राजस्थान पंचायत चुनाव 2025: कलेक्टरों और एसडीएम को आरक्षण तय करने का अधिकार, नवंबर तक मतदान का प्रस्ताव
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान में आगामी पंचायत चुनावों की तैयारियों ने रफ्तार पकड़ ली है। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने 25 जुलाई को जिला कलेक्टरों और उपमंडल मजिस्ट्रेटों (एसडीएम) को पंचायती राज संस्थाओं में श्रेणीवार आरक्षण निर्धारित करने की जिम्मेदारी सौंपी है। यह आदेश विभाग के सचिव एवं आयुक्त जोगाराम द्वारा जारी किए गए हैं।
किसे मिली कौन-सी जिम्मेदारी
नई व्यवस्था के तहत जिला कलेक्टर अपने-अपने जिलों में जिला परिषदों और पंचायत समितियों के वार्डों तथा प्रधान के पदों के लिए आरक्षण तय करेंगे। वहीं, उप-विभागीय अधिकारी (एसडीओ)/एसडीएम अपने अधिकार क्षेत्र में ग्राम पंचायत वार्डों और सरपंच पदों के आरक्षण को अंतिम रूप देंगे। सरपंच, उप-सरपंच, प्रधान, जिला प्रमुख और वार्ड सदस्यों के पदों के लिए लॉटरी जिला मुख्यालयों पर कलेक्टरों और उप-मंडल स्तर पर एसडीएम की देखरेख में आयोजित की जाएगी।
ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का इंतजार
आरक्षण मैट्रिक्स को अंतिम रूप देने से पहले अधिकारियों को ओबीसी (राजनीतिक) आयोग की रिपोर्ट का इंतजार करना होगा, जिसके 5 अगस्त तक प्रस्तुत होने की उम्मीद है। राजस्थान सरकार ने हाई कोर्ट को बताया है कि यह आयोग 15 जुलाई को जारी न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में अपना सर्वेक्षण पूरा कर रिपोर्ट समय पर सौंपेगा। रिपोर्ट मिलने के बाद लॉटरी प्रणाली के माध्यम से आरक्षण प्रक्रिया 15 अगस्त तक पूरी होने की संभावना है।
चुनाव कार्यक्रम और न्यायालय का निर्देश
राजस्थान हाई कोर्ट के समक्ष हुई हालिया सुनवाई में राज्य चुनाव आयोग ने संकेत दिया कि चुनाव प्रक्रिया अगस्त में शुरू होने की संभावना है और मतदान चार चरणों में कराया जाएगा। अदालत के समक्ष प्रस्तुत अस्थायी कार्यक्रम के अनुसार, पूरी प्रक्रिया 15 नवंबर तक समाप्त होने का प्रस्ताव है — जो न्यायालय के 90 दिनों के भीतर चुनाव संपन्न कराने के निर्देश के अनुरूप है। आरक्षण अधिसूचित होने के बाद राज्य चुनाव आयोग अंतिम चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करेगा।
चुनाव का दायरा
राजस्थान भर में 41 जिला परिषदों, 457 पंचायत समितियों और 14,403 ग्राम पंचायतों के लिए चुनाव नवंबर तक संपन्न होने का प्रस्ताव है। यह चुनाव ग्रामीण शासन के लिहाज से राज्य की सबसे बड़ी प्रशासनिक कवायद में से एक है, जिसमें लाखों मतदाता भाग लेंगे।
आगे क्या होगा
ओबीसी आयोग की रिपोर्ट और लॉटरी आधारित आरक्षण प्रक्रिया के बाद राज्य चुनाव आयोग द्वारा आधिकारिक चुनाव कार्यक्रम जारी किया जाएगा। यह प्रक्रिया न्यायालय की निगरानी में चल रही है, इसलिए किसी भी देरी का सीधा असर चुनाव की समय-सीमा पर पड़ सकता है।