10 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

आंध्र प्रदेश: वाईएसआरसीपी ने एसआईआर की समयसीमा एक माह बढ़ाने की माँग की, टीडीपी पर मतदाता डेटा दुरुपयोग का आरोप

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
आंध्र प्रदेश: वाईएसआरसीपी ने एसआईआर की समयसीमा एक माह बढ़ाने की माँग की, टीडीपी पर मतदाता डेटा दुरुपयोग का आरोप

सारांश

आंध्र प्रदेश में एसआईआर विवाद गहराया — वाईएसआरसीपी ने टीडीपी पर मतदाता डेटा को 'मायटीडीपी' ऐप के ज़रिए हथियाने का आरोप लगाया, चुनाव आयोग से एक माह की मोहलत और निष्पक्ष जाँच की माँग की। कुप्पम में 30,000 फर्जी वोटों का दावा विवाद को और तीखा बनाता है।

मुख्य बातें

वाईएसआरसीपी ने 10 जुलाई 2026 को एसआईआर की समयसीमा एक महीने बढ़ाने की माँग की।
एमएलसी लेल्ला अप्पी रेड्डी ने आरोप लगाया कि टीडीपी नेता बीएलओ पर मतदाता डेटा पहले 'मायटीडीपी' ऐप पर अपलोड करने का दबाव बना रहे हैं।
एक बीएलओ की पुलिस थाने में शिकायत कथित तौर पर दर्ज नहीं की गई और उस पर वापस लेने का दबाव बनाया गया।
आत्मकुर और तंबल्लापल्ले सहित कई क्षेत्रों में मतदाता गणना में अनियमितताओं का दावा।
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के क्षेत्र कुप्पम में करीब 30,000 फर्जी मतदाताओं का आरोप।
वाईएसआरसीपी ने चुनाव आयोग को ज्ञापन देने और ज़रूरत पड़ने पर कानूनी विकल्प अपनाने की चेतावनी दी।

आंध्र प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) ने 10 जुलाई 2026 को मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) की समयसीमा एक महीने बढ़ाने की माँग की है। पार्टी का कथित आरोप है कि सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के नेता अधिकारियों पर दबाव डालकर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।

मुख्य आरोप: 'माय टीडीपी' ऐप पर डेटा अपलोड का दबाव

वाईएसआरसीपी के विधान परिषद सदस्य लेल्ला अप्पी रेड्डी ने अमरावती में मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि टीडीपी नेता बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) पर यह दबाव बना रहे हैं कि वे मतदाता संबंधी आँकड़े पहले 'मायटीडीपी' ऐप पर अपलोड करें और उसके बाद ही चुनाव आयोग को भेजें।

उन्होंने दावा किया कि सत्तारूढ़ दल के जनप्रतिनिधि, मंत्री और नेताओं के निजी सहायक तक इस दबाव अभियान में शामिल हैं। अप्पी रेड्डी के अनुसार, जब एक बीएलओ ने इस संबंध में पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, तो उसकी शिकायत स्वीकार नहीं की गई और उस पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया गया।

चुनाव आयोग से निष्पक्ष जाँच की माँग

अप्पी रेड्डी ने कहा, 'हमने इन अनियमितताओं की शिकायत चुनाव आयोग से की है। हम दोबारा आयोग को ज्ञापन सौंपेंगे और ज़रूरत पड़ने पर कानूनी विकल्प भी अपनाएंगे।' उन्होंने आयोग से अपने विवेकाधिकार का उपयोग करते हुए पूरे मामले की स्वतंत्र जाँच कराने की भी अपील की।

पार्टी के अनुसार, आत्मकुर और तंबल्लापल्ले सहित कई क्षेत्रों में मतदाता गणना प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएँ सामने आई हैं। वाईएसआरसीपी का दावा है कि सरकार द्वारा जारी प्रगति के आँकड़े जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते।

कुप्पम में 30,000 फर्जी मतदाताओं का दावा

अप्पी रेड्डी ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में बड़ी संख्या में फर्जी मतदाता मौजूद हैं। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के अपने विधानसभा क्षेत्र कुप्पम में ही करीब 30,000 फर्जी मतदाता होने की जानकारी सामने आई है। उन्होंने माँग की कि ऐसे सभी फर्जी नामों को मतदाता सूची से हटाया जाए।

वाईएसआरसीपी नेता ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और टीडीपी लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी कर राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं।

जगन मोहन रेड्डी का रुख और एसआईआर की स्थिति

वाईएसआरसीपी के अनुसार, पार्टी अध्यक्ष वाईएस जगन मोहन रेड्डी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि हर पात्र मतदाता को मतदान का अधिकार मिलना चाहिए। अप्पी रेड्डी ने कहा कि एसआईआर का काम अभी जमीनी स्तर पर पूरा नहीं हुआ है और प्रक्रिया धीमी गति से चल रही है, इसलिए समयसीमा एक महीने बढ़ाई जानी चाहिए।

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब आंध्र प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं और मतदाता सूची की शुद्धता एक केंद्रीय राजनीतिक मुद्दा बन गई है। चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया और आगामी कानूनी कदम इस विवाद की दिशा तय करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह चुनावी प्रक्रिया की स्वायत्तता पर सीधा हमला है। लेकिन यह भी ध्यान देने योग्य है कि ये दावे विपक्षी दल की ओर से आए हैं, और चुनाव आयोग ने अभी तक कोई पुष्टि नहीं की है। कुप्पम में 30,000 फर्जी वोटों का आरोप राजनीतिक रूप से तीखा है, लेकिन इसका सत्यापन स्वतंत्र जाँच के बिना संभव नहीं। असली कसौटी यह होगी कि चुनाव आयोग इन शिकायतों पर कितनी तेज़ी और पारदर्शिता से कार्रवाई करता है।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आंध्र प्रदेश में एसआईआर क्या है और विवाद क्यों है?
एसआईआर यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन मतदाता सूची को अद्यतन करने की एक विशेष प्रक्रिया है। वाईएसआरसीपी का आरोप है कि इस प्रक्रिया में टीडीपी नेता अधिकारियों पर दबाव डालकर डेटा को पार्टी के ऐप पर भेजवा रहे हैं, जिससे चुनावी निष्पक्षता खतरे में है।
वाईएसआरसीपी ने एसआईआर की समयसीमा बढ़ाने की माँग क्यों की?
पार्टी का कहना है कि जमीनी स्तर पर एसआईआर का काम अभी पूरा नहीं हुआ है और प्रक्रिया धीमी गति से चल रही है। इसलिए हर पात्र मतदाता को सूची में शामिल करने के लिए एक महीने की अतिरिक्त मोहलत दी जानी चाहिए।
'मायटीडीपी' ऐप विवाद क्या है?
वाईएसआरसीपी के एमएलसी लेल्ला अप्पी रेड्डी के अनुसार, टीडीपी नेता बूथ लेवल अधिकारियों पर दबाव बना रहे हैं कि वे मतदाता डेटा पहले 'मायटीडीपी' ऐप पर अपलोड करें और बाद में चुनाव आयोग को भेजें। यह आरोप अभी तक चुनाव आयोग या सरकार द्वारा सत्यापित नहीं किया गया है।
कुप्पम में फर्जी मतदाताओं का दावा किसने और क्यों किया?
वाईएसआरसीपी नेता अप्पी रेड्डी ने दावा किया कि मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के विधानसभा क्षेत्र कुप्पम में करीब 30,000 फर्जी मतदाता हैं। पार्टी ने माँग की है कि ऐसे सभी नामों को मतदाता सूची से हटाया जाए।
वाईएसआरसीपी आगे क्या कदम उठाएगी?
पार्टी ने चुनाव आयोग को दोबारा ज्ञापन सौंपने और ज़रूरत पड़ने पर कानूनी विकल्प अपनाने की घोषणा की है। साथ ही, चुनाव आयोग से स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच की माँग भी की गई है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले