जगन मोहन रेड्डी का बड़ा आरोप: टीडीपी गठबंधन ने स्थानीय निकाय चुनावों में लोकतंत्र को किया ध्वस्त
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के अध्यक्ष वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को ताडेपल्ली में मीडिया से बातचीत में तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) नीत गठबंधन सरकार पर राज्य के स्थानीय निकाय चुनावों में व्यापक हेरफेर का आरोप लगाया। रेड्डी ने कथित तौर पर कहा कि नामांकन से लेकर मतगणना तक हर चरण में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमज़ोर किया गया।
मुख्य आरोप और दावे
जगन मोहन रेड्डी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की सरकार ने शहरी स्थानीय निकाय, जिला परिषद और मंडल परिषद — तीनों स्तरों के चुनावों में अनियमितता बरती। उनके अनुसार, विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोकने के लिए पुलिस और सत्तारूढ़ दल के समर्थकों का उपयोग किया गया।
रेड्डी ने कहा, 'नामांकन, जाँच, नाम वापसी, मतदान और मतगणना — हर चरण में लोकतंत्र का मज़ाक बनाया गया। ऐसे चुनाव को स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं कहा जा सकता।' उन्होंने यह भी दावा किया कि मतगणना के दौरान मतदान प्रतिशत के आँकड़ों में फेरबदल किया गया, जो मतदान के बाद जारी आधिकारिक आँकड़ों से कहीं अधिक थे।
हिंसा और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन
वाईएसआरसीपी प्रमुख ने आरोप लगाया कि विपक्षी पोलिंग एजेंटों पर हमले किए गए और वाईएसआरसीपी कार्यकर्ताओं व बूथ एजेंटों पर कथित तौर पर पेट्रोल बम से भी हमले हुए। उन्होंने हिंसा के वीडियो मीडिया के सामने प्रस्तुत किए। रेड्डी का यह भी दावा है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद गठबंधन सरकार के कामकाज में कोई सुधार नहीं आया।
उन्होंने कहा, 'ऐसे चुनाव लोकतंत्र के चेहरे पर एक दाग हैं। पुलिस ने टीडीपी कार्यकर्ताओं की तरह काम किया और मतदाताओं को मतदान से रोका गया।'
सरकार पर आर्थिक और विकास संबंधी आरोप
रेड्डी ने चुनावी आरोपों तक सीमित नहीं रहते हुए नायडू सरकार पर शासन विफलता का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चंद्रबाबू नायडू ने मेडिकल कॉलेजों और बंदरगाहों को निजी हाथों में सौंपकर 'आंध्र प्रदेश को बेचने का काम किया।' इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि दो चक्रवातों से हुई तबाही के बाद भी आम लोगों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया गया।
वाईएसआरसीपी प्रमुख ने महिलाओं, किसानों और युवाओं से किए गए वादों को पूरा न करने पर नायडू को घेरते हुए सवाल किया कि जनता ऐसी सरकार को वोट क्यों दे।
'सेफ आंध्रा' बनाम 'सेव आंध्रा'
रेड्डी ने अपनी सरकार और मौजूदा सरकार के बीच तुलना करते हुए कहा कि उनके शासनकाल में राज्य को 'सेफ आंध्रा' कहा जाता था, लेकिन अब लोग 'सेव आंध्रा' की बात करने पर मजबूर हैं। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों को लेकर राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है।
गौरतलब है कि टीडीपी नीत गठबंधन ने इन चुनावों में बड़ी जीत दर्ज की है, जिसे रेड्डी ने 'नैतिक हार' करार दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि इन चुनावों में हुई अनियमितताएँ भविष्य में चुनाव सुधारों के लिए एक महत्वपूर्ण अध्ययन सामग्री बन सकती हैं।
फिलहाल टीडीपी या राज्य सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आगामी दिनों में इस राजनीतिक विवाद के और तीखे होने की संभावना है।