आंध्र प्रदेश एसआईआर विवाद: वाईएसआरसीपी का आरोप — 'मायटीडीपी ऐप' से हटाए जा रहे विपक्षी मतदाताओं के नाम
सारांश
मुख्य बातें
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) ने 17 जून को गंभीर आरोप लगाए कि आंध्र प्रदेश में जारी विशेष सारांश पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया का उपयोग बड़े पैमाने पर विपक्षी समर्थकों के नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए किया जा रहा है। पार्टी ने चुनाव आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है और चेतावनी दी है कि जवाब न मिलने पर लोकतांत्रिक आंदोलन छेड़ा जाएगा।
मुख्य आरोप और पार्टी का पक्ष
वाईएसआरसीपी नेता और पूर्व मंत्री साके शैलजानाथ ने ताडेपल्ली स्थित पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए दावा किया कि सत्तारूढ़ गठबंधन एसआईआर प्रक्रिया में 'मायटीडीपी ऐप' का इस्तेमाल मतदाता नाम हटाने के लिए कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकारी अधिकारियों द्वारा उपयोग किए जाने वाले आधिकारिक समूहों में यह ऐप शामिल किया गया है, जो मतदाता डेटा के दुरुपयोग का सीधा माध्यम बन रहा है।
शैलजानाथ ने यह भी आरोप लगाया कि अनंतपुर जिले के कुछ क्षेत्रों में फील्ड वेरिफिकेशन सीधे टीडीपी नेताओं के प्रभाव में संचालित हो रहा है। पार्टी ने पहले ही मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर एसआईआर में पारदर्शिता और मतदाता डेटा की सुरक्षा की माँग की है।
पूर्व के 'सेवा मित्र अभियान' से तुलना
शैलजानाथ ने स्मरण कराया कि इससे पहले सेवा मित्र अभियान के दौरान कथित तौर पर लगभग 30 लाख वाईएसआरसीपी समर्थकों के नाम मतदाता सूची से हटाने का प्रयास हुआ था, जिन्हें बाद में कानूनी हस्तक्षेप के ज़रिए बहाल कराया गया। उन्होंने बिहार, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में हुई इसी तरह की कथित घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि आंध्र प्रदेश में भी वही पैटर्न दोहराया जा रहा है।
अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया
वाईएसआरसीपी के पूर्व उपमुख्यमंत्री अमजद बाशा और पूर्व विधायक एस. रघुरामी रेड्डी ने भी आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया त्रुटियों से भरी है और इसका असली उद्देश्य विपक्षी समर्थकों को मतदाता सूची से बाहर करना है। उनके अनुसार, वाईएसआरसीपी समर्थकों को व्यवस्थित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है।
चुनाव आयोग से माँग
पार्टी ने चुनाव आयोग से तीन प्रमुख माँगें रखी हैं — पारदर्शी और निष्पक्ष एसआईआर प्रक्रिया सुनिश्चित करना, मतदाता डेटा के लीक होने को रोकना, और संवैधानिक मतदान अधिकारों की रक्षा करना। शैलजानाथ ने स्पष्ट किया कि यदि आयोग इन माँगों पर ध्यान नहीं देता, तो पार्टी जनता के मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए सड़क पर उतरने को तैयार है।
आगे क्या होगा
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब आंध्र प्रदेश में अगले चुनावों की तैयारियाँ पृष्ठभूमि में चल रही हैं। मतदाता सूची की शुद्धता और निष्पक्षता पर उठे ये सवाल चुनाव आयोग के लिए एक कड़ी परीक्षा हैं। आने वाले दिनों में चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया और न्यायालय में संभावित कानूनी कदम इस मामले की दिशा तय करेंगे।