आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने स्थानीय निकाय चुनावों में पिछड़े वर्गों का 34% आरक्षण रद्द किया, नायडू सरकार सुप्रीम कोर्ट जाएगी
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने 1 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार को बड़ा झटका देते हुए स्थानीय निकाय चुनावों में पिछड़े वर्गों (BC) को दिए जाने वाले 34 प्रतिशत आरक्षण को रद्द कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह कोटा सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय 50 प्रतिशत की आरक्षण सीमा का उल्लंघन करता है।
हाईकोर्ट का आदेश और कानूनी आधार
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उन दो सरकारी आदेशों (GOs) को निरस्त कर दिया, जिनमें ग्रामीण स्थानीय निकायों में बीसी के लिए 34 प्रतिशत और शहरी स्थानीय निकायों में 33.33 प्रतिशत आरक्षण निर्धारित किया गया था। अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के स्थापित दिशानिर्देशों के अनुसार, स्थानीय निकायों में सभी वर्गों को मिलाकर कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं किया जा सकता।
यह आदेश ग्राम पंचायत और नगर पालिका चुनावों से संबंधित कई रिट याचिकाओं पर एकसाथ सुनाया गया। अदालत ने उन याचिकाओं को अलग से खारिज कर दिया, जिनमें चुनाव 'विशेष सघन संशोधन' (Special Intensive Revision — SIR) की प्रक्रिया पूरी होने तक स्थगित करने की माँग की गई थी।
चुनाव आयोग को छह सप्ताह का निर्देश
हाईकोर्ट ने आरक्षण रद्द करने के साथ-साथ राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वे छह सप्ताह के भीतर स्थानीय निकाय चुनाव की प्रक्रिया शुरू करें। गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनाव काफी समय से लंबित हैं और इस निर्देश से चुनावी प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।
नायडू सरकार की प्रतिक्रिया
हाईकोर्ट के आदेश के तुरंत बाद मुख्यमंत्री नायडू ने अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट में तत्काल अपील दायर करने का निर्देश दिया। नायडू सरकार के लिए यह राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामला है, क्योंकि 2024 के विधानसभा चुनावों में एनडीए ने बीसी आरक्षण को 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 34 प्रतिशत करने का वादा मतदाताओं से किया था।
मुख्यमंत्री ने 18 अगस्त 2026 को विधानसभा में इस कोटे की घोषणा करते हुए कहा था कि यह कदम गठबंधन की पिछड़ा वर्ग कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है और '34 प्रतिशत आरक्षण का अर्थ है निर्णय लेने की शक्ति में भागीदारी।'
राजनीतिक और सामाजिक निहितार्थ
यह ऐसे समय में आया है जब आंध्र प्रदेश में पिछड़े वर्ग बड़ी जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं और उनकी राजनीतिक भागीदारी सभी दलों के लिए संवेदनशील विषय है। हाईकोर्ट का यह फैसला नायडू सरकार की उस रणनीति पर सीधा प्रहार है जो बीसी समुदाय को एनडीए की ओर आकर्षित करने पर आधारित थी।
आलोचकों का कहना है कि यदि सुप्रीम कोर्ट भी हाईकोर्ट के रुख को बरकरार रखता है, तो सरकार को अपना चुनावी वादा पूरा करने के लिए संवैधानिक संशोधन के रास्ते तलाशने होंगे — जो एक लंबी और जटिल प्रक्रिया है।
आगे क्या होगा
अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं, जहाँ नायडू सरकार जल्द ही अपील दायर करने की तैयारी में है। इस बीच, हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार छह सप्ताह में स्थानीय निकाय चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है — हालाँकि आरक्षण का अंतिम स्वरूप सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निर्भर करेगा।