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वाईएसआरसीपी ने आंध्र प्रदेश पुनर्गठन विधेयक पर समय की कमी की शिकायत की

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वाईएसआरसीपी ने आंध्र प्रदेश पुनर्गठन विधेयक पर समय की कमी की शिकायत की

सारांश

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने राज्यसभा में आंध्र प्रदेश पुनर्गठन विधेयक पर बहस के दौरान कम बोलने का समय मिलने की शिकायत की है। यह मामला राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है।

मुख्य बातें

वाईएसआरसीपी ने समय की कमी पर शिकायत की।
संसद में तेलुगु देशम पार्टी को अधिक समय मिला।
बिल का संबंध आंध्र प्रदेश के भविष्य से है।
राज्यसभा ने बिल को पारित किया है।
किसानों की चिंताओं का समाधान नहीं हुआ है।

अमरावती, 3 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने शुक्रवार को उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के अध्यक्ष सीपी राधाकृष्णन से शिकायत की है कि आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान राज्यसभा में पार्टी को बोलने का समय नहीं दिया गया।

वाई. वी. सुब्बा रेड्डी की अगुवाई में वाईएसआरसीपी के सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली में राधाकृष्णन से मिला और उन्हें एक प्रस्तुति दी।

प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि सात सांसद होने के बावजूद वाईएसआरसीपी को केवल पांच मिनट का समय मिला, और उनका माइक्रोफोन काट दिया गया। उन्होंने कहा कि तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) और अन्य छोटी पार्टियों को अधिक समय दिया गया और उन्होंने अपनी बात रखने का उचित अवसर मांगा।

सुब्बा रेड्डी ने राज्यसभा चेयरमैन से अपने भाषण का टेक्स्ट टेबल पर रखने की विनती की। पार्टी ने संसदीय परंपरा और नियमों से भटकाव की जांच करने की भी मांग की।

वाईएसआरसीपी ने शिकायत की है कि बिल पर चर्चा के दौरान पार्टी को बोलने का बहुत कम समय दिया गया।

यह उल्लेख किया गया है कि टीडीपी, जिसके सदन में केवल दो सदस्य हैं, को 15 मिनट से अधिक बोलने का समय दिया गया। जबकि भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस), जिसके चार सदस्य हैं, को भी केवल पांच मिनट दिया गया।

प्रस्तुति में लिखा गया है कि यह असमान और बेमेल व्यवहार विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि जिस बिल पर चर्चा हो रही है, वह सीधे आंध्र प्रदेश राज्य, उसके संवैधानिक भविष्य और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के सभी सात राज्यसभा सदस्यों द्वारा प्रतिनिधित्व किए जाने वाले लोगों के हितों से संबंधित है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, आंध्र प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी को अपने विचार व्यक्त करने का उचित और सार्थक अवसर नहीं देना, राज्य के लोगों की सही आवाज न देना है।

वाईएसआरसीपी ने यह भी कहा कि बार-बार कैमरा विजिटर्स गैलरी, विशेषकर टीडीपी सांसदों और राज्य के मंत्रियों पर ध्यान केंद्रित करता है। यह संयोग कम और पूर्व निर्धारित कार्य अधिक लगता है। पार्टी ने इसकी आधिकारिक जांच की मांग की।

राज्यसभा ने गुरुवार को आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2026 को पारित कर दिया, जिससे अमरावती को आंध्र प्रदेश की राजधानी के रूप में कानूनी पहचान मिलेगी। एक दिन पहले लोकसभा ने इस बिल को पास किया था।

वाईएसआरसीपी ने दोनों सदनों में इस बिल का विरोध इस आधार पर किया कि यह उन किसानों की चिंताओं को दूर करने में असफल रहा है जिन्होंने राज्य की राजधानी के विकास के लिए अपनी ज़मीन दी।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह घटना संसद में राजनीतिक असमानता का एक उदाहरण है। वाईएसआरसीपी को उचित समय न देना, आंध्र प्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य में गंभीर सवाल उठाता है। यह न केवल पार्टी के लिए बल्कि राज्य के लोगों के लिए भी चिंता का विषय है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वाईएसआरसीपी ने किस विषय पर शिकायत की है?
वाईएसआरसीपी ने आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2026 पर बोलने का समय न मिलने पर शिकायत की है।
कितने समय के लिए वाईएसआरसीपी को बोलने को मिला?
वाईएसआरसीपी को केवल पांच मिनट का बोलने का समय दिया गया।
बिल पर चर्चा के दौरान अन्य पार्टियों को कितना समय मिला?
टीडीपी को 15 मिनट से ज्यादा और बीआरएस को भी केवल पांच मिनट दिया गया।
वाईएसआरसीपी ने किस अधिकारी से शिकायत की?
वाईएसआरसीपी ने उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के चेयरमैन सीपी राधाकृष्णन से शिकायत की।
इस बिल का क्या महत्व है?
यह बिल आंध्र प्रदेश की राजधानी अमरावती को कानूनी पहचान प्रदान करता है।
राष्ट्र प्रेस
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