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आंध्र प्रदेश एसआईआर विवाद: वाईएसआरसीपी का आरोप — 'मायटीडीपी ऐप' से हटाए जा रहे विपक्षी मतदाताओं के नाम

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आंध्र प्रदेश एसआईआर विवाद: वाईएसआरसीपी का आरोप — 'मायटीडीपी ऐप' से हटाए जा रहे विपक्षी मतदाताओं के नाम

सारांश

वाईएसआरसीपी ने आरोप लगाया है कि आंध्र प्रदेश में एसआईआर की आड़ में 'मायटीडीपी ऐप' के ज़रिए विपक्षी मतदाताओं के नाम व्यवस्थित तरीके से हटाए जा रहे हैं। पूर्व में सेवा मित्र अभियान के दौरान 30 लाख नाम हटाने के कथित प्रयास का हवाला देते हुए पार्टी ने चुनाव आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है।

मुख्य बातें

वाईएसआरसीपी ने आरोप लगाया कि आंध्र प्रदेश में एसआईआर प्रक्रिया का दुरुपयोग विपक्षी मतदाताओं के नाम हटाने के लिए हो रहा है।
पार्टी नेता साके शैलजानाथ ने दावा किया कि सत्तारूढ़ गठबंधन 'मायटीडीपी ऐप' से मतदाता डेटा का दुरुपयोग कर रहा है।
अनंतपुर जिले में फील्ड वेरिफिकेशन कथित तौर पर टीडीपी नेताओं के सीधे प्रभाव में हो रहा है।
पूर्व के सेवा मित्र अभियान में कथित तौर पर 30 लाख वाईएसआरसीपी समर्थकों के नाम हटाने का प्रयास हुआ था, जिन्हें कानूनी हस्तक्षेप से बहाल कराया गया।
पार्टी ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपा; जवाब न मिलने पर लोकतांत्रिक आंदोलन की चेतावनी दी।

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) ने 17 जून को गंभीर आरोप लगाए कि आंध्र प्रदेश में जारी विशेष सारांश पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया का उपयोग बड़े पैमाने पर विपक्षी समर्थकों के नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए किया जा रहा है। पार्टी ने चुनाव आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है और चेतावनी दी है कि जवाब न मिलने पर लोकतांत्रिक आंदोलन छेड़ा जाएगा।

मुख्य आरोप और पार्टी का पक्ष

वाईएसआरसीपी नेता और पूर्व मंत्री साके शैलजानाथ ने ताडेपल्ली स्थित पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए दावा किया कि सत्तारूढ़ गठबंधन एसआईआर प्रक्रिया में 'मायटीडीपी ऐप' का इस्तेमाल मतदाता नाम हटाने के लिए कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकारी अधिकारियों द्वारा उपयोग किए जाने वाले आधिकारिक समूहों में यह ऐप शामिल किया गया है, जो मतदाता डेटा के दुरुपयोग का सीधा माध्यम बन रहा है।

शैलजानाथ ने यह भी आरोप लगाया कि अनंतपुर जिले के कुछ क्षेत्रों में फील्ड वेरिफिकेशन सीधे टीडीपी नेताओं के प्रभाव में संचालित हो रहा है। पार्टी ने पहले ही मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर एसआईआर में पारदर्शिता और मतदाता डेटा की सुरक्षा की माँग की है।

पूर्व के 'सेवा मित्र अभियान' से तुलना

शैलजानाथ ने स्मरण कराया कि इससे पहले सेवा मित्र अभियान के दौरान कथित तौर पर लगभग 30 लाख वाईएसआरसीपी समर्थकों के नाम मतदाता सूची से हटाने का प्रयास हुआ था, जिन्हें बाद में कानूनी हस्तक्षेप के ज़रिए बहाल कराया गया। उन्होंने बिहार, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में हुई इसी तरह की कथित घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि आंध्र प्रदेश में भी वही पैटर्न दोहराया जा रहा है।

अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया

वाईएसआरसीपी के पूर्व उपमुख्यमंत्री अमजद बाशा और पूर्व विधायक एस. रघुरामी रेड्डी ने भी आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया त्रुटियों से भरी है और इसका असली उद्देश्य विपक्षी समर्थकों को मतदाता सूची से बाहर करना है। उनके अनुसार, वाईएसआरसीपी समर्थकों को व्यवस्थित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है।

चुनाव आयोग से माँग

पार्टी ने चुनाव आयोग से तीन प्रमुख माँगें रखी हैं — पारदर्शी और निष्पक्ष एसआईआर प्रक्रिया सुनिश्चित करना, मतदाता डेटा के लीक होने को रोकना, और संवैधानिक मतदान अधिकारों की रक्षा करना। शैलजानाथ ने स्पष्ट किया कि यदि आयोग इन माँगों पर ध्यान नहीं देता, तो पार्टी जनता के मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए सड़क पर उतरने को तैयार है।

आगे क्या होगा

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब आंध्र प्रदेश में अगले चुनावों की तैयारियाँ पृष्ठभूमि में चल रही हैं। मतदाता सूची की शुद्धता और निष्पक्षता पर उठे ये सवाल चुनाव आयोग के लिए एक कड़ी परीक्षा हैं। आने वाले दिनों में चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया और न्यायालय में संभावित कानूनी कदम इस मामले की दिशा तय करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

और हर बार विपक्षी दल ही निशाने पर होता है। असली सवाल यह है कि चुनाव आयोग इस बार क्या ठोस कदम उठाता है — क्योंकि 30 लाख नामों की कथित बहाली का पिछला प्रसंग बताता है कि निगरानी तंत्र में गंभीर खामियाँ हैं। 'मायटीडीपी ऐप' को आधिकारिक सरकारी समूहों में शामिल किए जाने का आरोप, अगर सत्य है, तो यह केवल राजनीतिक विवाद नहीं बल्कि संवैधानिक उल्लंघन की श्रेणी में आता है। चुनाव आयोग की चुप्पी या विलंब इस मामले को अदालत तक ले जाने की ज़मीन तैयार कर सकती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आंध्र प्रदेश में एसआईआर विवाद क्या है?
वाईएसआरसीपी का आरोप है कि आंध्र प्रदेश में चल रही विशेष सारांश पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया का उपयोग सत्तारूढ़ गठबंधन विपक्षी समर्थकों के नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए कर रहा है। पार्टी ने इसके लिए 'मायटीडीपी ऐप' को ज़िम्मेदार ठहराया है।
'मायटीडीपी ऐप' का मतदाता सूची से क्या संबंध बताया जा रहा है?
वाईएसआरसीपी के अनुसार, सरकारी अधिकारियों के आधिकारिक समूहों में 'मायटीडीपी ऐप' को शामिल किया गया है, जिसके ज़रिए मतदाता डेटा संग्रह और दुरुपयोग किया जा रहा है। यह आरोप कथित तौर पर अनंतपुर जिले में फील्ड वेरिफिकेशन के दौरान सामने आया।
पहले के सेवा मित्र अभियान में क्या हुआ था?
वाईएसआरसीपी नेताओं के अनुसार, पूर्व के सेवा मित्र अभियान के दौरान कथित तौर पर लगभग 30 लाख वाईएसआरसीपी समर्थकों के नाम मतदाता सूची से हटाने का प्रयास हुआ था। बाद में कानूनी हस्तक्षेप के ज़रिए इन नामों को बहाल कराया गया।
वाईएसआरसीपी ने चुनाव आयोग से क्या माँगें रखी हैं?
पार्टी ने तीन प्रमुख माँगें रखी हैं — पारदर्शी और निष्पक्ष एसआईआर प्रक्रिया, मतदाता डेटा के लीक होने पर रोक, और संवैधानिक मतदान अधिकारों की सुरक्षा। पार्टी ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन भी सौंपा है।
क्या वाईएसआरसीपी कोई कानूनी या आंदोलन की कार्रवाई करने वाली है?
पार्टी नेता साके शैलजानाथ ने चेतावनी दी है कि यदि चुनाव आयोग समय पर जवाब नहीं देता, तो वाईएसआरसीपी जनता के मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू करेगी। कानूनी कदम उठाने की संभावना भी बनी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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