्रिया को जन सेना और BJP के साथ समन्वय बनाकर आगे बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए।

आगे क्या होगा

आंध्र प्रदेश के स्थानीय निकाय चुनाव फिलहाल कानूनी विवादों के बीच हैं, और न्यायालय की आगामी सुनवाई का परिणाम चुनाव कार्यक्रम को प्रभावित कर सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब NDA गठबंधन प्रदेश में अपनी पकड़ मजबूत करने में लगा है और वाईएसआरसीपी पिछले विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद खुद को पुनर्संगठित करने की कोशिश कर रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इनका एक संरचनात्मक पहलू भी है — न्यायालयों का चुनावी हथियार के रूप में इस्तेमाल भारतीय राजनीति में बढ़ती प्रवृत्ति बन चुकी है, और आंध्र प्रदेश इसका अपवाद नहीं है। दूसरी तरफ, बीसी आरक्षण पर 60 याचिकाओं का आँकड़ा — अगर सटीक है — न्यायिक संसाधनों के राजनीतिक दोहन का गंभीर मामला बनता है। मुख्यधारा की कवरेज नायडू के बयानबाज़ी पर टिक जाती है; असली सवाल यह है कि सर्वोच्च न्यायालय चुनाव कार्यक्रम पर क्या रुख अपनाता है — वही निर्धारित करेगा कि ये आरोप राजनीतिक बयानबाज़ी हैं या सच्चाई।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चंद्रबाबू नायडू ने वाईएसआरसीपी पर क्या आरोप लगाए हैं?
नायडू ने आरोप लगाया है कि वाईएसआरसीपी अदालतों का सहारा लेकर आंध्र प्रदेश के स्थानीय निकाय चुनावों को जानबूझकर बाधित कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी ने पिछड़ा वर्ग आरक्षण रोकने के लिए उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में लगभग 60 याचिकाएँ दायर की हैं।
जगन मोहन रेड्डी पर बेंगलुरु से साजिश का आरोप क्यों लगाया गया?
नायडू ने आरोप लगाया कि वाईएसआरसीपी अध्यक्ष जगन मोहन रेड्डी बेंगलुरु में रहकर तोड़फोड़ की योजनाएँ बना रहे हैं और दूसरे राज्यों से लोगों को बुलाकर चुनावी प्रक्रिया बाधित करने का प्रयास कर रहे हैं। ये आरोप नायडू के अपने बयान हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
आंध्र प्रदेश स्थानीय निकाय चुनावों पर न्यायालय का क्या रुख है?
शहरी स्थानीय निकाय चुनावों से जुड़ी याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय का एक आदेश आया है, जिसकी व्याख्या को लेकर टीडीपी और वाईएसआरसीपी के बीच विवाद है। नायडू का आरोप है कि वाईएसआरसीपी उस आदेश को भी तोड़-मरोड़ कर पेश कर रही है।
नायडू ने टीडीपी कार्यकर्ताओं को क्या निर्देश दिए?
नायडू ने टेली कॉन्फ्रेंस के ज़रिए मंत्रियों, विधायकों, सांसदों और बूथस्तरीय कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि एनडीए गठबंधन — टीडीपी, जन सेना और BJP — के सभी उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करना उनका प्राथमिक लक्ष्य हो। उन्होंने उम्मीदवार चयन से लेकर मतगणना तक हर चरण पर ध्यान देने को कहा।
वाईएसआरसीपी को 'कुल्हाड़ी पार्टी' क्यों कहा जा रहा है?
यह शब्द मुख्यमंत्री नायडू ने वाईएसआरसीपी के लिए इस्तेमाल किया है, जो उनके अनुसार विकास कार्यों और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को काटने — यानी बाधित करने — की प्रवृत्ति को दर्शाता है। यह नायडू का राजनीतिक प्रहार है, न कि कोई आधिकारिक वर्गीकरण।
राष्ट्र प्रेस
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