13 अक्टूबर 2026
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आंध्र प्रदेश स्थानीय निकाय चुनाव: गजट नोटिफिकेशन के बाद एसईसी जारी करेगा शेड्यूल, आरक्षण सीमा 50% तय

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आंध्र प्रदेश स्थानीय निकाय चुनाव: गजट नोटिफिकेशन के बाद एसईसी जारी करेगा शेड्यूल, आरक्षण सीमा 50% तय

सारांश

आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों का शेड्यूल गजट नोटिफिकेशन पर टिका है। बीसी को 34% आरक्षण देने का वादा अदालत में टिक नहीं सका — उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय दोनों ने 50% की सीमा बरकरार रखी। चंद्रबाबू नायडू के चुनावी वादे और न्यायिक वास्तविकता के बीच की यह खाई अब चुनाव की पूरी रूपरेखा तय करेगी।

मुख्य बातें

एसईसी अनिल चंद्र पुनेथा ने 13 अक्टूबर 2026 को कहा — गजट नोटिफिकेशन के बाद ही जारी होगा आंध्र प्रदेश स्थानीय निकाय चुनावों का शेड्यूल।
20 राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में उम्मीदवारों की सुरक्षा और जाति प्रमाण पत्र की माँग उठाई गई।
राज्य सरकार ने 17 नगर निगमों और 106 नगर पालिकाओं/पंचायतों में एसटी, एससी, बीसी और महिलाओं के लिए आरक्षण घोषित किया।
आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने 1 अक्टूबर को बीसी के लिए 34% आरक्षण रद्द किया; कुल सीमा 50% पर बरकरार।
सर्वोच्च न्यायालय ने 9 अक्टूबर को उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की; 'यूनिफाइड फैमिली सर्वे' के कानूनी आधार पर सवाल उठाए।
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने 18 अगस्त को बीसी को ग्रामीण निकायों में 34% और शहरी निकायों में 33.33% आरक्षण देने का वादा किया था।

राज्य चुनाव आयुक्त (एसईसी) अनिल चंद्र पुनेथा ने मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को विजयवाड़ा में स्पष्ट किया कि आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों का आधिकारिक कार्यक्रम तभी घोषित किया जाएगा, जब संबंधित विभाग गजट नोटिफिकेशन जारी कर दें और राज्य सरकार अपनी तैयारी की जानकारी एसईसी को दे। यह घोषणा उन्होंने 20 राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ हुई एक बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए की।

बैठक में क्या हुआ

पुनेथा ने आश्वासन दिया कि चुनाव प्रभावी और निष्पक्ष तरीके से कराए जाएंगे। उन्होंने संवेदनशील और अति-संवेदनशील इलाकों में समुचित सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने का भरोसा भी दिलाया। बैठक में शामिल राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की सुरक्षा की माँग रखी और समय पर जाति प्रमाण पत्र जारी करने सहित कई सुझाव एसईसी को दिए।

आरक्षण की ताज़ा स्थिति

राज्य सरकार ने सोमवार, 12 अक्टूबर को 17 नगर निगमों में मेयर तथा 106 नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में अध्यक्ष पदों के लिए अनुसूचित जनजाति (एसटी), अनुसूचित जाति (एससी), पिछड़ा वर्ग (बीसी) और महिलाओं के लिए आरक्षण की घोषणा की। इसके तहत एसटी के लिए मंगलगीरी-ताडेपल्ली में एक मेयर सीट, एससी के लिए कुरनूल (महिला) और राजमहेंद्रवरम (सामान्य) में दो सीटें, तथा बीसी के लिए काकीनाडा, मछलीपट्टनम, एलुरु, अनंतपुरम और चित्तूर में पाँच सीटें आरक्षित की गई हैं।

विजयनगरम, श्रीकाकुलम, गुंटूर, कडप्पा और ग्रेटर विशाखापत्तनम नगर निगम (जीवीएमसी) में मेयर की पाँच सीटें महिलाओं (सामान्य) के लिए आरक्षित की गई हैं। वहीं तिरुपति, विजयवाड़ा, ओंगोल और नेल्लोर में मेयर की सीटें अनारक्षित रखी गई हैं।

नगर प्रशासन के कमिश्नर और डायरेक्टर पी. संपत कुमार ने राज्य के 13 बड़े नगर निगमों में वार्ड-वार सीटों के आरक्षण को अंतिम रूप देते हुए एक आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया।

न्यायालय का हस्तक्षेप और 50% की सीमा

आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने 1 अक्टूबर को स्थानीय निकाय चुनावों में बीसी के लिए 34 प्रतिशत आरक्षण देने वाले सरकार के दो आदेशों को रद्द कर दिया। न्यायालय ने कहा कि यह कोटा सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत निर्धारित कुल 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा का उल्लंघन करता है।

सर्वोच्च न्यायालय ने 9 अक्टूबर को उच्च न्यायालय के इस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। शीर्ष अदालत ने बीसी कोटा बढ़ाने के औचित्य के लिए राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत 'यूनिफाइड फैमिली सर्वे' के नतीजों के कानूनी आधार पर भी सवाल उठाए।

गौरतलब है कि यह फैसला मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के लिए एक राजनीतिक झटका है, क्योंकि स्थानीय निकायों में बीसी आरक्षण को 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 34 प्रतिशत करना उनके 2024 विधानसभा चुनाव के मुख्य वादों में से एक था। नायडू ने 18 अगस्त को इस बढ़े हुए कोटे की घोषणा करते हुए कहा था कि बीसी को ग्रामीण स्थानीय निकायों में 34 प्रतिशत और शहरी स्थानीय निकायों में 33.33 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। अब उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय दोनों के फैसलों के बाद कुल आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत पर ही बरकरार रहेगी।

आगे की राह

एसईसी के अनुसार, चुनाव की अधिसूचना तभी जारी होगी जब राज्य सरकार सभी विभागीय गजट नोटिफिकेशन पूरी करके तैयारी की जानकारी देगी। यह ऐसे समय में आया है जब आरक्षण के कानूनी विवाद अभी भी पूरी तरह नहीं सुलझे हैं और राजनीतिक दल अपने उम्मीदवारों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। आने वाले हफ्तों में गजट नोटिफिकेशन की समयसीमा और सुरक्षा व्यवस्था पर राज्य सरकार का रुख यह तय करेगा कि चुनाव कब और किन परिस्थितियों में होंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय दोनों ने उस वादे की कानूनी बुनियाद को कमज़ोर पाया। 'यूनिफाइड फैमिली सर्वे' पर अदालती सवाल यह दर्शाते हैं कि राज्य सरकारें अक्सर आरक्षण विस्तार के लिए डेटा की पर्याप्त तैयारी किए बिना घोषणाएँ कर देती हैं। अब 50% की सीमा के भीतर रहकर चुनाव कराना सरकार के लिए उन मतदाताओं को समझाने की चुनौती भी है जिनसे बड़े वादे किए गए थे।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आंध्र प्रदेश स्थानीय निकाय चुनावों का शेड्यूल कब घोषित होगा?
राज्य चुनाव आयुक्त अनिल चंद्र पुनेथा के अनुसार, चुनाव का शेड्यूल तभी जारी होगा जब संबंधित विभाग गजट नोटिफिकेशन जारी कर दें और राज्य सरकार अपनी तैयारी की जानकारी एसईसी को दे। अभी तक कोई तारीख निश्चित नहीं की गई है।
आंध्र प्रदेश में बीसी आरक्षण पर अदालत ने क्या फैसला दिया?
आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने 1 अक्टूबर 2026 को स्थानीय निकाय चुनावों में बीसी के लिए 34% आरक्षण देने वाले सरकार के दो आदेशों को रद्द कर दिया, क्योंकि यह कुल 50% आरक्षण सीमा का उल्लंघन था। सर्वोच्च न्यायालय ने 9 अक्टूबर को इस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका भी खारिज कर दी।
आंध्र प्रदेश में नगर निगमों की मेयर सीटों पर किसके लिए क्या आरक्षण है?
17 नगर निगमों में से एसटी के लिए मंगलगीरी-ताडेपल्ली, एससी के लिए कुरनूल और राजमहेंद्रवरम, बीसी के लिए काकीनाडा, मछलीपट्टनम, एलुरु, अनंतपुरम और चित्तूर, तथा महिलाओं (सामान्य) के लिए विजयनगरम, श्रीकाकुलम, गुंटूर, कडप्पा और जीवीएमसी में सीटें आरक्षित हैं। तिरुपति, विजयवाड़ा, ओंगोल और नेल्लोर में सीटें अनारक्षित रखी गई हैं।
चंद्रबाबू नायडू का बीसी आरक्षण वादा क्या था और वह क्यों विवादित रहा?
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने 18 अगस्त को घोषणा की थी कि बीसी को ग्रामीण निकायों में 34% और शहरी निकायों में 33.33% आरक्षण मिलेगा, जो उनके 2024 विधानसभा चुनाव के प्रमुख वादों में था। लेकिन उच्च न्यायालय ने इसे 50% सीमा का उल्लंघन माना और सर्वोच्च न्यायालय ने आधार बने 'यूनिफाइड फैमिली सर्वे' के कानूनी आधार पर भी सवाल उठाए।
'यूनिफाइड फैमिली सर्वे' पर सर्वोच्च न्यायालय ने क्या कहा?
सर्वोच्च न्यायालय ने 9 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा बीसी कोटा बढ़ाने के लिए आधार बनाए गए 'यूनिफाइड फैमिली सर्वे' के नतीजों के कानूनी आधार पर सवाल उठाए। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि केवल सर्वे डेटा आरक्षण सीमा बढ़ाने का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता।
राष्ट्र प्रेस
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