आंध्र प्रदेश स्थानीय निकाय चुनाव: वाईएसआरसीपी ने टीडीपी पर धांधली का आरोप, पुलिस-अधिकारियों की मिलीभगत का दावा
सारांश
मुख्य बातें
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के सांसद मडिला गुरुमूर्ति और पूर्व मंत्री गुडिवाड़ा अमरनाथ ने रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को आरोप लगाया कि आंध्र प्रदेश के स्थानीय निकाय चुनावों में सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) को फायदा पहुँचाने के लिए पुलिस और चुनाव अधिकारी कथित तौर पर उसके नेताओं के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। दोनों नेताओं ने दावा किया कि विपक्षी उम्मीदवारों के नामांकन पत्र खारिज किए गए, उन्हें धमकाया गया और कथित तौर पर प्रत्येक टीडीपी उम्मीदवार से निर्विरोध जीत के बदले ₹40 से ₹50 लाख तक वसूले जा रहे हैं। ये आरोप वाईएसआरसीपी नेताओं की ओर से लगाए गए हैं और उपलब्ध जानकारी में इनकी स्वतंत्र पुष्टि या संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं है।
मुख्य आरोप और दावे
तिरुपति से लोकसभा सांसद मडिला गुरुमूर्ति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में दावा किया कि टीडीपी के प्रत्येक उम्मीदवार से निर्विरोध जीत सुनिश्चित कराने के बदले कथित तौर पर ₹40 से ₹50 लाख वसूले जा रहे हैं। उनके अनुसार, यह धनराशि पुलिसकर्मियों, चुनाव अधिकारियों और परिणामों को प्रभावित करने वाले अन्य व्यक्तियों के बीच बाँटी जा रही है।
गुरुमूर्ति ने आरोप लगाया कि टीडीपी नेताओं ने वाईएसआरसीपी उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोका, उन्हें धमकाया और कथित तौर पर मारपीट की। उन्होंने दावा किया कि रिटर्निंग अधिकारियों के कक्षों के अंदर भी नामांकन पत्र फाड़े गए, जबकि पुलिस मूकदर्शक बनी रही।
नामांकन रद्द करने पर सवाल
सांसद गुरुमूर्ति के अनुसार, चुनाव अधिकारियों ने मामूली तकनीकी आधारों और कथित तौर पर मनमाने तरीके से जाँच प्रक्रिया अपनाकर विपक्षी उम्मीदवारों के नामांकन खारिज किए। उन्होंने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य चुनावी प्रतिस्पर्धा समाप्त करना और टीडीपी उम्मीदवारों की निर्विरोध जीत सुनिश्चित करना है।
गुरुमूर्ति ने कहा, 'यह केवल चुनाव से जुड़ा विवाद नहीं है, बल्कि संगठित भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों का मामला है।' उन्होंने जोड़ा कि जिन लोगों की जिम्मेदारी लोकतंत्र की रक्षा करना है, वे ही कथित तौर पर इस गतिविधि का हिस्सा बन रहे हैं।
पूर्व मंत्री अमरनाथ के आरोप
वाईएसआरसीपी के पूर्व मंत्री गुडिवाड़ा अमरनाथ ने भी कहा कि आंध्र प्रदेश के स्थानीय निकाय चुनाव कथित चुनावी माफिया और बड़े पैमाने पर धन उगाही के मामले में बदल गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि टीडीपी नेता, पुलिसकर्मी और चुनाव अधिकारी एक संगठित गठजोड़ के तहत काम कर रहे हैं।
अमरनाथ ने सवाल उठाया कि क्या यही मुख्यमंत्री का लोकतंत्र का मॉडल है, जहाँ विपक्षी उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से रोका जाए और निर्विरोध जीत को कमाई का ज़रिया बनाया जाए। उन्होंने मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू से इन आरोपों पर जवाब माँगा।
माँग और अपीलें
दोनों नेताओं ने मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू से चुनावों के दौरान हुई कथित हिंसा, हेरफेर और भ्रष्टाचार पर सार्वजनिक जवाब देने की माँग की। साथ ही, राज्य निर्वाचन आयोग से पैसों के लेन-देन, विवादित नामांकनों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र जाँच कराने की अपील की।
गौरतलब है कि ये सभी आरोप वाईएसआरसीपी नेताओं की ओर से लगाए गए हैं और अभी तक न तो टीडीपी, न पुलिस और न ही चुनाव अधिकारियों की कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि भी उपलब्ध नहीं है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब आंध्र प्रदेश में टीडीपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार को सत्ता में आए अभी कुछ ही समय हुआ है और वाईएसआरसीपी विपक्ष की भूमिका में है। स्थानीय निकाय चुनावों में चुनावी प्रतिद्वंद्विता और आरोप-प्रत्यारोप आंध्र प्रदेश की राजनीति की पुरानी पहचान रहे हैं। यह मामला आगे चलकर राज्य निर्वाचन आयोग और न्यायिक हस्तक्षेप की माँग को बल दे सकता है।