9 अक्टूबर 2026
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चंद्रबाबू नायडू का ऐलान: एनडीए स्थानीय निकाय चुनावों में बीसी को देगा 34% टिकट

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चंद्रबाबू नायडू का ऐलान: एनडीए स्थानीय निकाय चुनावों में बीसी को देगा 34% टिकट

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने आरक्षण याचिका खारिज की तो चंद्रबाबू नायडू ने सीधे टिकट का दांव खेला — एनडीए स्थानीय निकाय चुनावों में बीसी समुदाय को 34% से अधिक सीटें देगा। यह कदम कानूनी बाधा के बावजूद बीसी वोट बैंक को साधने की राजनीतिक चतुराई है।

मुख्य बातें

चंद्रबाबू नायडू ने 9 अक्टूबर 2026 को ऐलान किया कि एनडीए स्थानीय निकाय चुनावों में बीसी समुदाय को 34% से अधिक टिकट देगा।
आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने 1 अक्टूबर 2026 को बीसी के लिए 34% आरक्षण देने वाले दो सरकारी आदेश रद्द किए; सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकार की याचिका भी खारिज की।
नायडू के अनुसार बीसी कोटा एनटीआर के 24% से बढ़ाकर 34% किया था, पर पिछली वाईएसआरसीपी सरकार ने इसे वापस 24% पर ला दिया।
'मी भूमी-मी हक्कू' कार्यक्रम के तहत अब तक 40.58 लाख पट्टादार पासबुक वितरित; अक्टूबर में 790 गाँवों के 4 लाख+ किसानों को मिलीं।
नायडू का दावा — बीसी समुदाय समाज का 50% से अधिक हिस्सा और पिछले 45 वर्षों से टीडीपी का मुख्य समर्थन आधार।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने 9 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि एनडीए गठबंधन आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में पिछड़े वर्गों (बीसी) को 34 प्रतिशत से अधिक सीटें आवंटित करेगा। यह घोषणा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा राज्य सरकार की उस याचिका को खारिज किए जाने के तुरंत बाद आई, जिसमें आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसने स्थानीय निकायों में बीसी के लिए 34 प्रतिशत आरक्षण रद्द कर दिया था।

मुख्य घटनाक्रम

नायडू प्रकाशम जिले के नरसिंगोलू में 'मी भूमी-मी हक्कू' कार्यक्रम के तहत किसानों को पट्टादार पासबुक वितरित करने के बाद एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के अध्यक्ष के रूप में यह आश्वासन दिया कि न्यायिक बाधा के बावजूद गठबंधन बीसी समुदाय को उचित प्रतिनिधित्व देने से पीछे नहीं हटेगा।

गौरतलब है कि 1 अक्टूबर 2026 को आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने स्थानीय निकाय चुनावों में बीसी को 34 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने वाले दो सरकारी आदेशों को इस आधार पर रद्द किया था कि सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों के तहत स्थानीय निकायों में सभी श्रेणियों का कुल आरक्षण 50 प्रतिशत की सीमा से अधिक नहीं हो सकता।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

मुख्यमंत्री नायडू ने बताया कि टीडीपी के संस्थापक एन.टी. रामाराव (एनटीआर) ने स्थानीय निकायों में बीसी समुदाय के लिए 24 प्रतिशत आरक्षण लागू किया था, जिसे बाद में उन्होंने बढ़ाकर 34 प्रतिशत कर दिया था। उनके अनुसार, पिछली वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) सरकार ने इसे वापस 24 प्रतिशत पर ला दिया था।

नायडू ने दावा किया कि जब वर्तमान एनडीए गठबंधन सरकार ने आरक्षण को पुनः 34 प्रतिशत करने का प्रयास किया, तो वाईएसआरसीपी ने न्यायालय का रुख किया और इस कदम को अवरुद्ध करा दिया। उन्होंने कहा कि यह पार्टी बीसी समुदाय के विरुद्ध है।

सरकार की रणनीति

न्यायिक आदेश के बाद आरक्षण कानूनी रूप से लागू नहीं किया जा सकता, इसलिए एनडीए ने टिकट आवंटन के माध्यम से बीसी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की रणनीति अपनाई है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि गठबंधन बीसी समुदाय से 34 प्रतिशत से अधिक उम्मीदवार मैदान में उतारेगा।

नायडू ने यह भी दावा किया कि बीसी समुदाय समाज का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा है और पिछले 45 वर्षों से टीडीपी की आधारशिला रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास किए हैं।

पट्टादार पासबुक वितरण

इसी अवसर पर नायडू ने 'मी भूमी-मी हक्कू' कार्यक्रम के तहत किसानों को पट्टादार पासबुक वितरित कीं। उन्होंने बताया कि अब तक 40.58 लाख पासबुक वितरित की जा चुकी हैं और अकेले अक्टूबर माह में 790 गाँवों के 4 लाख से अधिक किसानों को राजसी मुहर वाली पासबुक सौंपी गई हैं।

वाईएसआरसीपी पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के कार्यकाल में जमीनों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई और व्यापक अनिश्चितता का माहौल था। उन्होंने 'दो इंजन वाली सरकार' के माध्यम से विकास और सुधार की बात दोहराई।

आगे की राह

स्थानीय निकाय चुनावों की तारीखों की घोषणा अभी बाकी है, लेकिन एनडीए का यह ऐलान बीसी वोट बैंक को साधने की स्पष्ट रणनीति का संकेत देता है। 18 अगस्त 2026 को नायडू द्वारा घोषित बढ़े हुए कोटे को न्यायिक बाधा का सामना करने के बाद टिकट आवंटन का विकल्प राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर इसकी अपनी सीमाएँ हैं। टिकट देना और उम्मीदवार जिताना दो अलग बातें हैं; बीसी समुदाय को वास्तविक राजनीतिक शक्ति तब मिलती है जब वे जीतते हैं, महज मैदान में उतारे जाते हैं। वाईएसआरसीपी पर आरोप लगाना सहज राजनीति है, लेकिन असली सवाल यह है कि 45 वर्षों के टीडीपी-बीसी रिश्ते के बावजूद आरक्षण को न्यायिक कसौटी पर खरा साबित करने का काम इतने वर्षों में क्यों अधूरा रहा। स्थानीय निकाय चुनावों की तारीखें घोषित होने पर ही पता चलेगा कि यह वादा महज चुनावी बयानबाजी है या ठोस कदम।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चंद्रबाबू नायडू ने बीसी को 34% टिकट देने का ऐलान क्यों किया?
सर्वोच्च न्यायालय ने आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की याचिका खारिज कर दी, जिसने स्थानीय निकायों में बीसी के लिए 34% कानूनी आरक्षण रद्द कर दिया था। इस न्यायिक बाधा के बाद नायडू ने टिकट आवंटन के माध्यम से बीसी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की वैकल्पिक रणनीति अपनाई।
आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने 34% बीसी आरक्षण क्यों रद्द किया?
1 अक्टूबर 2026 को उच्च न्यायालय ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों के अनुसार स्थानीय निकायों में सभी श्रेणियों का कुल आरक्षण 50% की सीमा से अधिक नहीं हो सकता। इस आधार पर बीसी को 34% आरक्षण प्रदान करने वाले दो सरकारी आदेशों को रद्द कर दिया गया।
आंध्र प्रदेश में बीसी आरक्षण का इतिहास क्या है?
टीडीपी के संस्थापक एनटीआर ने स्थानीय निकायों में बीसी के लिए 24% आरक्षण लागू किया था। चंद्रबाबू नायडू ने इसे 34% तक बढ़ाया, लेकिन वाईएसआरसीपी सरकार ने इसे वापस 24% कर दिया। वर्तमान एनडीए सरकार के 34% बहाल करने के प्रयास को न्यायालय में चुनौती दी गई।
'मी भूमी-मी हक्कू' कार्यक्रम क्या है और अब तक कितने किसानों को लाभ मिला?
यह आंध्र प्रदेश सरकार का भूमि अधिकार कार्यक्रम है जिसके तहत किसानों को पट्टादार पासबुक वितरित की जाती हैं। नायडू के अनुसार अब तक 40.58 लाख पासबुक वितरित हो चुकी हैं और अकेले अक्टूबर 2026 में 790 गाँवों के 4 लाख से अधिक किसानों को राजसी मुहर वाली पासबुक दी गईं।
वाईएसआरसीपी की इस मामले में क्या भूमिका रही?
नायडू के अनुसार जब एनडीए गठबंधन सरकार ने बीसी आरक्षण को पुनः 34% करने का प्रयास किया, तो वाईएसआरसीपी ने न्यायालय का रुख किया और इसे कानूनी रूप से रोक दिया। नायडू ने इसे बीसी समुदाय के प्रति विरोधी रवैये के रूप में चित्रित किया, हालांकि वाईएसआरसीपी ने अभी तक इस पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
राष्ट्र प्रेस
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