आंध्र प्रदेश: वाईएसआरसीपी ने एसआईआर की समयसीमा एक माह बढ़ाने की माँग की, टीडीपी पर मतदाता डेटा दुरुपयोग का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) ने 10 जुलाई 2026 को मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) की समयसीमा एक महीने बढ़ाने की माँग की है। पार्टी का कथित आरोप है कि सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के नेता अधिकारियों पर दबाव डालकर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।
मुख्य आरोप: 'माय टीडीपी' ऐप पर डेटा अपलोड का दबाव
वाईएसआरसीपी के विधान परिषद सदस्य लेल्ला अप्पी रेड्डी ने अमरावती में मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि टीडीपी नेता बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) पर यह दबाव बना रहे हैं कि वे मतदाता संबंधी आँकड़े पहले 'मायटीडीपी' ऐप पर अपलोड करें और उसके बाद ही चुनाव आयोग को भेजें।
उन्होंने दावा किया कि सत्तारूढ़ दल के जनप्रतिनिधि, मंत्री और नेताओं के निजी सहायक तक इस दबाव अभियान में शामिल हैं। अप्पी रेड्डी के अनुसार, जब एक बीएलओ ने इस संबंध में पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, तो उसकी शिकायत स्वीकार नहीं की गई और उस पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया गया।
चुनाव आयोग से निष्पक्ष जाँच की माँग
अप्पी रेड्डी ने कहा, 'हमने इन अनियमितताओं की शिकायत चुनाव आयोग से की है। हम दोबारा आयोग को ज्ञापन सौंपेंगे और ज़रूरत पड़ने पर कानूनी विकल्प भी अपनाएंगे।' उन्होंने आयोग से अपने विवेकाधिकार का उपयोग करते हुए पूरे मामले की स्वतंत्र जाँच कराने की भी अपील की।
पार्टी के अनुसार, आत्मकुर और तंबल्लापल्ले सहित कई क्षेत्रों में मतदाता गणना प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएँ सामने आई हैं। वाईएसआरसीपी का दावा है कि सरकार द्वारा जारी प्रगति के आँकड़े जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते।
कुप्पम में 30,000 फर्जी मतदाताओं का दावा
अप्पी रेड्डी ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में बड़ी संख्या में फर्जी मतदाता मौजूद हैं। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के अपने विधानसभा क्षेत्र कुप्पम में ही करीब 30,000 फर्जी मतदाता होने की जानकारी सामने आई है। उन्होंने माँग की कि ऐसे सभी फर्जी नामों को मतदाता सूची से हटाया जाए।
वाईएसआरसीपी नेता ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और टीडीपी लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी कर राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं।
जगन मोहन रेड्डी का रुख और एसआईआर की स्थिति
वाईएसआरसीपी के अनुसार, पार्टी अध्यक्ष वाईएस जगन मोहन रेड्डी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि हर पात्र मतदाता को मतदान का अधिकार मिलना चाहिए। अप्पी रेड्डी ने कहा कि एसआईआर का काम अभी जमीनी स्तर पर पूरा नहीं हुआ है और प्रक्रिया धीमी गति से चल रही है, इसलिए समयसीमा एक महीने बढ़ाई जानी चाहिए।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब आंध्र प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं और मतदाता सूची की शुद्धता एक केंद्रीय राजनीतिक मुद्दा बन गई है। चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया और आगामी कानूनी कदम इस विवाद की दिशा तय करेंगे।